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    सवेरे-सवेरे-19

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    एक दिन पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स) के पौत्र इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम अपने एक साथी के साथ बाज़ार से गुज़र रहे थे।  इमाम के साथी के पीछे-पीछे उसका एक दास चल रहा था।  एक बार इमाम सादिक़ के साथी ने पीछे मुड़कर देखा और जब दास कहीं दिखाई नहीं पड़ा तो उससे उसने एसे अपशब्द कहे जिसका अर्थ होता है अपनी माता के दुष्कर्मों की निशानी।  इमाम ने जब यह सुना तो वे क्रोधित हो उठे।  उन्होंने बहुत दुखी होकर कहा कि मैं तो तुम्हें बहुत ही पवित्र और ईश्वर से भय रखने वाला व्यक्ति समझता था।  तुमने इतनी ग़लत बात उस दास के लिए क्यों कही? तुमको यह अधिकार किसने दिया? इमाम के साथी ने कहा कि आप दुखी न हों क्योंकि यह व्यक्ति अनेकेश्वरवादी है।  उसने कहा कि इसकी माता अमुक क़बीले की है और वे सबके सब अनेकेश्वरवादी हैं।  इसपर इमाम ने उत्तर दिया कि अगर अनेकेश्वरवादी है तो क्या हुआ।  विवाह के विशेष रीति-रिवाज तो सबके यहां होते हैं।  उसके माता-पिता ने भी अपनी रीतियों और परंपरा के अनुसार ही विवाह किया होगा।  इस प्रकार यह दास अपनी माता की वैध संतान है।  तुमने उसपर कैसे इतना बुरा आरोप लगा दिया? उसके बाद से इमाम ने कभी उस व्यक्ति के यहां आना-जाना नहीं रखा।

    यह कहानी सुनाकर हम आपको केवल यह बताना चाहते हैं कि दूसरों को अपशब्द कहने वालों विशेषकर पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजनों के प्रति श्रद्धा रखने वालों को इस बात की ओर से सचेत रहना चाहिए कि वे सदैव ही दूसरों को अपशब्द कहने से बचें।  यह बुरी आदत समाज में उनकी छवि को बिगाड़ने के अतिरिक्त ईश्वर के उनसे क्रोधित होने का कारण बनती है क्योंकि इससे दूसरे के अधिकारों का हनन होता है और वे ईश्वर के समक्ष उत्तरदायी हैं।

    सफल लोगों के आचरण मे बहुत सी समानताएं होती हैं।  इन समानताओं में से कुछ के बारे में आपको बता रहे हैं।  अब आप स्वयं को देखिये कि कितनी प्रतिशत यह क्षमताएं आपके भीतर मौजूद हैं।  उसके बाद आप यह प्रयास कीजिए कि जो विशेषताएं आपमें नहीं हैं उन्हें अपने भीतर पैदा कीजिए।  एसा करने के थोड़े समय पश्चात आप यह आभास करने लगेंगे कि जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन आ गया है।  धीरे धीरे आपके भीतर जो विशेषताएं उत्पन्न होंगी यद्यपि वे पूर्ण रूप से एक-दूसरे के अनुसार नहीं होंगी परन्तु एक-दूसरे से जुड़ी हुई अवश्य होंगी।  अर्थात यदि आप इनमें से कोई एक विशेषता न रखते हों तो यह एसा है जैसे आपमें इनमें से कोई विशेषता नहीं है।  आइए देखते हैं कि यह विशेषताएं क्या हैं?

