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    सूरए आराफ़, आयतें 109-116, (कार्यक्रम 256)

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    आइये सूरए आराफ़ की आयत संख्या 109 और 110 की तिलावत सुनते हैं।قَالَ الْمَلَأُ مِنْ قَوْمِ فِرْعَوْنَ إِنَّ هَذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ (109) يُرِيدُ أَنْ يُخْرِجَكُمْ مِنْ أَرْضِكُمْ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ (110)फ़िरऔन की जाति के सरदारों ने कहाः निसंदेह मूसा बड़ा दक्ष जादूगर है। (7:109) वह (तुम्हारा शासन छीन कर) तुम्हें तुम्हारी धरती से निकालना चाहता है, तो तुम क्या आदेश देते हो? (7:110)इससे पहले हमने बताया था कि हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को ईश्वर की ओर से इस बात के लिए नियुक्त किया गया कि वे फ़िरऔन के पास जाएं और उसे ईश्वर की ओर आने का निमंत्रण देकर बनी इस्राईल को उसके चंगुल से रिहा कराएं। हज़रत मूसा ने अपनी पैग़म्बरी के दावे को सिद्ध करने के लिए कुछ ईश्वरीय चमत्कार दिखाए जिन्होंने फ़िरऔन और बनी इस्राईल को आश्चर्यचकित कर दिया।इन आयतों में हम पढ़ते हैं कि फ़िरऔन के मंत्रियों और सरदारों ने हज़रत मूसा के कथनों और चमत्कारों से लोगों के प्रभावित होने को रोकने के लिए उनके कामों को जादू और उन्हें एक बड़ा और दक्ष जादूगर बताया क्योंकि उस काल में जादू टोना बहुत अधिक प्रचलित था तथा लोग जानते थे कि जादूगर जो कुछ दिखाते हैं वो वास्तविक नहीं होता बल्कि वे एक प्रकार से लोगों को भ्रमित करते हैं।फ़िरऔन के लोगों ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के कार्यों को जादू बताने के अतिरिक्त यह भी कहा कि इन कार्यों से उनका लक्ष्य और उद्देश्य सत्ता और धन दौलत की प्राप्ति है। उन्होंने कहा कि वे तुम्हें सत्ता से हटाकर स्वयं गद्दी पर बैठना चाहते हैं ताकि बनी इस्राईल पर शासन करें और ऐसी स्थिति में इस देश मे हमारे लिए कोई स्थान नहीं रहेगा और हमें यहां से निकलना पड़ेगा। इस बात के दृष्टिगत उन्होंने एक दूसरे से कहा कि इस बारे में ख़ूब सोच विचार के पश्चात अपना दृष्टिकोण पेश करें।इन आयतों से हमने सीखा कि पैग़म्बरों के विरोधी उनके स्पष्ट तर्कों के मुक़ाबले में आरोप लगाने का हथकंडा प्रयोग करते हैं और द्वेष व हठधर्मी से काम लेते हैं।सत्ता लोलुपता तथा बुराई फैलाने के प्रयास, ऐसे आरोप हैं जो सत्तालोलुप शासक सत्य प्रेमियों पर लगाते हैं ताकि उन्हें उनके लक्ष्य तक न पहुंचने दें।आइये अब सूरए आराफ़ की आयत संख्या 111 और 112 की तिलावत सुनते हैं।قَالُوا أَرْجِهْ وَأَخَاهُ وَأَرْسِلْ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ (111) يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَاحِرٍ عَلِيمٍ (112)(फ़िरऔन के सरदारों ने) कहाः (हे फ़िरऔन!) मूसा और उनके भाई को जेल में डाल दो और हरकारों को, नगरों में जादूगरों को एकत्रित करने के लिए भेज दो, (7:111) ताकि वे हर जानकार और दक्ष जादूगर को तुम्हारे पास ले आएं। (7:112)फ़िरऔन के दरबार के सरदारों और प्रतिष्ठित लोगों ने एक दूसरे से परामर्श किया और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अभी मूसा की हत्या न की जाए बल्कि उन्हें झुठलाने के लिए जादूगरों से सहायता ली जाए। इसी के दृष्टिगत उन्होंने फ़िरऔन से कहा कि सभी नगरों के जादूगरों को एकत्रि होने का आदेश दो, और जब तक परिणाम सामने न आ जाए मूसा को दंडित करने में जल्दी मत करो।