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    शैतान को पैदा ही क्यों किया है

    शैतान को पैदा ही क्यों किया है
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    सवालः अगर ख़ुदा ने इंसना को इबादत के ज़रिए कमाल तक पहुंचने के लिए पैदा किया है तो फिर शैतान को क्यों पैदा किया है?

    जवाबः अगर हम ग़ौर करें तो हमारा यह दुश्मन ही हमारी कामयाबी में हमारा मददगार है। कहीं दूर जाने की ज़रूरत नहीं है। हमारे मुल्क का डिफ़ेंस करने वाली हमारी फ़ौज दुश्मन से मुक़ाबला करते वक़्त बहुत बहादुर और दिलेर बन जाती है और कामयाबी की मंज़िलों तक पहुंच जाती है।

    ताक़तवर और तजुर्बे कार वही सिपाही होते हैं जो बड़ी-बड़ी जंगों में दुश्मन के सामने डट जाते हैं और घमसान की जंग लड़ते हैं। वही नेता ताक़तवर और तजुर्बे कार होते हैं जो बड़ी से बड़ी सियासी मुश्किलों में सख़्ती के साथ दुश्मन से मुक़ाबला करते हैं। नामी-गिरामी पहलवान वही होते हैं जो अपने सामने वाले पहलवान से जम के मुक़ाबला करते हैं।

    इसी तरह ख़ुदा के नेक बन्दे शैतान से हर रोज़ मुक़ाबला करत-करते दिन बदिन ताक़तवर और बज़बूत बनते चले जाते हैं।

    आज के साइंटिस्ट इंसान के बदन में पाए जाने वाले कुछ बहुत ख़तरनाक बैक्टीरियाज़ के बारे में कहते हैं, अगर ये न होते तो इंसान के सेल्स सुस्त और बेकार हो जाते और एक अंदाज़े के मुताबिक़ इंसान 80cm से ज़्यादा न बढ़ पाता और हम सब बोने ही रह जाते।

    लेकिन इसका यब मतलब नहीं है कि शैतान की ज़िम्मेदारी है कि वह ख़ुदा के बन्दों को बहकाए। हक़ीक़त यही है कि इंसान और दूसरी हर चीज़ की तरह शैतान को भी ख़ुदा ने पाको-पाकीज़ा ही पैदा किया था, वह ख़ुद शैतान ही था जिसने अपने आप को शैतान बनाया था। इंसान के अन्दर गुमराही, और बुराईयां ख़ुद उसके अपने चाहने से पैदा होती हैं। लेकिन ग़ौर करने वाली बात यह है कि अपने शैतान होने के बावजूद शैतान ख़ुदा के नेक बन्दों को न सिर्फ़ ये कि नुक़्सान पहुंचाता बल्कि यह तो उन की तरक़्क़ी और कामयाबी का ज़ीना है।

    हम यहाँ एक और बात कहेंगे कि दुनिया इम्तेहान की जगह है और हम यह भी जानते हैं कि इंसान की कामयाबी और तरक़्क़ी का एक फ़ैक्टर इम्तिहान भी होता है। साथ ही यह भी सच है कि इम्तिहान, बड़े दुश्मन और तूफ़ान से मुक़ाबला किए बग़ैर मुमकिन ही नहीं है।

    वैसे अगर शैतान नहीं होता तब भी इंसान के अपने नफ़्स के ज़रिए इंसान का इम्तिहान हो सकता था लेकिन शैतान के होने से इस तंदूर की आग और ज़्यादा भड़क गई है क्योंकि शैतान बाहर से बहकाने वाला है और इंसान का नफ़्स उसको अन्दर से बहकाता है।

    यहाँ एक सवाल यह पैदा होता है कि ये कैसे हो सकता है कि ख़ुदा वन्दे आलम ऐसे बेरहम और ताक़तवर दुश्मन के मुक़ाबले में हमें बिल्कुल अकेला छोड़ दे?

    इस सवाल का जवाब हमें इस बात से मिल जाएगा जिसे क़ुरआन मजीद ने भी बयान किया है कि ख़ुदा वन्दे आलम मोमिनों के साथ फ़रिश्तों का एक लशकर भेजता है और उन्हें ग़ैबी ताक़त अता करता है। इस लश्कर से मोमिनों को अपने सरकश नफ़्स से जंग करने और इस दुश्मन का मुक़ाबला करने में मदद मिलती है। इर्शाद होता हैः- बेशक जिन लोगों ने यह कहा कि अल्लाह हमारा रब है और इसी पर जमे रहे, उन पर फ़रिश्ते यह पैग़ाम लेकर आते हैं कि डरो नहीं और परेशान न हो……हम दुनिया की ज़िन्दगी में भी तुम्हारे साथी थे और आख़िरत में भी तुम्हारे साथी हैं। (सूरए मुफ़स्सेलत, आयत, 30-31)

    एक दूसरी ख़ास बात यह है कि शैतान कभी भी हमारे ऊपर अचानक हमला नहीं करता बल्कि वह जब भी हम पर हमला करता है उसी वक़्त करता है जब हम उसे छूट देते हैं। जी हाँ!जैसा कि क़ुरआन फ़रमाता है, शैतान हर गिज़ उन लोगों पर क़ाबू नहीं पा सकता जो ईमान वाले हैं। (सूरए-नहल, आयत, 99)

    हक़ीक़त यह है कि ये इंसान के आमाल ही होते हैं जो शैतान को उसके ऊपर कंट्रोल करने में मदद करते हैं। बहरहाल शैतान और उसके सिपाहियों के रंगा-रंग जाल और हथकंडों से बचने का सिर्फ़ एक ही रास्ता है और वह है ईमान, परहेज़गारी और ख़ुदा पर भरोसा। जैसा कि क़ुरआने करीम फ़रमाता है,

    अगर तुम लोगों पर ख़ुदा का फ़ज़्ल और उसकी रहमत न होती तो कुछ लोगों के अलावा सब शैतान की पैरवी कर लेते। (सूरए-निसा, आयत, 83)