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    सवेरे सवेरे- 17

    सवेरे सवेरे- 17
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    एक दिन शैतान ने सभी स्थानों पर यह घोषणा कर दी कि अब वह अपने कामों से हाथ खींच रहा है और रिटायर होना चाहता है अतः अपने काम के औज़ारों को उचित मूल्यों पर बेचना चाहता है। शैतान के औज़ारों में घृणा, क्रोध, ईर्ष्या, आत्ममुग्ध्ता और इस जैसी बहुत सी चीज़ें थीं। इन औज़ारों में से एक औज़ार बहुत पुराना और घिसा हुआ था किंतु उसका मूल्य सबसे अधिक था। किसी ने शैतान से पूछा कि यह औज़ार क्या है? शैतान ने उत्तर दिया कि यह निराशा और हतोत्साह है। व्यक्ति ने पूछा कि इसका मूल्य क्यों इतना अधिक है? शैतान ने बड़ी ख़तरनाक मुस्कुराहट के साथ कहाः यह मेरा सबसे प्रभावी औज़ार है। जब सारे हथकण्डे बेकार हो जाते हैं तब मैं इसे मनुष्य के मन में डालता हूं। यदि किसी के मन में मैं निराशा और हताशा डालने में सफल हो जाता हूं तो फिर वह व्यक्ति हर एसा काम करने के लिए तैयार हो जाता है जो मैं चाहता हूं। चूंकि मैंने यह औज़ार बहुत अधिक लोगों पर प्रयोग किया है इसीलिए यह इतना पुराना हो गया है। इस कहानी को पढ़कर आप समझ गए होंगे कि हतोत्साह और निराशा को धार्मिक शिक्षाओं में गुनाह या पाप क्यों कहा गया है? निराशा वाली मानसिकता, लोगों से ईश्वर पर भरोसा करने वाली भावना को छीन लेती है। इस प्रकार मनुष्य स्वयं को असहाय समझने लगता है। एसा व्यक्ति व्याकुल होकर बुरे से बुरे काम यहां तक कि आत्महत्या पर भी उतर आता है। मनुष्य को सदैव यह याद रखना चाहिए कि ईश्वर उसे कभी भी अकेला नहीं छोड़ता और वह उन कार्यों में और उन मार्गों से भी सहायता करने में सक्षम है जिन्हें हम असंभव समझते हैं। यही कारण है कि हमें ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमें एक क्षण के लिए भी अकेला न छोड़े और जीवन में सदैव आशावान रखे क्योंकि निराशा शैतान का प्रमुख हथकण्डा है।

    इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने कर्बला में ईश्वरीय प्रेम और मानवता को दृष्टिगत रखकर जो क़ुर्बानियां दीं उनको पूरा संसार जानता है। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के जीवन से संबन्धित एक घटना का उल्लेख कर रहे हैं जिससे आम जीवन में ईश्वर के प्रति उनके प्रेम की झलक दिखाई देती है। एक दिन इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के एक दास ने कोई एसा कार्य किया जिससे इमाम को उसपर क्रोध आ गया और उन्होंने उसे दंडित करने का आदेश दिया। यह सुनकर दास ने पवित्र क़ुरआन की वह आयत पढ़ना आरंभ कर दी जिसमें ईश्वर कहता है कि पवित्र लोग अपना ग़ुस्सा पी जाते हैं। ईश्वर का यह कथन सुनते ही इमाम हुसैन ने कहा कि इसे छोड़ दो। इसके बाद दास ने एक अन्य आयत पढ़ी जिसका अर्थ होता है कि पवित्र लोग, लोगों को क्षमा कर देते हैं। इमाम हुसैन ने उससे कहा कि मैंने तुझे क्षमा कर दिया। दास ने क़ुरआन की एक और आयत पढ़ी कि ईश्वर भलाई करने वालों से प्रेम करता है। यह सुनकर इमाम ने कहा कि मैंने तुझे स्वतंत्र कर दिया और अबतक तुझे जो कुछ दिया था उसका दोगुना और दिया। इस प्रकार से ज्ञात होता है कि क्रोध की स्थिति में भी ईश्वर का आदेश सुनकर मनुष्य स्वयं को नियंत्रित कर सकता है और अपने कर्म को उसके आदेशानुसार बना सकता है।

