islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. सवेरे-सवेरे-४

    सवेरे-सवेरे-४

    Rate this post

    क्या आप नाशता कर चुके हैं या करने वाले हैं? हम यह बात इसलिए पूछ रहे हैं ताकि खाने-पीने के संबन्ध में कुछ सावधानी बरत लें। वे खाने जो तेज़ी से पक और तैयार हो जाते हैं उनका संबन्ध कार्बोहाइड्रेट से होता है। इसमें छना हुआ गेहूं, आटा या मैदा सफ़ेद चीनी और चावल सम्मिलित हैं। चूंकि यह जल्दी पच जाते हैं इसलिए ख़ून में शर्करा के स्तर को बढ़ा देते हैं और धीरे-धीरे शरीर के भार के बढ़ने का कारण बन जाते हैं। वह खाद्य पदार्थ है जिसमें स्टार्च, शर्करा और फ़ाइबर होते हैं। खाद्य पदार्थ का यह गुट शर्करा के अणुओं के टूटने से शरीर की गतिशीलता के लिए ऊर्जा प्रदान करने का कारण बनता है। कार्बोहाइड्रेट दो प्रकार के होते हैं अच्छे कार्बोहाइड्रेट और बुरे कार्बोहाइड्रेट। अच्छे कार्बोहाइड्रेट जल्दी नहीं पचते अतः रक्त में शर्करा तथा इन्सूलिन को बढ़ने नहीं देते। इससे भूख देर में लगती है। इसका सबसे उत्तम स्रोत अनाज, दालें, फल और तरकारियां हैं जो शरीर को हृदय रोगों एवं कैंसर से सुरक्षित रखते हैं। फ़ाइबर, कार्बोहाइड्रेट का वह भाग होता है जिसे पचाने की क्षमता शरीर में नहीं होती। फ़ाइबर सभी तरकारियों, फलों, दालों, बग़ैर छने आटे की रोटी और अनाजों में पाया जाता है। जिस खाने में फ़ाइबर अधिक होता है उसे खाने से मधुमेह, हृदय रोग और पाचनतंत्र संबन्धी कठिनाइयों जैसे क़ब्ज़ या दस्त आने का ख़तरा बहुत कम हो जाता है। इसी प्रकार प्रयोग किये गए खाद्य पदार्थों में फ़ाइबर की उचित मात्रा रक्त में मौजूद चर्बी अर्थात कोलेस्ट्रोल और ट्राइगिलीसिराइड को भी नियंत्रित करती है। फ़ाइबर वाले खाने खाकर मनुष्य थोड़ा ही खाकर पेट भर जाने का आभास करता है और उसे देर तक भूख नहीं लगती। इसी प्रकार आंतों को स्वस्थ्य बनाए रखना, फ़ाइबर वाले खाद्य पदार्थों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

    क्या आप जानते हैं कि स्ट्रेस, चिंता और मन में घुली कड़ुवाहट जो घंटों किसी काम में मन लगने नहीं देती, उसका उपचार कैसे किया जाए? जी तो आइए देखते हैं कि मनोवैज्ञानिक क्या कहते हैं? उनका कहना है कि हंसी के अतिरिक्त और कोई भी एसी चीज़ नहीं है जो तेज़ी से आपके शरीर और मनोस्थिति को संतुलित बना दे। हंसी शरीर को शांत स्थिति में ले आती है। चिंता और तनाव को दूर करके पैंतालिय मिनट तक मांसपेशियों को आराम दिये रखती है इसके अतिरिक्त हंसने से चिंता और तनाव बढ़ाने वाले हारमोन्ज़ में कमी आती है और हंसना संक्रमण से लड़ने के लिए रक्त में मौजूद विशेष प्रोटीन को बढ़ाकर शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को सक्रिय कर देता है। सबसे बढ़कर यह कि हंसने से रक्त के बहाव मे तेज़ी आ जाती है जिससे हार्ट अटैक और अन्य हृदय संबन्धी रोगों का ख़तरा न्यूनतम हो जाता है।

    आज के जीवन की एक कठिन समस्या नित नए और बदलते फ़ैशन हैं। लोगों में यह भावना फ़िल्मों और अन्य जनसंचार माध्यमों द्वारा उत्पन्न कर दी गई है कि अच्छे, मंहगे और नित नए फ़ैशन से मनुष्य का व्यक्तित्व प्रभावी बनता है। या फिर यह कि इस शादी में या उस उत्सव मे यह कपड़े पहन चुके हैं, दुबारा वही पहनेंगे तो लोग क्या कहेंगे? यह भावना बच्चों तक में उत्पन्न कर दी गई है जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। यदि वस्त्र साधारण हों और व्यक्तित्व व चरित्र महान हो तो लोग कपड़ों पर ध्यान भी नहीं देते, या बहुत कम ध्यान देते हैं और यदि मनुष्य स्वयं बिल्कुल ही साधारण हो और कपड़े ज़ोरदार पहन ले तो लोग उसको आश्चर्य से देखते हैं और कुछ लोग कटाक्ष भी करते हैं। इस बारे में एक घटना प्रस्तुत है।

