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    सवेरे-सवेरे – 11

    सवेरे-सवेरे – 11
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    हज़रत अली अलैहिस्सलाम का कथन है कि सौभाग्यशाली है वह व्यक्ति जो अपने ईश्वर को दृष्टिगत रखे और अपने पापों से डरता रहे।

    वास्तव में ईश्वर को निरंतर दृष्टिगत रखना, हमारे जीवन का महत्वपूर्ण विषय होना चाहिए।  इसका सबसे साधारण प्रभाव यह होता है कि मनुष्य पाप और बुराइयों से यह सोचकर बच जाता है कि ईश्वर उसे देख रहा है।  इसी प्रकार से कठिनाइयों में असहाय होने की भावना उसके भीतर उत्पन्न नहीं होने पाती।  एसे व्यक्ति को इस बात का संतोष रहता है कि सर्वव्यापी ईश्वर, उसकी सहायता करेगा जो उसे और उसकी स्थिति को देख रहा है।

    अब आते हैं अपने बुरे कर्मों की ओर।  जी हां।  पाप के बारे में हमें यह देखना है कि पाप की जड़ क्या होती है? अनेक महापुरूषों और विद्वानों का यह मानना है कि झूठ सभी पापों की जड़ है।  अपने दैनिक जीवन में अनेक बार हमें एसे लोगों का सामना करना पड़ता है जिन्हें बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बयान करने की आदत सी होती है।  इसी प्रकार एसे लोग भी होते हैं जो अकारण ही सुबह से शाम तक हर बात में झूठ बोलते हैं।  वे इतना अधिक झूठ बोलते हैं कि सुनने वाला उनके झूठ बोलने को उनकी बीमारी समझने लगता है।  मनोचिकित्सक इस स्थिति को कई प्रकार की मानसिक बीमारियों की निशानी मानते हैं।  कभी एसा भी होता है कि कोई व्यक्ति किसी काम को पसंद नहीं करता किंतु उसे करने पर वह विश्व होता है या फिर उसे अपने जीवन में अनेक प्रकार के दबावों का सामना होता है।  एसे में कुछ क्षणों तक राहत पाने के लिए वह झूठ का सहारा लेता है।

    पवित्र क़ुरआन में शैतान के लिए बताया गया है कि वह अपने लक्ष्यों की पूर्ति के लिए अर्थात मनुष्य को पथभ्रष्ट करने के लिए झूठ का सहारा लेता है।  शैतान यदि झूठ का सहारा नहीं लेता तो वह हज़रत आदम को स्वर्ग से नहीं निकलवा सकता था।  अतः मनुष्य को सदैव ही बहुत सचेत रहना चाहिए।  उसे अपनी भ्रष्ट इच्छाओं और भावनाओं को अपने नियंत्रण में रखने के प्रयास करते रहना चाहिए तथा अपने भीतरी शैतान के अतिरिक्त मनुष्य रूपी बाहरी शैतानों के बहकावे में वह कभी न आए।

    ईर्ष्या भी कई बार झूठ बोलेन का कारण बनती है अतः झूठ से बचने के लिए ईर्ष्या जैसी बुराई को नियंत्रित करना भी आवश्यक है।  वैसे झूठ बोलने के कई अन्य कारण भी हैं।

    मनुष्य में जब किसी भी विषय को सूक्ष्मता के साथ बयान करने की क्षमता नहीं होती है तो भी वह झूठ का सहारा लेता है।

    किसी ख़तरे या धमकी से बचने के लिए भी कुछ लोग झूठ का सहारा लेते हैं।

    अपने विरोध और अपमान से बचने के लिए भी लोगों को झूठ बोलते देखा गया है।

    अपनी कमज़ोरियों और अक्षमता को छिपाने के लिए भी झूठ बोला जाता है।

    कभी-कभी अपनी हीन भावना को छिपाने और दूसरों के ध्यान को अपनी ओर आकृष्ट करने के लिए भी कुछ लोग झूठ का सहारा लेते हैं।

    आइए अब देखते हैं कि इस बुरी आदत से छुटकारा कैसे पाया जाए?

    आप खुलकर बता दें कि हम इस बात को पूरी तरह से बयान नहीं कर सकते या इस काम को पूरी तरह से नहीं कर सकते।  एसी स्थिति में शायद कुछ लोग आपकी सहायता करने के लिए तैयार हो जाएं।

    स्वयं को किसी ख़तरे से बचाने के लिए यदि आप झूठ बोलते हैं तो याद रखें कि बार-बार झूठ बोलने से कहीं अच्छा होगा कि आप एक बार उस ख़तरे या धमकी के समक्ष डट जाएं और सदैव के लिए निर्भीक बन जाएं।

    विरोध और अपमान से बचने के लिए झूठ का सहारा न लेकर चुप्पी साध लें या सच बोलकर सदैव के लिए स्वयं को अपमान से बचा लें।  इसी प्रकार अपनी कमज़ोरियों को छिपाने के स्थान पर उन्हें दूर करके अपनी क्षमता में वृद्धि करें।

    याद रखें कि लोगों का ध्यान आपके अच्छे गुणों की ओर स्वयं आकर्षित होता है अतः बुरी आदतों और झूठ से छुटकारा पा लें तो लोग स्वयं ही आपकी ओर आकर्षित होंगे।

    एक बात यह भी बहुत महत्वपूर्ण होती है कि अपने बच्चों या किसी भी व्यक्ति से एसी आशाएं न बांधें जिन्हें पूरी करने की क्षमता उनमें न हो।  अन्यथा वह व्यक्ति झूठ बोलने पर विवश होगा और आप उसके पाप में सहभागी होंगे।