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    सपनों का देश ईरान

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    ईरान के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने और यहां के एतिहासिक सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक आकर्षणों से अधिक से अधिक परिचित होने के लिए आपकी निरंतर मांग पर प्रिय पाठकों हमने एक नई चर्चा आरंभ की है जिसका शीर्षक है, “सपनों का देश ईरान”। इस चर्चा की पहली कड़ी में हम ईरान के संबन्ध में मुख्य बातों, एशिया महाद्वीप में उसकी स्थिति और यहां की विभिन्न प्रकार की जलावयु का उल्लेख करेंगे। बाद की कड़ियों में ईरान के विभिन्न प्रांतों, इन प्रांतों के प्रसिद्ध स्थानों और यहां के नगरों का भी उल्लेख करेंगे। स्वाभाविक सी बात है कि ईरान के विभिन्न नगरों के परिचय में प्रत्येक नगर के इतिहास तथा उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक आकर्षणों पर इस ढंग से चर्चा करेंगे जिससे पाठक, ईरान की संस्कृति और यहां के कलात्मक विषयों से अधिक से अधिक परिचित हो सकेंगे। ईरान की विस्तृत एवं व्यापक संस्कृति के अन्तर्गत फ़ार्स, कुर्द, तुर्क, लुर, तुर्कमन और बलोच आदि जातियों की संस्कृतियों ने विविधता की दृष्टि से इस विस्तृत भूभाग वाले देश को विशेष प्रकार का आकर्षण प्रदान किया है। इस विषय के दृष्टिगत कि ईरानियों और यहां की परंपराओं को समझने के लिए ईरान की विभिन्न जातियों का परिचय नितांत आवश्यक है, इस चर्चा के एक भाग को हमने ईरानी जातियों और उनकी परंपराओं से विशेष किया है।

    अपने गौरवपूर्ण इतिहास और सभ्यता साथ ही विभिन्न प्रकार की जलवायु के कारण ईरान ने सदैव ही संसार के जिज्ञासु लोगों को अपने दर्शन के लिए प्रेरित किया है। शताब्दियों से भारी संख्या में पर्यटक, ईरान की यात्रा पर आते रहे हैं जिनमें से कुछ ने ईरान की यात्रा के संबन्ध में अपने यात्रावृतांत भी लिखे हैं। अपने कुछ चर्चाओं को हमने ईरान के संबन्ध में विदेशी शोधकर्ताओं और विदेशी पर्यटकों के विचारों से विशेष किया है।इस्लामी गणतंत्र ईरान अपनी प्राचीन सभ्यता के साथ मेसोपोटामिया और बेबिलोनिया जैसी सभ्यताओं वाले क्षेत्र में ईरान नामक प्रसिद्ध पठारी क्षेत्र में स्थित है। इस देश का क्षेत्रफल १६४८१९५ वर्ग किलोमीटर है। यह विस्तृत महाद्वीप एशिया के पश्चिमी भाग में और मध्यपूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। क्षेत्रफल की दृष्टि से ईरान संसार में १६वें स्थान पर है। इस देश ने एशिया के दक्षिण पश्चिमी भाग के एक बड़े क्षेत्र को स्वयं से विशेष किया है। यह विस्तृत देश अरब जगत, केन्द्रीय एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप को एक दूसरे से जोड़ता है। ईरान के उत्तर में तुर्कमनिस्तान, आज़रबाइजान गणराज्य, आर्मीनिया तथा माज़ंदरान सागर तथा इसके दक्षिण में फ़ार्स की खाड़ी और ओमान सागर स्थित हैं। ईरान के पश्चिम में इराक़ और तुर्की जैसे देश हैं और पूर्व में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान इसके पड़ोसी देश हैं।

    वर्ष २००६ की जनगणना के अनुसार ईरान की जनसंख्या ७ करोड़ से कुछ अधिक है। यहां पर विभिन्न जातियां रहती हैं। ईरान की जनसंख्या में फ़ार्स जाति का अनुपात लगभग ६५ प्रतिशत है जो आर्य जाति से संबन्धित हैं। ईरान की जनसंख्या में शीया मुसलमान बहुसंख्यक हैं। इसके अतिरिक्त ईरान में अर्मनी, ज़रतुश्ती, और यहूदी जातियों जैसे अल्पसंख्यक समुदाय भी शांतिपूर्ण ढंग से अपने मुसलमान भाइयों के साथ रहते हैं।

    ईरान में ३१ प्रांत या राज्य हैं। यूनेस्को द्वारा की गई घोषणा के अनुसार प्राचीनकाल के बचे हुए विभिन्न एतिहासिक अवशेषों और दर्शन योग्य अन्य सैकडों सुन्दर स्थलों के कारण ईरान, विश्व में एतिहासिक अवशेषों की संपन्नता की दृष्टि से संसार के दस प्रमुख देशों की श्रेणी में आता है। ईरान में पाए जाने वाले कुछ एतिहासिक अवशेष अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन आकर्षणों की श्रेणी में आते हैं क्योंकि यह मानव सभ्यता को दर्शाते हैं अतः इन्हे यूनेस्कों ने पंजीकृत किया है। इन एतिहासिक अवशेषों में से कुछ का उल्लेख हम यहां पर कर रहे हैं। फ़ार्स प्रांत में तख़्ते जमशीद, इस्फ़हान प्रांत में मैदाने इमाम ख़ुमैनी या मैदान नक़्शे जहान, आज़रबाइजान प्रांत में तख़्ते सुलैमान, ख़ुज़िस्तान प्रांत में ज़ीगोराते चोग़ाज़ंबील, ज़ंजान प्रांत में गुंबदे सुल्तानिये तथा किरमान प्रांत में अरगे बम आदि युनेस्को द्वारा पंजीकृत किए गए हैं।

