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    सवेरे-सवेरे-६

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    हज़रत अली अलैहिस्सलाम का कथन है कि ज्ञान तुम्हे मुक्ति दिलाता है और अज्ञानता तुमको नष्ट कर देती है। जी हां इसीलिए कहा गया है कि अधिक से ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करो ताकि अज्ञानता के अंधकार से निकलें और संसार को खुली आखों से देख सको। ज्ञान प्राप्त करने का वास्तविक अर्थ यह नहीं होता है कि मनुष्य कालेजों और विश्वविद्यालयों की बड़ी-बड़ी डिग्रियां अपने पास इकट्ठा करले और पढ़ा लिखा माना जाने लगे। बल्कि ज्ञान प्राप्त करने का अर्थ यह होता है कि मनुष्य के मस्तिष्क में प्रकृति की वास्तविकताएं स्पष्ट रूप से समा जाएं और यह भावना और विचार उसके अस्तित्व पर छा जाए कि ब्रहमांड की यह जटिल रचना जिसने की है वही सबसे महान है और मनुष्य अपने अधिक से अधिक ज्ञान के होते हुए भी उसकी सहायता के बिना कुछ नहीं कर सकता। यह भावना और विचार उसमें विनम्रता उत्पन्न करता है और उसे घमंड से दूर कर देता है अन्यथा थोड़ी सी किताबें और दो-चार डिग्रियां मनुष्य को घमण्डी बनाकर एसा अज्ञानी बना देती हैं जिसे यह भी पता नहीं होता है कि उसके मन में कितना अंधकार है। यह अंधेरा उसे न अपनी पहचान करने देता है न ही वह दूसरों को पहचान पाता है। न उसे दूसरों द्वारा की गई भलाइयां याद रह पाती हैं न अपनी कमियों पर उसकी दृष्टि पड़ती है और यह स्थिति, उस व्यक्ति को लोगों की दृष्टि से गिरा देती है और वह लोगों की घृणा का पात्र बन जाता है।

    जैसाकि आप जानते हैं कि अपनी स्थिति और समय पर ध्यान केन्द्रित न करने के कारण हम अपनी ही ग़लतियों को दोहराते हैं और अपने जीवन का आनंद नहीं उठा पाते। जब समय बीत जाता है तब कहते हैं कि वह समय कितना अच्छा था!

    इस संबन्ध में विद्वानों का कहना है कि हममे से अधिकतर लोग कल और भविष्य में जीवन बिताने की तैयारी के इतने आदी हो गए हैं कि वे लोग वर्तमान समय और वर्तमान जीवन पर ध्यान नहीं देते हैं। भविष्य की चिंता हमें इतना व्यस्त रखती है कि हम भूल जाते हैं कि यह क्षण जो इस समय बीत रहा है उससे आनंद उठाएं। भविष्य की महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में चिन्तित रहकर हम वर्तमान के सुन्दर क्षणों को तबाह कर देते हैं और यही कारण है कि अंत में हमारे हाथ पछतावा ही लगता है। जीवन तेज़ी से बीत रहा है। हमारी आयु बढ़ रही है। हम बच्चों की वर्तमान आयु से आनंद लेने के स्थान पर उनके बड़े होने और उस समय जीवन की कठिनाइयों के कम होने की प्रतीक्षा करते रहते हैं न अपनी आयु का आनंद लेते हैं न अपनी शक्ति से लाभ उठाते हैं और फिर अचानक देखते हैं कि जवानी बीत गई, बच्चे बड़े हो गए और हम भविष्य में अपना सौभाग्य ही ढूंढते रह गए।

    वास्तव में हमारा ग़लत विचार कि सौभाग्य, किसी विशेष स्थिति का नाम नहीं है, हमे धोखा देता है। हमें प्रसन्न करने के लिए किसी विशेष घटना की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। आनंद उठाने के लिए सप्ताह के अंत की छुट्टी की प्रतीक्षा न करें बल्कि घर तथा दफ़्तर के कामों को करने में ही आनंद लेने की आदत डालें। आप सोचें की आपके जीवन का लक्ष्य, काम करना है और अच्छी तरह काम करना है। लोगों से मिलना-जुलना, एक-दूसरे की सहायता करना, छोटे-बड़े सभी कामों द्वारा समाज की सेवा करना है, तो जब यह सब हो रहा है तो इसका अर्थ है कि आपका जीवन अर्थपूर्ण है और यही जीवन का वास्तविक आनंद है। आप उन कामों पर विशेष रूप से ध्यान दीजिए जिन्हें आप उत्तम रूप से कर सकते हैं। उसे पूरी क्षमता और शक्ति के साथ कीजिए और उसे करने में आनंद लीजिए। इसको कहते हैं वर्तमान में जीना। यदि आप इस बात पर ध्यान दें तो यह आपके लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