    गुलाबजल में यदि पानी मिलाया जाए यहां तक कि वह पानी बहुत निर्मल ही हो तो भी गुलाबजल की सुगंध कम हो जाएगी और उसकी विशेषताओं में कमी आ जाएगी। सत्य भी गुलाबजल की भांति होता है। किसी भी बात को सत्य के साथ नहीं मिलाना चाहिए। असत्य गंदे पानी की भांति होता है यदि सत्य के गुलाबजल में उसे मिला दें तो वह सत्य के गुणों और प्रभाव को समाप्त कर देगा। झूठ एसे लोगों के व्यक्तित्व के लिए कलंक समान है जो भलाइयां करते हैं, अनन्य ईश्वर का सामिप्य प्राप्त करना चाहते हैं, प्रार्थना करते हैं और ईश्वर की उपासना करते हैं। झूठ आपके सम्मान को कम कर देता है। आपके शब्दों के महत्व को कम कर देता है अतः यह प्रयास करें कि हंसी-मज़ाक में भी झूठ न बोलें। यदि कहीं कोई ग़लती हो जाए या आपके काम में कोई कमी रह गई हो और उससे कोई नुक़सान भी हो गया हो तो उसे आप स्वीकार कर लें। आरंभ में एसे अवसरों पर सत्य बोलने में कठिनाई होती है परन्तु चूंकि मन पर किसी प्रकार का बोझ नहीं होता अतः आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और दूसरों की दृष्टि में आपका सम्मान भी। यह भी याद रखना चाहिए कि झूठ बोलने वाला व्यक्ति झूठ बोलते व असत्य पर आधारित काम करते समय समझ रहा होता है कि उसका झूठ प्रकट नहीं हो रहा है परन्तु होता इसके विपरीत है। उसकी ज़बान झूठ बोलती है परन्तु आंखें और चेहरा सबकुछ सच-सच बता देता है।

    प्रूदषणः वायु प्रदूषण से चिंता, स्वभाविक सी बात है। इससे अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। यह सांस और हृदय के रोगों में वृद्धि करने के अतिरिक्त वायु प्रदूषण, आखों के सामने अंधेरा छा जाने और आंखों की कमज़ोरी का भी कारण बनता है। इस समस्या से निबटने का एक सरल उपाय भी है। नेत्र रोगों के एक विशेषज्ञ का कहना है कि अनार खाने से वायु प्रदूषण से आंखें कम ही प्रभावित होती हैं क्योंकि अनार में एन्टी आक्सीडेंट विटामिन्स होते हैं जो प्रदूषण के दुषप्रभाव को कम कर देते हैं। इसके अतिरिक्त ग्रीन चाय और द्रव्य पदार्थों का प्रयोग अधिक करके भी इसके प्रभाव को रोका जा सकता है। जहां पर अधिक ट्रैफिक हो वहां पर न जाएं साथ ही अपनी आंखों को बेबी शैंपू और साफ़ पानी से धोने की आदत भी डालें।
    चाय चाहे जिस प्रकार की भी हो काली, सफ़ेद या हरी उसमें टैनिट नामक पदार्थ अवश्य मौजूद होता है। खाना खाने के आधे घन्टे के भीतर चाय पी जाए तो खाद्य पदार्थ में मौजूद लोहे में टैनिन के तत्व चिपक जाते हैं और उसका शरीर में अवशोषण नहीं होने देते।
    व्यायाम और खेलकूद संभव है कि उन लोगों के लिए कठिनाइयां उत्पन्न करे जो हृदय रोग में ग्रस्त हैं अतः डाक्टर की सलाह लेकर ही अपने लिए व्यायाम का चयन करना चाहिए। वैसे भारी खाना खाने के तुरन्त बाद व्यायाम या खेलकूद हृदय पर दबाव को स्वस्थ व्यक्तियों में भी बहुत बढ़ा देता है। एसे में हल्का भोजन करने के कम से कम दो से तीन घण्टे के बाद और भर पेट खाना खाने के बाद तीन से चार घण्टे के बाद ही व्यायाम जैसी गतिविधियां करनी चाहिए।

    ज़ाफ़रानः ज़ाफ़रान या केसर की गिनती उन मसालों में होती है जो खानों को रंग और सुगंध दोनों प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त पारंपरिक चिकित्सा में केसर का प्रयोग, दर्द निवारक एवं अवसाद को दूर करने वाली दवाई के रूप में होता है। केसर के संबन्ध में किये गए शोध दर्शाते हैं कि इसमें कैंसर जैसे रोग को नियंत्रित करने की क्षमता पाई जाती है तथा यह स्मरणशक्ति में वृद्धि करता है।

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