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    शक्तिशाली राजा और हातिम ताई- (2)

    शक्तिशाली राजा और हातिम ताई- (2)
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    पिछले अनुभाग में हमने बताया था कि प्राचीनकाल में एक शक्तिशाली राजा था जो बहुत ही धनवान और दानी था। इस राजा के नगर में, जिसे भी कोई आवश्यकता होती, वह उसके पास जाता और राजा अपनी कृपा तथा दया से आने वाले की समस्या का समाधान कर दिया करता था। यह राजा हातिम ताई के काल में जीवन व्यतीत करता था जो दानियों में सबसे अधिक विख्यात था। इस राजा को हातिम ताई के दान की बात पता थी इसीलिए वह उसे अपना प्रतिस्पर्धी समझता और उससे द्वेष रखता था। इसी द्वेष के कारण उसने हातिम ताई की हत्या के लिए अपने एक शक्तिशाली युवा पहलवान को भेजा।

    यह शक्तिशाली पहलवान हातिम ताई की हत्या के उद्देश्य से बनी तै क़बीले पहुंचा जिसमें हातिम ताई रहता था। जब यह पहलवान थकाहारा बनीतै क़बीले पहुंचा तो एक सुन्दर युवा उसके स्वागत को आगे आया। इस युवा ने पहलवान से अपने घर रात बिताने का अनुरोध किया। वह सुन्दर, बुद्धिमान, कपालु तथा मृदुभाषी युवा था। पहलवान उस युवा से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि वह उसके निमंत्रण को अस्वीकार नहीं कर सका और उस युवा के घर चला गया। युवा ने बहुत ही निष्ठा के साथ उस पहलवान का आदर सत्कार किया। पहलवान ने रात युवा के घर पर व्यतीत की। भोर समय उसने निर्णय किया कि अपने उस कार्य के लिए वह युवा के घर से बाहर जाए जिसके लिए यमन के राजा ने उसे भेजा है। युवा ने अपने अतिथि से अनुरोध किया कि वह कुछ दिन उसके पास उसका मेहमान रहे। पहलवान ने युवा के अतिथि सत्कार के कारण उसका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हे कृपालु युवा मैं तुम्हारे अतिथि स्तकार को कभी भूल नहीं सकता मेरा मन चाहता है कि मैं तुम्हारे पास अधिक समय तक रुकूं किंतु मुझको बहुत आवश्यक काम है इसलिए मैं तुम्हारे पास अधिक समय तक नहीं रूक सकता। मुझको अब जाना चाहिए। सुन्दर युवा ने पहलवान से कहा कि मुझे बताइये कि क्या काम है यदि संभव हो तो मैं इस कार्य में आपकी सहायता कर सकूं। पहलवान ने एक क्षण के लिए सोचा और स्वयं से कहा, जैसा प्रतीत होता है उससे तो यही लगता है कि यह युवा बहुत ही बुद्धिमान, चालाक और कृपालु है अतः निश्चित रूप से यह राज़दार रह सकता है। वास्तव में वह मानवीय विशेषताओं का उदाहरण है। यह उन लोगों में से है जो अपने महेमानों के लिए सबकुछ कर सकते हैं। उचित यह होगा कि मैं अपनी बात इस युवा को बताऊं। शायद वह मेरी सहायता करे और मैं अपनी ज़िम्मेदारी को जल्दी से निबटा सकूं। उसने अपने मेज़बान से कहा कि क्या तुम हातिम ताई को जानते हो? कहते हैं कि वह कृपालु और दानी व्यक्ति है। यमन के राजा ने मुझे आदेश दिया है कि उसकी हत्या करके उसका सिर राजा के पास ले जाऊं। हे उदार व्यक्ति आपने मेरा बहुत अधिक आदर सत्कार किया है अब यदि आप हातिम ताई का पता भी मुझको बता दें तो आपने मानों मुझपर बहुत बड़ा उपकार किया और आप की सारी अच्छाइयां तथा उपकार सदा मेरे मन में रहेंगे