    सच्चाईः सच्चाई का अर्थ होता है वास्तविकता को बयान करना।  जब आप झूठ बोलते हैं तो अपनी साख को गिरा देते हैं।  इससे भी अधिक यह बात होती है कि झूठ बोलने वाला व्यक्ति इस बात के लिए बहुत अधिक अपनी ऊर्जा ख़र्च करता है कि झूठ को बाक़ी बातों में किस प्रकरा से मिलाया जाए ताकि वह सच लगने लगे।

     

    अपनी इच्छाओं पर नियंत्रणः अर्थात वास्तविक मूल्यों पर ध्यान केन्द्रित रखना।  कई बार एसा होता है कि हम अपनी धन-दौलत के बारे में बड़ी प्रसन्नता से बातचीत करते हैं परन्तु वास्तविकता यह होती है क हमारे भीतर इस बात का भय और चिंता छिपी होती है कि यह भौतिक वस्तुएं हमारे हाथ से कहीं निकल न जाएं।  यह भीवना धीरे-धीरे हमपर पूर्ण रूप से नियंत्रण कर लेती है।  इस स्थिति में हमें अपनी आंतरिक इच्छाओं को नियंत्रित करके स्वयं को नैतिक मूल्यों से सुसज्जित करने का प्रयास करना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि हमारी मानसिक व सामाजिक स्थिति के लिए धन दौलत के पीछे भागना बेहतर है या फिर नैतिक मूल्यों के पीछे?

    गर्वः आप जो कुछ हैं उसपर गर्व करना बहुत आवश्यक है।  आप जो काम करते हैं, जहां काम करते हैं या आप जो कुछ हैं उसपर गर्व करना चाहिए।  यदि आप स्वयं पर गर्व नहीं करेंगे तो फिर दूसरे आप पर गर्व कैसे कर पाएंगे?

    कर्तव्य परायणताः सफलता प्राप्ति के लंबे रास्ते पर अनेक बार एसा होता है कि जो अवसर भी आपको मिलते हैं वह आपके निकट मौजूद लोगों से किसी न किसी प्रकार जुड़े होते हैं।  अब यदि आप अवसर से लाभ उठाते हैं तो संबन्धों पर आंच आती है।  एसी स्थिति में आपको अपने आप से सच्चा रहना चाहिए और कर्तव्य निभाने की भावना को संबन्धों पर प्राथमिकता देनी चाहिए।

    आजकल विभिन्न देशों में वायु प्रदूषण, एक बहुत बड़ी समस्या का रूप धारण कर चुका है।  पेट्रोल और डीज़ल से चलने वाली गाड़ियां, चाहे धुआं देती दिखाई भी न दें तब भी उनके द्वारा वातावरण में भेजी जाने वाली गैस, वायु प्रदूषण का मुख्य कारण बनती है।  शोध कार्यों से पता चला है कि वायु प्रदूषि वातावरण में यदि पूरी चर्बी वाला दूध पिया जाए या फिर एसे दूध से बने पनीर या दही का प्रयोग आदि किया जाए तो इसमें मौजूद फैटी एसिड शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देते हैं जिससे लोगों में प्रदूषण के दौरान फेफड़े की बीमारियां बढ़ने लगती हैं।  विभिन्न धातुएं जैसे लेड जो पेट्रोल या डीज़ल के जलने से हवा में फैलता है वह कैल्शियम और लोहे एवं जस्ते जैसे खनिज पदार्थों का स्थान लेकर अर्थात जहां पर यह पदार्थ अवशोषित होते हैं, उनके स्थान पर लेड के अवशोषित होने से विभिन्न कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं।  इस प्रकार से कैंसर बनने लगता है।

     

    वायु प्रदूषण से प्रभावित होने वालों में बच्चे, महिलाएं, वृद्ध एवं फेफड़े के बीमार अधिक संख्या में देखे गए हैं।  वायु प्रदूषण से बचने के लिए कम चर्बी वाला दूध प्रतिदिन दो ग्लास पीना चाहिए।  इसका कारण यह है कि एसे दूध में फ़ास्फ़ोरस, मैनिज़ियम और कैल्शियम पाया जाता है जो विषैले पदार्थों के प्रभाव को समाप्त कर देता है और उन्हें मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकाल देता है।  लेड और इसी प्रकार से वातावरण में मौजूद अन्य हानिकारक पदार्थ शरीर के लिए लाभदायक जीवाणुओं की संख्या को ही कम कर देते हैं।  इसके लिए भी उचित उपचार दूध ही है।  दूध, इन विषैले पदार्थों को शरीर में अवशोषित होने से रोकता है।

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