    प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइन्सटाइन बहुत ही साधारण जीवन व्यतीत करते थे और उन्हें कोई परवाह भी नहीं होती थी। एक दिन उनके मित्र ने उनसे पूछा कि तुम अपने लिए कुछ नए कपड़े क्यों नहीं बनवाते? आइन्सटाइन ने मुस्कुरा कर कहा कि इसकी क्या आवश्यकता है? यहां मुझे सब पहचानते हैं, कौन मेरे कपड़े देखता है? कुछ समय पश्चात आइन्सटाइन किसी अन्य नगर गए और संयोगवश उन्हें वहां पर वही मित्र मिल गया। जब उसने आइन्सटाइन को उसी पुराने कोट में देखा तो कहने लगा कि भई इस नगर में आए हो। यहां के लिए तो कोई नया कोट ख़रीद लेते। कुछ नए कपड़े बनवा लेते, वहीं पुराने कपड़े यहां भी। आइन्सटाइन ने दोबारा उसी प्रकार मुसकुराकर कहा कि इसकी क्या आवश्यकता है? यहां कौन मुझे पहचानता है? तो इस बात की परवाह नहीं करनी चाहिए कि लोग क्या कहेंगे? मनुष्य यदि अपने व्यक्तित्व को ज्ञान, शिष्टाचार, कृपा, दया और लोगों की सहायता जैसी आदतों से सुसज्जित करे तो कपड़ों के संबन्ध में चिंता स्वयं ही समाप्त हो जाएगी।

    पिछले कार्यक्रम में आपने पढ़ा होगा कि एक ईश्वरीय दूत हज़रत यूनुस, दजला नदी के किनारे बसे नैनवा नगर में जीवन व्यतीत करते थे। इस नगर की जनसंख्या एक लाख थी। हज़रत यूनुस सदा ही इस बात से दुखी रहते थे कि उनके समाज में लोग सर्वव्यापी अनन्य ईश्वर की महानता की अनदेखी करके पत्थर की निर्जीव मूर्तियों को अपना ईश्वर मानते थे और उनकी पूजा करते थे। इसी बीच ईश्वर ने उन्हें आदेश दिया कि वे लोगों को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश में लाएं। हज़रत यूनुस ने लोगों को समझाना और उपदेश देना आरंभ किया परन्तु लंबे समय तक प्रयास करने के बावजूद लोगों ने हज़रत यूनुस की बात नहीं मानी। यह स्थिति देखकर हज़रत यूनुस ने उनपर ईश्वरीय प्रकोप की प्रार्थना की और स्वयं नैनवा नगर से निकल कर भूमध्य सागर की ओर चल पड़े। उन्हें बीच-बीच में लोगों से यह समाचार मिल रहे थे कि अभी नैनवा के लोगों पर ईश्वरीय प्रकोप नहीं आया है। उधर नैनवा में एक ज्ञानी और समझदार व्यक्ति भी था। उसने जब ईश्वरीय प्रकोप का आभास किया तो उसने लोगों से कहा कि तुम अपना हठ छोड़कर ईश्वर से रो-रोकर अपने पापों की क्षमा मांगो और अनन्य ईश्वर के प्रति अपने ईमान की घोषणा करो। यदि तुम एसा करोगे तो ईश्वर तुम्हे क्षमा कर देगा क्योंकि वह अपनी सभी रचानाओं से बहुत प्रेम करता है। तुमने हज़रत यूनुस की बात न मानकर उनपर और अपने आप पर बड़ा अत्याचार किया है। तुम इस बात का भी प्रायश्चित करो। जनता ने एसा ही किया और इस प्रकार ईश्वर की कृपा उसके प्रकोप पर छा गई और नैनवा के लोग एकेश्वरवादी बनकर ईश्वरीय प्रकोप से बच गए।