इन आयतों से हमने सीखा कि सत्य को समाप्त करने के लिए सत्तालोलुप और साम्राज्यवादी विभिन्न बैठकें करते रहते हैं।कभी कभी ज्ञान, दक्षता और कला को पथभ्रष्ट लोगों की सेवा और सत्य के मुक़ाबले के लिए प्रयोग किया जाता है।आइये अब सूरए आराफ़ की आयत संख्या 113 और 114 की तिलावत सुनते हैं।وَجَاءَ السَّحَرَةُ فِرْعَوْنَ قَالُوا إِنَّ لَنَا لَأَجْرًا إِنْ كُنَّا نَحْنُ الْغَالِبِينَ (113) قَالَ نَعَمْ وَإِنَّكُمْ لَمِنَ الْمُقَرَّبِينَ (114) और जादूगर फ़िरऔन के पास आ गए और उन्होंने कहा कि यदि हम विजयी हो गए तो क्या हमारे लिए कोई पारितोषिक है? (7:113) फ़िरऔन ने कहा कि हां, निसंदेह तुम मेरे निकटवर्ती हो जाओगे। (7:114)फ़िरऔन के निमंत्रण पर मिस्र के दूर और निकट के क्षेत्रों से सभी जादूगर उसके दरबार में एकत्रित हो गए। जब फ़िरऔन ने उन्हें बताया कि उन्हें क्या करना है तो उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा काम है और यदि हम मूसा को हरा देते हैं तो हमें पारितोषिक मिलना चाहिए। फ़िरऔन ने उन्हें विश्वास दिलाया कि यदि वे अपने काम में सफल रहे तो भौतिक पारितोषिक के अतिरिक्त उसके दरबार में भी उन्हें उच्च स्थान प्राप्त हो जाएगा और वे उसके निकटवर्ती बन जाएंगे।इन आयतों से हमने सीखा कि अन्य लोगों की भांति जादूगर भी अपने काम के बदले में मज़दूरी चाहते हैं परंतु लोगों को ईश्वर की ओर अमंत्रित करने के बदले में, पैग़म्बर, लोगों से कोई सांसारिक लाभ नहीं चाहते थे और यह उनकी विशेषताओं में से एक है।अत्याचारी शासक, सत्य के दमन के लिए ख़ूब पैसे ख़र्च करते हैं और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कलाकारों और विशेषज्ञों को धन का लोभ देते हैं।आइये अब सूरए आराफ़ की आयत संख्या 115 और 116 की तिलावत सुनते हैं।قَالُوا يَا مُوسَى إِمَّا أَنْ تُلْقِيَ وَإِمَّا أَنْ نَكُونَ نَحْنُ الْمُلْقِينَ (115) قَالَ أَلْقُوا فَلَمَّا أَلْقَوْا سَحَرُوا أَعْيُنَ النَّاسِ وَاسْتَرْهَبُوهُمْ وَجَاءُوا بِسِحْرٍ عَظِيمٍ (116)जादूगरों ने कहाः हे मूसा! पहले तुम (अपना साधन) फेंकोगे या हम फेंके? (7:115) मूसा ने कहाः तुम फेंको। तो जब उन्होंने (अपनी जादू की रस्सियां) फेंकी तो लोगों की आंखों पर जादू कर दिया और उन्हें आतंकित कर दिया और एक बहुत बड़े जादू का प्रदर्शन किया। (7:116)जब जादूगर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो गए तो फ़िरऔन ने लोगों को एकत्रित होने का आदेश दिया और एक बड़े मैदान में लोगों के बीच यह मुक़ाबला रखा। वो अपने विचार में इस प्रकार के मुक़ाबले द्वारा हज़रत मूसा को पराजित करके सदा के लिए उन्हें मंच से दूर कर देना चाहता था।उन्हें अपने काम पर इतना विश्वास था कि अपने इस कथन द्वारा वे हज़रत मूसा से यह कहना चाहते थे कि हर स्थिति में जीत हमारी ही होगी चाहे तुम पहले आरंभ करो या हम। परंतु हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने ईश्वर की शक्ति पर भरोसा करते हुए बड़े ही संतोष के साथ कहाः तुम लोग आरंभ करो। उन्होंने अपनी पूरी क्षमता और दक्षता का प्रयोग किया और एक मज़बूत नज़रबंदी द्वारा लोगों को अपने झूठे सांपों द्वारा आतंकित और भयभीत कर दिया।इन आयतों से हमने सीखा कि मनुष्य की इंद्रियों को धोखा हो सकता है संभव है कि वो वास्तविकताओं को उनके सही रूप में न देख सकें। जादूगर मनुष्य की इसी कमज़ोरी से लाभ उठाते हैं। ठीक उस मृणतृष्णा की भांति जिसे मनुष्य पानी समझता है।जादू टोना अंधविश्वास की बात नहीं है बल्कि यह मनुष्य के अस्तित्व पर प्रभाव डालता है। इसी लिए इसे इस्लाम में वर्जित किया गया है।