islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. विश्व क़ुद्स दिवस

    विश्व क़ुद्स दिवस

    Rate this post

    क़ुद्स, पहला क़िबला और दुनिया भर के मुसलमानों का दूसरा हरम है यह फ़िलिस्तीन के उन दसियों लाख मुसलमानों की असली ज़मीन है जिसे आलमी इस्तेकबार ने ग़ासिब सेहयोनियों (जायोनियों) के हाथों आज से ठीक 60 साल पहले सन 1948 में अपने देश से निकाल कर क़ुद्स के ग़ासिब, सेहयोनी के हाथों में दे दिया था।

     इस साम्राज्यवादी साज़िश के खिलाफ फिलिस्तीनी मुसलमानों ने शुरू से ही विरोध किया और मज़लूमों की क़ुर्बानियों और उनके सब्र और प्रतिरोध के लिए पूरी दुनिया के आज़ाद इंसानों ने उनकी हिमायत की और उसी समय से फ़िलिस्तीन का मामला एक सियासी फौजी जद्दोजहद (संघर्ष) की शक्ल में इस्लामी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और तकदीरसाज़ मुद्दे की सूरत इख़्तियार किए हुए है।
    इस्लामी ईरान की पब्लिक और सरकार ने भी इस्लामी क्रांति की ज़बरदस्त कामयाबी के बाद से ग़ासिब सेहयूनियों के चंगुल से क़ुद्स की आज़ादी के मुद्दे को अपना पहला मक़सद बना रखा है और रमज़ान के मुबारक महीने के आख़री जुमे को क़ुद्स दिवस का नाम देते हुए उस दिन को जालिमों के खिलाफ हुर्रियत और आज़ादी के नारों में तब्दील कर दिया है। इस्लामी इंक़ेलाब के तुरंत बाद हज़रत इमाम खुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने सेहयूनियों के चंगुल से क़ुद्स की रिहाई के लिए इस दिन को क़ुद्स दिवस ऐलान करते हुए अपने तारीख़ी पैग़ाम में कहा था मैंने बहुत पहले से, लगातार ग़ासिब इसराइल के खतरों से मुसलमानों को ख़बरदार किया है और उनके खतरे से होशियार रहने की सलाह भी दी है और चूंकि फिलिस्तीनी भाइयों और बहनों के खिलाफ उनके वहशियाना हमलों में तीज़ी आ गई है खास तौर पर दक्षिण लेबनान में फिलिस्तीनी मुजाहिदीन को ख़त्म कर देने के लिए उनके घरों और काशानों पर बमबारी कर रहे हैं मैं पूरे इस्लामी मुल्कों और इस्लामी हुकूमतों से चाहता हूँ कि गासिबों और उनके सहयोगियों के हाथ काट देने के लिए आपस में एकजुट हो और रमज़ान के मुबारक महीने के आख़री जुमें को फिलिस्तीनियों के मुक़द्दर तय करने के लिए, क़ुद्स दिवस का नाम देता हूँ ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी मुसलमान फिलिस्तीनी मुसलमानों के कानूनी अधिकारों के समर्थन और हिमायत का एलान करें। में पूरी ज़ालिम हुकूमतों पर मुसलमानों की कामयाबी के लिए अल्लाह तआला की बारगाह में दुआ करता हूँ।