    दूसरी ओर ईश्वरीय दूत हज़रत यूनुस, नैनवा के लोगों की वर्तमान स्थिति से अनभिज्ञ और उनकी हठधर्मी से दुखी मन के साथ भूमध्य सागर के तट पर पहुंचे और वहां किसी नौका की प्रतीक्षा करने लगे। थोड़ा ही समय बीता था कि एक नौका आई और हज़रत यूनुस उसपर सवार हो गए। नौका में अन्य यात्री भी सवार थे। सब अपने-अपने विचारों में मग्न थे। नौका अपने मार्ग पर चली जा रही थी। अचानक सभी ने आभास किया कि समुद्र की लहरें तूफ़ानी हो रही हैं। थोड़ी ही देर में देखते ही देखते समुद्र चिंघाड़ने लगा। बूढ़े नाविक ने थोड़ी देर स्थिति का आंकलन किया और फिर चिल्लाकर बोला कि मैंन आजतक समुद्र को इतना भयंकर नहीं देखा था। एसा लगता है कि कोई दास अपने मालिक की अनुमति के बिना भागकर इस नौका पर सवार हो गया है। यही कारण है कि ईश्वरीय प्रकोप ने हमें जकड़ लिया है।

    यह सुनकर हज़रत यूनुस सोच में पड़ गए कि कहीं अपने मालिक की इच्छा के विरुद्ध भागा हुआ दास मैं तो नहीं हूं? मैने नैनवा के लोगों को अकेला छोड़ दिया है और स्वयं यहां पर आ गया हूं। यह सोचकर हज़रत यूनुस व्याकुल हो उठे कि तभी चप्पू चलाने वालों में से एक अनुभवी व्यक्ति ने कहा कि नौका बहुत भारी है। चप्पू चलाना कठिन होता जा रहा है। नाव के भार को कम होना चाहिए अन्यथा सब लोग डूब जाएंगे। इसके लिए किसी एक यात्री को अपने जीवन का बलिदान देना होगा। इस बात से सभी चिन्तित थे। किसी ने कहा कि लोगों के नाम की परचियां निकाली जाएं। जिसका भी नाम निकल आए वह समुद्र में कूद जाए। पर्ची हज़रत यूनुस के नाम की निकली। ईश्वर का नाम लेकर वे समुद्र में कूद गए। अभी पूरी तरह से वे पानी में आए भी नहीं थे कि एक बहुत बड़ी मछली ने उन्हें निगल लिया। कुछ क्षणों में जब हज़रत यूनुस कुछ संभले तो उन्होंने स्वयं को एक मछली के अमाश्य में विभिन्न द्रव्यों में तैरता हुआ पाया।

    अब वे पूरी तरह से समझ चुके थे कि यह ईश्वरीय प्रकोप स्वयं उनके लिए ही था क्योंकि उन्होंने ईश्वर की इच्छा के बिना ही नैनवा नगर को छोड़ा था और नैनवा के लोगों के प्रति उनकी दया की भावना नहीं जागी थी। यह बातें समझकर वे उस असीम अंधकार में रोने और गिड़गिड़ाने लगे। उन्होंने कहना आरंभ किया कि हे पालनहार, तेरे अतिरिक्त कोई अन्य पालनहार नहीं है। तू पवित्र है और मैं अत्याचारियों में था अर्थात मैंने तेरी अवज्ञा करके स्वयं पर अत्याचार किया है।

    हज़रत यूनुस पश्चाताप कर रहे थे, अपने पाप पर रो रहे थे कि उनपर ईश्वर को दया आई। मछली तट की ओर बढ़ने लगी और उसने उन्हें समुद्र तट पर फैली रेत पर उगल दिया। परन्तु उस थोड़े से समय में ही जब हज़रत यूनुस मछली के अमाशय में थे अमाशय के विभिन्न प्रदार्थों ने उनकी त्वचा को गला दिया था और उनमें चलने-फिरने की शक्ति नहीं रह गई थी। रेतपर धूप फैली हुई थी और किसी भी प्रकार की छाया वहां पर नहीं थी। हज़रत यूनुस अपने किये पर लज्जित थे। वे ईश्वर के समक्ष बार-बार इस बात को दोहरा रहे थे कि वह स्वयं दोषी हैं। यह देखकर दयावान ईश्वर ने उनके निकट लौकी का एक पौधा उगा दिया जिसकी बेल तुरंत फैल गई और उसके चौड़े पत्तों ने हज़रत यूनुस को छाया भी प्रदान कर दी और मक्खी आदि से उनके घावों की सुरक्षा भी की। इस प्रकार ईश्वर ने कुछ समय के पश्चात हज़रत यूनुस को स्वस्थ्य बना दिया और वे नैनवा नगर की ओर चल पड़े। जिस समय हज़रत यूनुस नैनवा पहुंचे तो वहां के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। हज़रत यूनुस ने भी ईश्वर का अत्यन्त आभार प्रकट किया।