    भौगोलिक स्थिति तथा जलवायु एवं वातावरण की दृष्टि से विस्तृत भूभाग का स्वामी देश ईरान/विश्व के अन्य देशों से पूर्णरूप से भिन्न है। ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाने वाली बहुत अधिक ऊंची-नीची पहाड़ियां और इसकी विस्तृत भूमि इस देश की जलवायु में बहुत अधिक विविधता का कारण बना है। इस भौगोलिक विविधता को इस बात से समझा जा सकता है कि शीतकाल में देश के गर्म और ठंडे क्षेत्रों के बीच तापतान का अंतर कभी-कभी ५० डिग्री से भी अधिक होता है। ईरान की विविध जलवायु के कारण इस देश में एक समय में चार फ़सलों को देखा जा सकता है। एसी स्थिति में कि जब ईरान के पश्चमोत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में स्की जैसे शीतकालीन खेलों के लिए भूमिका प्रशस्त होती है ठीक उसी समय ईरान के दक्षिण में पैराकी और नौकाविहार जैसे ग्रीष्म कालीन खेलों के लिए वातावरण उपलब्ध रहता है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि वर्षा की दृष्टि से ईरान एसे भूभाग में स्थित है जो कम वर्षा वाला शुष्क क्षेत्र माना जाता है। इसके बावजूद यहां पर प्राकृतिक दृष्यों में बहुत अधिक विविधता पाई जाती है। यह विविधता इस प्रकार है कि बहुत ही कम दूरी पर हमे यहां पर बड़े-बड़े शुष्क मरूस्थल और घने जंगल एक साथ देखने को मिलते हैं। इन्ही विशेषताओं ने ईरान को प्राकृतिक विविधता की दृष्टि से संसार के प्रथम पांच देशों की सूचि में ला खड़ा किया है।

    ईरान का सबसे शुष्क क्षेत्र “बियाबाने लूत” या लूत मरूस्थल है जिसका क्षेत्रफल १७५ हज़ार वर्गकिलोमीटर है। इस मरूस्थल का शहरदाद नामक क्षेत्र संसार का सबसे गर्म स्थान है। लूत मरूस्थल, संसार में मरूस्थलीय क्षेत्रों में प्रकृति के आश्चर्यजनक उदाहरणों में है। आश्चर्यचिक करने वाले Kaloots अर्थात तेज़ वायु और धरती के भीतर से निकले हुये पानी के तेज़ी से भाप बन कर उड़ने से अस्तित्व में आने वाली खाइयों के साथ इस मरूस्थल में पाए जाने वाले संसार के सबसे ऊंचे रेत के टीले और Nebka नामक गज़ के पेड़, जो यहां पर मौजूद हैं, इनसब के मिश्रण ने इस मरूस्थल को प्रकृति प्रेमियों के लिए एक रोचक एवं आकर्षक स्थल में परिवर्तित कर दिया है। ईरान के मरूस्थल के मुक़ाबले में उत्तरी ईरान के तटवर्ती ठडे क्षेत्र और चौड़ी पत्तियों वाले हीरकानी नामक वृक्षों के वन जो प्राचीन वनों के बचे हुए भाग हैं, और साथ ही दक्षिणी ईरान में स्थित फ़ार्स की खाड़ी के नीले जल में हरा नामक घने वनों का असितत्व प्रत्येक देखने वाले की दृष्टि को बरबस अपनी ओर आकृष्ट करता है। यह जानना उचित होगा कि ईरान के मरूस्थलों, पर्वतों, जंगलों और जलाषयों आदि जैसे क्षेत्रों में आठ हज़ार प्रकार की वनस्पतियां पाई जाती हैं। वनिस्पतियों में पाई जाने वाली यह विविधता, योरोप जैसे हरेभरे महाद्वीप से दो या तीन गुना है। ईरान में वनस्पतियों में पाई जाने वाली विविधताओं के साथ ही पशुओं में भी विविधता पाई जाती है। यहां पर १६८ प्रकार के स्तनधारी पशु पाए जाते हैं। ईरान से विशेष पशुओं में पीले बारासिंगे, एशियन चीते और ईरानी ज़ेब्रे के अतिरिक्त योरोपीय जाति की जंगली बिल्ली और इसी प्रकार अफ़्रीकी जाति की फल खाले वाले चमगादड़ का उल्लेख किया जा सकता है।

    कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि ईरान/अति प्राचीन इतिहास का स्वामी है जिसके भीतर बहुत सी संस्कृतियों ने असितत्व पाया और आज भी इन रंगारंग संस्कृतियों को बहुत निकट से ईरान में देखा जा सकता है।

    ईरान में प्राचीनकाल से पाई जाने वाली मस्जिदें, गिरजाघर, अग्निकुंड और यहूदियों के उपासनास्थल आदि मौजूद हैं। इन सभी तत्वों ने दर्शनयोग्य एवं आकर्षक भूमि एवं समरस्ता और प्रफुल्लता से ओतप्रोत लोगों को असितत्व प्रदान किया है। वे पर्यटक जो ईरान की यात्रा पर आते हैं वे संसार के अन्य देशों में जो आकर्षण अलग-अलग स्थानों पर देखते हैं उन सबकों वे एक ही स्थान पर ईरान में देखकर प्रसन्न होते हैं।