    डाक्टरों का कहना है कि खाने में प्रतिदिन दही का प्रयोग करने से हृदय की नाड़ियों की दीवारें मोटी नहीं हो पातीं अतः हृदय रोगों का ख़तरा बहुत कम हो जाता है। इन डाक्टरों ने अपने शोध कार्यों में सत्तर वर्ष की एक हज़ार अस्सी महिलाओं पर किये गए परीक्षणों द्वारा दर्शाया है कि सौ ग्राम कम चर्बी वाले दही या दूध से बनी वस्तुओं का प्रतिदिन सेवन, सर्वाइकल ओरटेरियो या गर्दन की मुख्य रग की दीवार को मोटा नहीं होने देता और इस प्रकार हृदय रोगों से रक्षा करता है।

    आप सौंफ से तो परिचित हैं ही। अब तो रेस्तरानों में भी खाने के पश्चात आपके सामने सौंफ़ रखी जाती है। इसको महिलाओं की जड़ी-बूटी कहा जाता है क्योंकि इसमें महिलाओं से विशेष हरामोन पाए जाते हैं और प्राकृतिक रूप से यह गर्म होती है। पेट में गैस बनने और स्नायुतंत्र से संबन्धित रोगों जैसे घबराहट, बेचैनी और हतोत्साह दूर करने में सौंफ़ बहुत प्रभावी है। सांस की बीमारियों में भी यह बहुत ही लाभदायक है। यह पेनीसिलीन और टेट्रासाइकिलीन के स्तर की बैक्टीरिया विरोधी या एन्टी बैक्टीरियल विशेषता रखती है। पल्कों की सूचन करने में भी सौंफ़ लाभदायक है। छोटे बच्चों को यदि दस्त आ रहे हों तो थोड़ी सी मात्रा में सौंफ़ उबाल कर और छान कर देने से बच्चे के शरीर में पानी की कमी को किसी सीमा तक रोका जा सकता है। सौंफ़ त्वचा के लिए भी बहुत ही लाभदायक है। तव्चा को स्वच्छ बनाने के साथ ही उसे तनाव मुक्त बनाती है तथा झुर्रियों को मिटाने में सहायक होती है। यह त्वचा पर पड़े नील दूर करती है और चिकनी त्वचा की सफ़ाई में विशेष भूमिका निभाती है। त्वचा के नीचे यदि पानी इकट्ठा हो जाए और इस प्रकार सूजन आ जाए तो सौंफ़, अतिरिक्त पानी को भी कम करती है।

    हरी मटर का प्रयोग अवश्य कीजिए। इसमें प्रोटीन, विटामीन और खनिज लवण बहुत अधिक होते हैं जिनसे ऊर्जा मिलने के साथ ही साथ शरीर का भार भी नहीं बढ़ता है। एक प्याली मटर के दानों में, एक सौ चौंतीस कैलोरी ऊर्जा होती है और बहुत अधिक मात्रा में फ़ाइबर पाया जाता है। यही कारण है कि जो लोग शरीर का भार कम करके दुबले होना चाहते हैं उनके लिए मटर को बहुत ही उचित खाद्य पदार्थ माना जाता है।

    मटर क़ब्ज़ को दूर करती है। रक्त में मौजूद कोलेस्ट्राल को कम करती है और बहुत से रोगों से बचने में सहायता करती है। इसमें मौजूद विटामिन-सी, मोतियाबिंद और आखों के अन्य रोगों से बचाती है। मटर के दानों में एन्टी आकसीडेंट भी पाया जाता है जो हृदय के रोगों के ख़तरे को कम करता है और शरीर के भीतर मौजूद रक्षा प्रणाली को शक्ति प्रदान करता है। एक नवीन शोध से पता चला है कि जो गर्भवती माताएं सेब का प्रयोग प्रतिदिन या सप्ताह में कम से कम चार बार करती हैं उनके बच्चे अस्थमा से बचे रहते हैं। यह विशेषता केवल सेब की है, दूसरे फ़लों और सब्जियों के अपने अलग प्रभाव होते हैं। एक और बात बताते चलें कि गर्भावस्था में मछली के प्रयोग से बच्चों में त्वचा पर एक्ज़िमा का ख़तरा बहुत कम हो जाता है।