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    सितारा शिनास

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    हज़रत अमीरुल मोमिनीन अली इब्ने अबी तालिब अलैहिस्सलाम और उनके सिपाही घोड़ों पर सवार होकर नहरवान की तरफ़ रवाना होना ही चाहते थे कि अचानक असहाब में से एक अहम शख़्सियत वहाँ पहुची और अपने साथ एक शख़्स को लाई और कहा, या अमीरुल मोमिनीन ये शख़्स सितारा शिनास है, और आप की ख़िदमत में कुछ अर्ज़ करना चाहता है।

    सितारा शिनास ने अर्ज़ किया, या अमीरुल मोमिनीन आप इस वक़्त सफ़र न फ़रमाएं, कुछ देर ठहर जाएँ यहां तक कि दिन के दो तीन घन्टे गुज़र जाएं, उसके बाद तशरीफ़ ले जाईयेगा।

    हज़रत अली (अ.) ने फ़रमाया, क्यों? उसने जवाब दिया क्यों कि सितारों की कैफ़ियत ये बता रही है कि इस वक्त जो भी रवाना होगा दुश्मन के मुकाबले में शिकस्त से दो चार होगा। उसको और उसके साथियों को बहुत नुक़सान उठाना पड़ेगा। लेकिन उस वक़्त, जिसके लिए मैंने कहा है सफ़र फ़रमाएंगे तो फ़तहयाबी और अपने मकसद में कामयाब होंगे।

    इमाम अली (अ.) ने फ़रमाया, ये मेरी सवारी (घोड़ी) हामला है। क्या ये बता सकते हो कि इसका बच्चा नर है या मादा? उसने जवाब दिया, अगर हिसाब लगाऊँ तो बता सकता हूं।

    इमाम (अ.) ने फ़रमाया, तुम झूट बोल रहे हो, ये तुम्हारे लिए मुम्किन ही नहीं है क्योंकि कुरआन में लिख़ा है कि हर पोशिदा शय का इल्म ख़ुदा के अलावा किसी को नहीं और वो ख़ुदा ही है जिसे ये इल्म है कि रहम में परवरिश पाने वाला क्या है। हज़रत रसूले ख़ुदा ने भी कभी इस किस्म का दावा नहीं किया जो तू कर रहा है । क्या तू ये दावा करता है कि दुनिया के बारे में तुझे हर चीज़ का इल्म है। और तू यह जानता है कि किस वक़्त बुराई और किस वक़्त अच्छाई मुकद्दर में होती है, और अगर कोई तेरे इस इल्म पर एतेमाद व एतेकाद करे तो उसे ख़ुदा की ज़रूरत नहीं।                                                              उसके बाद हज़रत ने लोगों से ख़िताब फ़रमाया, ख़बरदार हरगिज़ इन चीज़ों के पीछे न जाना। इस से इन्सान जादूगर के मिस्ल हो जाता है और जादूगर काफ़िर के मानिन्द है और काफ़िर के लिए जहन्नम है। उसके बाद आपने आसमान की तरफ़ रुख़ करके चन्द जुमले दुआ के फ़रमाए जो कि ख़ुदा पर तवक्कुल और एतेमाद के सिलसिले में थे।

    फ़िर सितारा शिनास की तरफ़ रुख़ करके फ़रमाया, मैं ख़ास कर तेरे दस्तूर के ख़िलाफ़ अमल करूंगा और बगैर किसी ताख़िर के अभी रवाना होऊँगा।

    इसके फ़ौरन बाद आपने रवानगी का हुक्म दिया और दुश्मन की जानिब रवाना हुए। दूसरे और जिहाद के मुकाबले में इस जिहाद में अली (अ.) को बेहद ज़बरदस्त कामयाबी व कामरानी नसीब हुई।