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    सिनेमा की लोकप्रियता -1 (1)

    सिनेमा की लोकप्रियता -1 (1)
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    यदि हम विश्व में प्रचलित कलाओं को विभिन्न भागों में विभाजित करें तो सिनेमा सातवीं कला कहा जाएगा। चलचित्र की कलाएं विभिन्न कारणों के आधार पर सरलता से समझी जाती हैं और वह चित्रकला, साहित्य तथा संगीत की तुलना में अधिक लोकप्रिय और सामूहिक होती हैं। दूसरी ओर चूंकि सिनेमा एक उद्योग है इस लिए व्यापक स्तर पर फिल्म निर्माण, प्रदर्शन और मार्केटिंग इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण होता है और इन्ही विशेषताओं के कारण इसे लोकप्रियता भी प्राप्त है। सिनेमा संपर्क क्षेत्र में टीवी के बाद एक अत्याधिक महत्वपूर्ण साधन है और इसके प्रभाव को समाज और लोगों के मध्य अत्याधिक महत्व प्राप्त है और यही कारण है कि अन्य कलाओं की तुलना में अल्पावधि का होने के बावजूद उसका प्रभाव अत्याधिक गहरा और व्यापक होता है।

    सिनेमा अपने आरंभ और लोगों के मध्य जाने के साथ ही लोकप्रिय हो गया और लोगों ने उसका स्वागत करते हुए उसे बीसवीं शताब्दी तथा नगर संस्कृति का प्रतीक कहा । आरंभ में सिनेमा में विभिन्न प्रकार के चलचित्रों से लोगों को आश्चर्य चकित किया जाता था और उसका उद्देश्यी इसी पर सीमित था किंतु समय के साथ साथ उसके उद्देश्यों और उपयोगिता में भी व्यापकता आयी और सिनेमा किसी विशेष अर्थ, विचारधारा, इतिहास और ज्ञान विज्ञान को दूसरों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयोग किया जाने लगा और इसी प्रकार इसे प्रचार का एक प्रभावशाली साधन भी समझा जाने लगा। सिनेमा के लिए निर्धारित मूल्यों में बीसवीं शताब्दी में ही व्यापकता आना आरंभ हो गयी और इन मूल्यों को सिनेमा के साधन से लोगों तक पहुंचाने की शैलियां भी बदलती गयीं। यहां तक कि आज सिनेमा सामाजिक, राजनीतिक सांस्कृतिक और आर्थिक जैसे विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावशाली भूमिका रखता है।

    हर फिल्म को विभिन्न उद्देश्यों के लिए बनाया जाता है। कभी यह मनोरंजन का साधन होती है तो कभी भावनाओं और विचारों का वर्णन करने का काम इस से लिया जाता है और अधिकतर इसका उद्देश्य पूंजीनिवेश होता है। फिल्म विचारों और शैलियों को व्यवहारिक बनाने का एक साधन भी समझी जाती है किंतु सिनेमा की महत्वपूर्ण उपयोगिता को कला, संपर्क और उद्योग जैसे तीन भागों में बांटा जा सकता है। आर्ट  फिल्म में, फिल्म का ढांचा मज़बूत होता है और कहानी कलात्मक रूप में पेश की जाती है। इसमें विभिन्न दृश्यों का स्थान, रंग, आवाज़, एडिटिंग, फोटोग्राफी, सेट तथा समय पर पूरा ध्यान दिया जाता है और इसका पूरी फिल्म पर प्रभाव भी बहुत होता है।

    कमर्शियल फिल्मों में दर्शकों, राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों और बाज़ार की मांग पर काफी ध्यान दिया जाता है किंतु शायद यह कहना सही है कि फिल्म का सब से अधिक प्रभावशाली पहलु संपर्क होता है जिस पर सभी युगों और देशों में ध्यान दिया जाता है और विभिन्न सरकारों और संगठनों ने लगभग हर युग में अपना संदेश और विचार लोगों तक पहुंचाने के लिए फिल्म का सहारा लिया है। वैसे इस बात पर भी ध्यान रखना चाहिए कि फिल्म के यह तीनों क्षेत्र एक दूसरे से अत्याधिक जुड़े हुए हैं और इन की स्थिति एक सांस्कृतिक, आर्थिक व सामाजिक त्रिकोण के जैसी है।