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    सच्ची पश्चाताप करने वालो के लिए दिव्य उपहार 2

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    पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलिंग्न

     

    लेखकः आयतुल्ला अनसारियान

     

     

     

    इसके पूर्व लेख मे हमने क़ुरआन के छंद बयान किये थे तथा इस लेख मे दूसरे छंद का अनुवाद के अतिरिक्त एक छंद और एक हदीस का अध्ययन करेगे।

     

    जो स्वर्गीदूतो ने अर्शे इलाही को उठाए हुए है और जो इसके चारो ओर नियुक्त है सभी ईश्वर की प्रशंसा कर रहे है तथा उसी के प्रति आस्था रखते है तथा आस्थीयो के प्रति पश्चाताप कर रहे है कि हे ईश्वर! तेरी कृपा और तेरा ज्ञान सब को घेरे हुए है इसलिए उन व्यक्तियो को क्षमा कर दे जिन्होने पश्चाताप किया है तथा तेरे मार्ग का चयन किया है और उन्हे नरक की यातना से बचा ले। हे पालनहार उन्हे और उनके पूर्वजो, पत्नियो और संतान मे से जो सज्जन और धर्मी है उनको सदैव रहने वाले बाग़ो मे स्थान प्रदान कर, जिनका तुने उन्हे वचन दिया है निसंदेह तू सब पर प्रबल तथा ज्ञान वाला है। और उन्हे बुराईयो से सुरक्षित रख जिनको आज तूने बुराईयो से बचा लिया मानो उन पर दया की है तथा यह बहुत बड़ी सफलता है।

     

     

     

    وَالَّذِينَ لاَ يَدْعُونَ مَعَ اللَّهِ إِلهاً آخَرَ وَلاَ يَقْتُلُونَ النَّفْسَ الَّتِي حَرَّمَ اللَّهُ إِلاَّ بِالْحَقِّ وَلاَ يَزْنُونَ وَمَن يَفْعَلْ ذلِكَ يَلْقَ أَثَاماً * يُضَاعَفْ لَهُ الْعَذَابُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَيَخْلُدْ فِيهِ مُهَاناً * إِلاَّ مَن تَابَ وَآمَنَ وَعَمِلَ عَمَلاً صَالِحاً فَأُولئِكَ يُبَدِّلُ اللَّهُ سَيِّئَاتِهِمْ حَسَنَات وَكَانَ اللَّهُ غَفُوراً رَحِيماً 

     

     

     

    3- वल्लज़ीना लायदउना माअल्लाहे इलाहन आख़रा वला यक़तोलूनन्नसल्लति हर्रमल्लाहो इल्ला बिल्हक़के वला यज़नूना वमन यफ़अल ज़ालेका यलक़ा असामा*योज़ाअफ़ लहूलअज़ाबो योमल क़ियामते वयख़लुद फ़ीहे मुहाना*इल्ला मन ताबा वा आमना वा अमेला अमालन सालेहन फ़उलाएका योबद्देलुल्लाहो सय्येआतेहिम हसानातिन वा कानल्लाहो ग़फ़ूरन रहीमा[1]

     

    और वो व्यक्ति जो ईश्वर के साथ किसी और परमात्मा को नही बुलाते है तथा यदि ईश्वर ने किसी को भी आदरणीय घोषित किया है तो उसकी ना हक़ हत्या (क़त्ल) नही करते है तथा बलात्कार भी नही करते, जो व्यक्ति इस प्रकार का काम करेगा तो वह अपने किया की सज़ा के कष्ट को सहन करेगा। जिसे प्रलय के दिन दुगना कर दिया जाएगा तथा वह अपमान के साथ सदैव उसी मे पड़ा रहेगा। उस व्यक्ति को छोड़कर जो पश्चाताप कर ले और इमान ले आए तथा अच्छे काम भी करे ईश्वर उसकी बुराईयो को अच्छाईयो मे परिवर्तित कर देगा और ईश्वर अत्यधिक दयालु है।[2]  

     


    [1] सुरए फ़ुरक़ान 25, छंद 68-70

    [2] काफ़ी, भाग 2, पेज 432, हदीस 5; बिहारुल अनवार, भाग 6, पेज 39, अध्याय 20, हदीस 70 (http://www.erfan.ir)