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    व्यक्ति, बकरी और बेटे

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    प्राचीन काल में एक आदमी के पास एक बकरी थी, उसने एक दिन अपने छोटे से पुत्र से कहाः इस बकरी को चराने ले जाओ । लड़का बकरी को लेकर गया और रात तक चराता रहा। रात को पिता ने बकरी से पूछाः आज पेट भर कर खाया बकरी ने झूठ बोल दिया, कहने लगी ऊसर में घास कहां होती है, तुम्हारे बेटे ने बीच मरूस्थल में मुझे बांध दिया और स्वयं खेलने निकल गया। उस व्यक्ति को बहुत ग़ुस्सा आया और उसने अपने बेटे की पिटाई की। बेटा बिल्कुल निर्दोष था उसे यह बात बहुत बुरी लगी और वह आधी रात को घर छोड़ कर भाग गया। दिन निकला तो पिता ने बीच वाले पुत्र को बकरी चराने भेजा । उस लड़के ने भी बकरी को ख़ूब चराया परन्तु रात हुई तो पिछली घटना ही दोहराई गई। दूसरा लड़का भी क्रोधित हो कर घर से चला गया। सब से बड़े लड़के के साथ भी ऐसा ही हुआ और वह भी चला गया। अगले दिन सवेरे वह आदमी स्वयं बकरी को चराने ले गया। रात को उसने जब बकरी से पूछा कि उसका पेट भरा या नहीं तो बकरी ने कहा ईश्वर तुम्हारा भला करे, तुम जहां मुझे ले गये थे वहां खाने को कुछ था ही नहीं। तब उस आदमी को पता चला कि बकरी झूठ बोल रही है और उसने अपने बेटों को अकारण ही मारा है,अतः उसने बकरी को एक दो लत्ती मारने वाले गधे की दुम में बांध कर जंगल की ओर हंका दिया।

     

    अब देखिये कि लड़कों का क्या बना? सब से छोटा लड़का एक गरेड़िये के पास काम करने लगा, बीच वाला एक धातु के बर्तन बनाने वाले के पास काम करने लगा और सबसे बड़ा पत्थर से विभन्न वस्तुएं बनाने के काम में लग गया। कुछ वर्षों के पश्चात बड़े बेटे को घर वालों की याद आई, उसने अपने मालिक से कहा मैं अपने नगर जाना चाहता हूं, मालिक ने उसे एक छोटी सी चक्की दी और कहा जो कुछ खाना चाहो उसकी नियत करके चक्की चलाना, खाना चक्की से निकल आयेगा। लड़के ने वह चक्की ली और यात्रा पर निकल पड़ा। मार्ग में उसे एक पनचक्की मिली तो वह खाना खाने बैठ गया। खाने की नियत की तो बहुत अच्छे-2 खाने और फल चक्की से निकल आए। पनचक्की का मालिक यह सब देख रहा था, उसने उस छोटी चक्की को चुराने का इरादा कर लिया। आधी रात को उसने असली चक्की चुरा कर एक दूसरी चक्की उसके स्थान पर रख दी। लड़का प्रातः उठ कर अपने नगर की ओर चल पड़ा। घर जाकर उसने पिता से कहा अमुक लड़की से मेरे विवाह की बात चलाओ, यह चक्की हमारे लिये सब कुछ उपलब्ध कराये गी। लड़की की सगाई के लिये गए, फिर विवाह की रात आई और लड़के ने चक्की चलाना आरम्भ किया परन्तु उसमें से कुछ भी बाहर नहीं आया। इस प्रकार शादी टूट गयी

     

    दूसरे पुत्र ने भी घर आने की ठानी, उसके गुरू ने उसे एक पतीली दी और कहाः जो मन चाहे इस चक्की में चम्मच चला कर मांग लेना, यह लड़का भी घर की ओर चल पड़ा और उसी पनचक्की पर पहुंचा जहां उसका भाई गया था। लड़का बहुत भूखा था अतः उसने पतीली में चम्मच चलाया और मन पसंद खाना निकल आया । पनचक्की वाले ने यह सब देखा तो उसकी पतीली भी चुरा ली और एक साधारण पतीली उसके स्थान पर रख दी। लड़का घर पहुंचा,और विवाह की बात की , फिर उसके साथ भी वही पहले वाली घटना घटी।

     

    छोटा लड़का जब घर जाने के लिये निकला तो उसके गुरू गरेड़िये ने उसे एक लाठी उपहार स्वरूप दी, और कहा की जब किसी से झगड़ा लड़ाई होने लगे तो इस लाठी से कहना “बाहर निकल आओ ” तो तुरन्त सौ आदमी लाठी लेकर इस लाठी के सिरे से निकल आएंगे,और जब कहोगे कि भीतर जाओ” तो अपनी जगह लौट जायेंगे। यह लड़का भी चलते-2 उसी पनचक्की पर पहुंचा। उसने देखा कि पनचक्की वाला एक पतीली और एक चक्की से खाने निकाल-2 कर बेच रहा है। लड़के ने पनचक्की वाले से पूछाः यह दोनो तुम कहां से लाये हो¿ उसने उत्तर दिया तुम को क्यों बताऊं लड़का समझ गया कि यह माल चोरी का है,अतः उसने छड़ी से कहा “बाहर निकलो” तुरन्त सौ लाठी बाज़ निकले और उन्होने पनचक्की वाले को पीटना आरम्भ कि दिया। अन्ततः पनचक्की वाले ने सब कुछ बता दिया और निशानियों से लड़का समझ गया कि सारी वस्तुएं उसके भाइयों की हैं। फिर सब कुछ लेकर  वह अपने घर पहुंचा। उसके घर पहुंचने से जीवन आनन्दमयी हो उठा, तीनों भाइयों का विवाह हुआ और वे प्रसन्नता पूर्वक रहने लगे।

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