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    सवेरे-सवेरे-21

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    मनुष्य जो भी करता है उसे अपने भविष्य को ही दृष्टि में रखकर करता है।  उसकी सोच सदैव ही भविष्य पर केन्द्रित होती है।  यही कारण है कि बहुत से लोग वर्तमान क्षणों से आनंद नहीं उठा पाते और न ही उसके मूल्य को समझ पाते हैं।  यही कारण है कि हम अपने दायित्वों का निर्वाह बोझ समझ कर करते हैं और स्वयं को थका हुआ समझते हैं एवं जीवन के बेरंग और उद्देश्यहीन होने का आभास करते रहते हैं।

     

    यदि हमको वर्तमान समय में जीवन आ जाए और हम यह समझकर काम करने लगें कि यह क्षण जो हम अभी व्यतीत कर रहे हैं वे कभी पलट कर नहीं आएंगे।  वह ऊर्जा जो ईश्वर ने हमारे शरीर में रख दी है, आने वाले दिनों में कम होती चली जाएगी।  हमें ईश्वर का आभार व्यक्त करते हुए इससे अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।  ऊर्जावान रहने की स्थिति मे अच्छे और कठिन कार्य करने चाहिए।  पढ़ाई करनी चाहए, कला सीखनी चाहिए और अपनी दिनचर्या को सुव्यवस्थित करना सीखना चाहिए।  जब बच्चे छोटे होते हैं तो रात को जागना पड़ता है।  इस बात पर थकान का आभास न करते हुए ग़ुस्सा और झुंझलाहट प्रकट करके यदि हम सोचें कि सभी माताओं को यह कार्य करना होता है और अपनी प्रिय संतान के लिए सब करने के कारण ही तो ईश्वर ने कहा है कि संतान का स्वर्ग माताओं के पैरों के तले होता है और सबसे बढ़कर यह कि यह समय बहुत जल्दी बीत जाएगा।  जब बच्चा बड़ा हो जाएगा तो उसे मांकी आवश्यकता कहां रह जाएगी? अतः इस समय के मूल्य को और उसकी मिठास को समझते हुए इससे आनंदित होना चाहिए।  रात को किसी भी कारणवश रोने वाला बच्चा जब प्रांत समय सुन्दर मुस्कान के साथ माता को देखता है तो उसकी सारी थकन उतर जाती है।

     

    यदि आप पिता हैं तो आप भी बच्चों के पालन-पोषण या दैनिक आवश्यकताओं के दृष्टिगत घर के कामों में हाथ बटाकर वर्तमान जीवन का स्वाद चखें और अपने वर्तमान को एसा बना दें कि सारे कामों के बाद किसी भी थकान का आभास न हो।

    वर्तमान समय के महत्व को समझने और उससे लाभ उठाने के लिए अपने ध्यान को केन्द्रित करना सीखें।  इसके लिए अभ्यास की आवश्यकता होती है।  इस अभ्यास के लिए मौन बहुत आवश्यक है।  मौन हमारी आवश्यकता का पोषण करता है और हमारे हृदय को स्वस्थ्य बनाता है।  मौन, हुल्लड़ हंगामे तथा आपके बीच एसा पर्दा खींच देता है जिससे आप स्वयं को अच्छी तरह पहचान सकते हैं।  मौन एसी शक्ति है जो आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचा सकती है।  इस स्थिति में आप अपनी आत्मा की आवाज़ को सुन सकते हैं।  मौन में बात को स्वीकार करने और किसी विषय विशेष पर ध्यान केन्द्रित करने का वातावरण उपलब्ध होता है।  जब चंचल मन किसी एक स्थान पर केन्द्रित हो जाता है तो मनुष्य शांति का आभास करने लगता है और यही वास्तविक जीवन है।

     

    दिन में सुस्ती और थकन से बचने के लिए हमें नाशते में ली जाने वाली चीज़ों पर ध्यान रखना चाहिए।  अर्थात सुपाच्य चीज़ें नाशते में लेनी चाहिए।  नाशता करने के बाद संभव है कि आप यह सोचें कि नाशता को कर ही लिया है इसलिए अब दोपहर का खाना खाने की कोई आवश्यकता नहीं है।  एसे में थोड़ा सा सलाद खाकर काम चल सकता है।  मनुष्य यह सोचता है कि एक तो इससे शरीर का भार बढ़ेगा और दूसरे अकारण समय नष्ट होगा।  वास्तव में इस प्रकार की सोच ग़लत और हानिकारक है।  दोपहर के खाने में यदि आप सलाद ही खाना चाहते हैं तो इसमें अंडा, उबला हुआ मुर्गी का मांस, उबली हुई लोबिया और मटर आदि का प्रयोग कर सकते हैं।  केवल सब्जियों पर आधारित सलाद में प्रोटीन नहीं होती और एसे में शाम तक आपके शरीर की ऊर्जा कम होने लगती है।