    युवा व्यक्ति ने हंसते हुए कहा, मैं ही हातिम ताई हूं। तुमको जो कार्य सौंपा गया है उसे अंजाम दो और मेरे धड़ से मेरे सिर को अलग कर दो। पहलवान ने बहुत ही आश्चर्यचकित होकर उस युवा को देखा। वह उसकी बात को स्वीकार नहीं कर पा रहा था। ऐसा कैसे संभव है कि वह हातिम ताई हो और स्वयं उससे कहे कि मेरे सिर को धड़ से अलग कर दो। युवा ने जब पहलवान को अचंभित देखा तो कहा, हे पहलवान जल्दी करें और अवसर को हाथ से न जाने दे। अपनी तलवार निकालो और मेरा सिर काट दो। यदि सूर्य निकल आए और मेरे क़बीले के लोग तुम्हारे उद्देश्य से अवगत हो जाएं तो हो सकता है कि वे तुम्हें नुक़सान पहुंचाएं और फिर तुम अपने कर्तव्य का पालन न कर सको। अतः अवसर को हाथ से न जाने दे और जल्दी करो।पहलवान ने सोचा कि यह किस प्रकार का मनुष्य है। क्या यह संभव है कि कोई व्यक्ति इस सीमा तक कृपालु हो जो अपने मेहमान के लिए अपनी जान तक देने को तैयार हो जाये?हातिम ताई ज़मीन पर बैठ गया और उसने अपना सिर धरती पर रख दिया। यह देखकर पहलवान ज़मीन पर गिर पड़ा और वह हातिम ताई के हाथ-पैर चूमने लगा और अपनी तलवार ज़मीन पर फेंक दी। हातिम ताई ने उससे कहा कि हे पहलवान तुम ऐसा क्यों कर रहे हो? तुम क्यों इस तरह से ज़मीन पर पड़े हो? उठो और जल्दी करो। अवसर को हाथ से न जाने दो। क्या तुम उस कार्य को भूल गए जिसे करने के लिए यहां आए हो? वीर पहलवान हातिम ताई की महानता के कारण रो पड़ा उसने कहा कि मैं कैसे तुमको क्षति पहुंचा सकता हूं। यह शिष्टाचार उदारता, तथा मानवता के विरुद्ध है। यह कहकर पहलवान उठा। कुछ देर तक वह स्नेह पूर्ण दृष्टि से उसे देखता रहा फिर वह हातिम ताई के उपकार के कारण पुनः रोने लगा। उसके पश्चात उसने हातिम ताई को गले लगाया और उसकी आंखों को चूमा फिर उससे विदा ली और यमन की ओर चल पड़ा।यमन का ईर्ष्यालु राजा पहलवान की वापसी की बड़ी ही उत्सुकता के साथ प्रतीक्षा कर रहा था। युवा पहलवान जब यमन पहुंचा तो बहुत ही अप्रसन्नता किंतु गर्व से राजा के पास गया। राजा पहलवान को देखते ही समझ गया कि उसे जो कार्य सौंपा गया था वह पूरा नही हुआ है। इसलिए उसने पहलवान से कहा कि वह पूरी घटना के बारे में उसे विस्तार से बताए। शक्तिशाली पहलवान ने व्यंगात्मक मुस्कुराहट के साथ ईर्ष्यालू राजा से कहा, हे महान एवं दानी राजा, न तो किसी योद्वा ने मुझपर आक्रमण किया और न ही कोई युद्ध हुआ। मैं बड़ी सरलता और सुरक्षित ढंग से बनी तै क़बीले पहुंच गया। मैंने हातिम ताई को भी बहुत ही जल्दी ढूंढ लिया किंतु मैं उसकी हत्या नहीं कर सका। वह बुद्धिमान और भंला मनुष्य है। वह उदारता एवं मानवीय विशेषताओं में सर्वश्रेष्ठ है। मैं उसकी हत्या करना चाहता था किंतु उसने ही मानवीय विशेषताओं की तलवार से मुझको मार डाला। इसके पश्चात उसने पूरी घटना राजा को सुनाई और हातिम ताई के अतिथि सत्कार और उसकी अन्य मानवीय विशेषताओं के बारे में जो कुछ जानता था उसको बताया। राजा ने अपना सिर नीचे झुकाकर कुछ सोचा और इस बात का आभास किया कि उसके मन में हातिम ताई के प्रति अब किसी प्रकार की ईर्ष्या नहीं रही है। हातिम ताई की कृपा उसके मन में बैठ चुकी थी। कुछ समय तक वह चुप रहा और सोचता रहा। फिर उसने कहा वास्तव में कृपा और उदारता हातिम ताई से ही विशेष है।