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    शक्तिशाली राजा और हातिम ताई (1)

    शक्तिशाली राजा और हातिम ताई (1)
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    कहते हैं कि प्राचीनकाल में यमन में एक शक्तिशाली राजा रहता था जो बहुत ही धनवान और दानी था। यमन में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जिसकी आवश्यकता की पूर्ति उस सदगुणी और दानी राजा ने न की हो। यमन में हर ओर इस देश के दानी शासक के दान-दक्षिणा की बातें आम थीं और उसके दान की ख्याति दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी। यह भी एक संयोग था कि यमन का यह दानी राजा हातिम ताई के काल में था। उसे भलि-भांति यह ज्ञात था कि हातिम ताई कौन है और उसको हातिम ताई के दान-दक्षिणा की पूरी सूचना थी किंतु वह सदैव इस प्रयास में रहता था कि दान-दक्षिणा में वह हातिम ताई की दान-दक्षिणा से भी आगे बढ़ जाए और प्रसिद्धि तथा लोकप्रियता के द्वार केवल उसी के लिए रहें। उसको यह भी पता था कि हातिम ताई जनता में लोकप्रिय है और दान-दक्षिणा में वह उसका प्रतिस्पर्धी है। यमन का दानी और सदकर्मी शासक अपनी दान-दक्षिणा को दिन-प्रतिदिन बढ़ाता जा रहा था और अपने इस कार्य से वह प्रसन्न था। किंतु जब कभी भी कोई यमन के इस शासक के सामने हातिम ताई के दान की प्रशंसा करता तो वह बहुत क्रोधित व चिन्तित हो जाता और कहता कि क्यों तुम इस निर्धन व दरिय हातिम ताई के बहुत कम और तुच्छ दान की बातें करते हो? उसने क्या किया है जिसके कारण लोग उसकी इस प्रकार प्रशंसा करते हैं? उसने लोगों को क्या दिया है? क्या उसके पास धन-संपत्ति है जो वह दान कर सके? मैं शक्तिशाली और बहुत ही दानी शासक हूं किंतु यह हातिम ताई कौन है? उसका क्या महत्व है? क्या वह मुझसे तुलना योग्य है जो मेरे पास आकर उसके बारे में बातें करते हो? एक बार यमन के दानी शासक ने बहुत ही भव्य शाही समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया। इस समारोह के माध्यम से वह यमन के गणमान्य लोगों और वहां की जनता के सामने अपने दान का अधिक से अधिक प्रदर्शन करना चाहता था। वह चाहता था कि कवि, उसकी प्रशंसा में कविताएं लिखें और उनको पढें ताकि समस्त यमन वासियों को यह पता चले कि संसार में उससे अधिक दानी कोई नहीं है और हातिम ताई की उससे तुलना नहीं की जा सकती।भव्य शाही समारोह आयोजित हुआ और प्रशंसकों ने उसकी प्रशंसा की तथा कवियों ने राजा के दान की प्रशंसा में कविताएं पढ़ीं। इसी बीच अतिथियों में से किसी ने हातिम ताई का उल्लेख करते हुए उसकी विशेषताएं और उसके दान की बातें गिनवाईं। यमन के दानी एवं शक्तिशाली शासक ने लोगों के सामने हातिम ताई के मुक़ाबले में अपनी वरीयता दर्शाने के जितने भी प्रयास किये उनमें वह सफल नहीं हो सका और समारोह में उपस्थित लोगों में से कुछ ने हातिम ताई का उल्लेख सर्वाधिक दानी के रूप में करते हुए उसकी प्रशंसा की। यमन के शासक ने, जो यह समझ रहा था कि वह पराजित हो चुका है, मन ही मन यह सोचा कि यह कैसी बात है कि हातिम ताई का कम एवं तुच्छ दान लोगों को बड़ा दिखाई देता है और मेरी यह बड़ी-बड़ी दान-दक्षिणा उनके निकट हातिम ताई के दान जैसा महत्व नहीं रखती। उसने अपने आपसे कहा कि इस बड़ी समस्या के समाधान हेतु कोई मुझको कोई उपाय ढूंढना चाहिए। (मैं समझता हूं कि जब तक हातिम ताई जीवित है उस समय तक मेरी दान-दक्षिणा की कोई गिनती नहीं होगी यहां तक कि इस मार्ग में मैं उसकी धूल भी नहीं पा सकता। तो फिर उसकी बराबरी या उससे आगे बढ़ने की बात ही क्या? अगले दिन यमन के इस ईर्ष्यालू शासक ने एक बहुत ही शक्तिशाली युवा पहलवान को बुलाकर उसके आदेश दिया कि जितनी जल्दी हो सके वह “बनीतै” क़बीले की ओर जाए जिसमें हातिम ताई रहता है। वह हातिम ताई को पकड़कर उसका गला काट दे और उसके कटे हुए सिर को मेरे पास लाए। शक्तिशाली पहलवान एक तेज़ गति से चलने वाले घोड़े पर सवार होकर “बनीतै” क़बीले की ओर बढ़ा। वह चलते-चलते थका-मांदा, भूखा-प्यासा शाम के समय “बनीतै” क़बीले पहुंचा। बनीतै क़बीले का एक सुन्दर युवा उसके स्वागत के लिए आगे बढ़ा और उसने उसका अभिनंदन किया। उस युवा ने पहलवान से अनुरोध किया कि वह आज की रात उसके घर में ठहरे। वह सुन्दर और अति बुद्धिमान युवा कृपालु और मृदभाषी था। पहलवान युवा से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि वह उसके निमंत्रण को अस्वीकार नहीं कर सका और वह उसके घर चला गया। युवा ने पहलवान की बहुत आवभगत की। पहलवान ने रात बुद्धिमान व कृपालु युवा के घर बिताई और सुबह सवेरे उसने निर्णय किया कि युवा के घर से जाकर उस काम को पूरा करे जो उसके हवाले किया गया है।