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    सवेरे-सवेरेः७

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    अगर पूरे दिन कठिन परिश्रम और तनाव के पश्चात आप बहुत थके हुए हों और यह आभास आपको कई दिन से हो रहा हो तो आप एसा करें कि प्रतिदिन सवेरे-सवेरे अपनी दिनचर्या आरंभ करने से पूर्व एक गिलास अंगूर का रस पी लिया करें। यह रस, हल्के हरे रंग वाले अंगूर का होना चाहिए। यह रस आपकी सारी थकान दूर करके आपके शरीर को बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि काले रंग के अंगूर का रस पीने से अनीमिया या ख़ून की कमी के रोगियों को नुक़सान हो जाता है। इसका कारण यह है कि इससे शरीर मे लोहे का स्तर नीचे आ जाता है। यही कारण है कि वे लोग जो अनीमिया से पीड़ित नहीं हैं वे किसी भी प्रकार के अंगूर का प्रयोग कर सकते हैं किंतु अनीमिया के रोगियों को हल्के हरे रंग वाले अंगूर के रस का सेवन करना चाहिए इससे वे पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।

    क्या आपने आजतक कभी यह सोचा है कि अधिक्तर समय हम अपने जीवन के क्षणों से क्यों आनंद नहीं उठा पाते हैं? हममे से अधिक्तर लोगों के साथ यह समस्या रहती है कि हम अपना ध्यान किसी विषय विशेष या कार्य विशेष पर केन्द्रित नहीं कर पाते और इस प्रकार अपने समय एवं स्थिति पर ध्यान नहीं दे पाते इस प्रकार अपने समय एवं स्थिति पर ध्यान नहीं देते और उनका आभास नहीं करते।

    वास्तविकता यह है कि यदि हम छोटी-छोटी बातों जैसे टहलने या अपने बच्चों के साथ खेलने या घरवालों और मित्रों के साथ बातचीत करते समय इस बात पर ध्यान को केन्द्रित करें कि यह समय कितना सुन्दर है और इसने हमारे जीवन को कितनी मिठास से भर दिया है तो हम देखेंगे इन्हीं साधारण बातों ने हमारे समय को कितना महत्वपूर्ण बना दिया है।

    हम जो काम करते हैं उसपर और वर्तमान समय पर ध्यान केन्द्रित न करने से हम अपनी ग़लतियों को बार-बार दोहराते हैं। जब अपनी स्थिति पर ध्यान नहीं देते और उसके संबन्ध में ज्ञान प्राप्त नहीं करते तो यह भी समझ नहीं पाते कि हमारी समस्या क्या है? अब जो बातें हम आपसे करने जा रहे हैं उनसे यह सीखा जा सकता है कि हम अपने जीवन से कैसे अधिक आनंद उठा सकते हैं?

    देखिये लापरवाही और ध्यान न देने की आदत के कारण हम अपने शरीर द्वरा भेजे जा रहे संदेशों पर भी ध्यान नहीं देते। उदाहरण स्वरूप पाचनतंत्र मे गड़बड़ हो जाए या सिर में दर्द रहने लगे तो हम उस समय तक उसकी अनदेखी करते हैं जब तक वह ख़तरनाक स्थिति तक नहीं पहुंच जाती। वास्तव में लापरवाही एक अस्वस्थ्य मानसिक स्थिति है जिसमें हममें से अधिकतर लोग ग्रस्त हैं। जब हम ध्यान नहीं देते तो समय और स्थिति की ओर से निश्चेत रहते हैं। यह निश्चेतता हमें उस आनंद से दूर कर देती है जो वह समय और वातावरण हमें प्रदान कर रहा होता है। बिना इस बात पर ध्यान दिये हुए कि हम कहां हैं, दिन, हफ़्ते, महीने और वर्ष बीतते रहते हैं। हम केवल यह जानना चाहते हैं कि अंत में हम कहां पहुंचेंगे और सदैव इस बात पर आश्चर्यचकित रहते हैं कि हम क्यों कभी वहां नहीं पहुंचते जहां हमें आनंद का आभास हो।

    प्यास मिटाने और गर्मी का प्रभाव कम करने के लिए तरबूज़, गाजर यहां तक कि टमाटर का रस भी शर्करा की मात्रा कम होने के कारण बहुत उचित होते हैं। जल और मठ्ठा भी ग्रीष्म ऋतु के लिए अच्छे पेय पदार्श माने जाते हैं। इसी प्रकार हल्के रंग की बिना दूध वाली चाय और दूसरे फलों के रस भी काफ़ी प्रभावी होते हैं। बच्चों और किशोरों को चाहिए कि वे हर समय अपने निकट पानी की एक बोतल रखें ताकि शरीर में जल की मात्रा कम न होने पाए और प्यास का आभास होते ही पानी पिया जा सके। शरीर में पानी की कमी के कारण ही लोग गर्मी से अधिक प्रभावित होते हैं और लू लगने का कारण भी पानी की कमी होता है।

    पचपन वर्षों से अधिक की आयु के लोगों में देखा जाता है कि उन्हें प्यास का आभास देर में होता है जबकि शरीर को पानी की आवश्यकता हो जाती है। इसलिए एसे लोगों को बताए गए पेय पदार्थों का प्रयोग प्रतिदिन आठ से दस गिलास तक करते रहना चाहिए।

    बहुत अधिक भूख न केवल यह कि दुबले होने और शरीर का भार कम करने में हमारी सहायता नहीं करती बल्कि हमें मोटा भी कर देती है। इसका कारण यह है कि शरीर अपनी सुरक्षा के लिए चर्बी बनाता है और उसके एकत्रित कर लेता हैं जिससे मोटापा बढ़ता है। इसी प्रका से भूख के कारण स्मरण शक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। भूख की स्थिति में कोई विषय या पाठ याद रखना कठिन हो जाता है। साधारणतयः जन्म से लेकर १८ वर्ष की आयु तक, चूंकि यह शारीरिक विकास का समय होता है अतः शरीर को निरंतर पौष्टिक पदार्थों की आवश्यकता रहती है और इस काल में यदि मोटापा कम करने के लिए खाद्य पदार्थों से दूरी की जाए तो यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होती है। इस आयु में शारीरिक गतिविधियां बढ़ाकर और खाने में अधिक तैलीय एवं मीठी चीज़ों तथा गैस वाले पदार्थों से दूर रहकर मोटापे को कम किया जा सकता है।