    सबसे अच्छा यह होगा कि आप पूरा खाना खाएं।  इस खाने में घी या तेल का प्रयोग अधिक नहीं होन चाहिए क्योंकि अधिक चिकने खाने, पाचन तंत्र में देर तक रूके रहते हैं और इससे पाचन क्रिया की गति धीमी पड़ जाती है।  इस ऊर्जा की मात्रा बहुत अधिक होती है परन्तु देर तक भरा हुआ अमाशय आपको सुस्त बना देता है।

     

    और अब कुछ उपायः  अब बात करते हैं धब्बे छुड़ाने की।  यह बात है तो छोटी किंतु कई बार बड़ी लाभदायक सिद्ध होती है।  यदि किसी कपड़े पर चिकनाई का धब्बा पड़ जाए और यह धब्बा अभी नया ही हो तो पहले उस चिकनाई को किसी चीज़ से हटाना चाहिए उसके बाद सफ़ेद अलकोहल में रूई भिगोकर धब्बे को साफ़ करना चाहिए।  यह धब्बा यदि पुराना हो गया हो तो उसपर थोड़ा मक्खन मल दें ताकि नया हो जाए।  उसके बाद इस धब्बे को बताई गई विधि से छुड़ाने का प्रयास करना चाहिए।  कपड़े पर यदि मोमबत्ती का मोम टपक गया हो तो काग़ज़ को कपड़े के नीचे और ऊपर दोनों ओर रखकर उसपर गर्म स्त्री फेर दें।  मोम का यह धब्बा यदि गहरा हो तो काग़ज़ बदल-बदल कर यही प्रक्रिया दोहराएं।  बाद में सफेद अलकोहल मे भीगी रूई से उसे साफ़ कर दें।

    यदि आपके साथ एसा होने लगे कि प्रतिदिन तीन-चार बजे से आपको  सुस्ती और थकन का आभास होने लगे तो आपको स्वयं से यह प्रश्न करने चाहिए।

    क्या मैंने सुबह का नाशता किया था?

     

    नाशते में क्या खाया था? नाशते में यदि एक कप चाय ली थी तो इसका तो हिसाब ही नहीं होगा और अर्थ यह निकलेगा कि आपने नाशता नहीं किया है।

    दोपहर के समय क्या खाया है? फ़ास्टफूड, समोसा, बिस्किट, दालमोट या एसा ही कुछ।  आपके उत्तर से पता चलेगा कि गड़बड़ कहां है?   नाशते के समय एक प्याली चाय या काफ़ी या फिर थोड़ी सी चाकलेट ले लेने से कार्य आरंभ करने भर की तो ऊर्जा मिल जाती है किंतु इससे आपको आवश्यक ऊर्जा प्राप्त नहीं हो सकती।

    दिन में सुस्ती और थकन का आभास न हो इसके लिए आपको पौष्टिक नाशता लेना होगा जैसे गेहूं और जौ आदि से तैयार की गई वस्तुएं।  यह रोटी भी हो सकती है और दलिया भी।

    कम चर्बी वाले दूध का प्रयोग अवश्य कीजिए।

     

    जो रोटी आप प्रयोग करें उसमें आटा बिना छना हुआ होना चाहिए।

    नाशते में अंडे, पनीर, मक्खन और इसी प्रकार की चीज़ों का प्रयोग, अपने स्वास्थ्य के दृष्टिगत करना चाहिए।  आजकल मूंगफली से बना हुआ मक्खन भी बाज़ार में उपलब्ध हैं।  इसे बच्चों और युवाओं के लिए बहुत ही ऊर्जादायक माना जा रहा है।

    इन चीज़ों के साथ ही कोई ताज़ा फल या एक ग्लास फल का रस अवश्य लेना चाहिए।

    पूरे दिन कार्य करने के लिए आपको कार्बोहाइड्रेटस की आवश्यकता होती है क्योंकि मस्तिष्क और मांसपेशियों को ऊर्जा पहुंचाने वाला असली ईंधन इसी से मिलता है परन्तु बिना प्रोटीन के इसका प्रभाव कम ही रहता है अतः कार्बोहाइट्रेड के साथ प्रोटीन का प्रयोग भी अवश्य करना चाहिए।  इससे मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और शरीर में भी अधिक शक्ति का आभास उत्पन्न होता है।

    प्रोटीन की प्राप्ति के लिए अंडे के अतिरिक्त रात में भीगे हुए चने, मसूर और उड़द क प्रयोग भी किया जा सकता है।

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