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    सूरए बक़रह; आयतें ६५-६९ (कार्यक्रम 32)

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    सूरए बक़रह की ६५वीं और ६६वीं आयतें इस प्रकार हैं।وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ الَّذِينَ اعْتَدَوْا مِنْكُمْ فِي السَّبْتِ فَقُلْنَا لَهُمْ كُونُوا قِرَدَةً خَاسِئِينَ (65) فَجَعَلْنَاهَا نَكَالًا لِمَا بَيْنَ يَدَيْهَا وَمَا خَلْفَهَا وَمَوْعِظَةً لِلْمُتَّقِينَ (66)हे बनी इस्राईल! निश्चय ही तुम्हें अपने उन लोगों का हाल मालूम ही है जिन्होंने शनिवार के दिन ईश्वरीय आदेशों का उल्लंघन किया। हम ने इस उल्लंघन के कारण उनसे कहा कि धिक्कारे हुए बंदरों की भांति हो जाओ। (2:65) फिर हमने इस घटना को उस काल तथा आने वाले समय के लोगों के लिए एक पाठ तथा डर रखने वाले लोगों के लिए नसीहत बनाया। (2:66) इन आयतों में बनी इस्राईल की एक अन्य घटना का उल्लेख किया गया है। ईश्वर ने शनिवार के दिन को उनके लिए काम से छुटटी का दिन घोषित किया था, परन्तु उनका एक गुट जो नदी के समीप जीवन व्यतीत करता था, एक प्रकार के बहाने द्वारा शनिवार को भी मछली का शिकार करता था। उन लोगों ने नदी के किनारे छोटे-२ हौज़ बना रखे थे और जब मछलियां उनमें आ जाती थीं तो वे उनका रास्ता बंद कर देते थे और रविवार को उन्हें हौज़ों में से पकड़ लेते और इस प्रकार वो ईश्वर के आदेश को तोड़ मरोड़ देते या परिवर्तित कर देते थे। ईश्वर ने उनकी इस दुष्टता और ईश्वरीय आदेशों के परिहास के कारण उनका चेहरा बदल दिया तथा मनुष्य से बंदर बना दिया ताकि उनके लिए दंड और अन्य लोगों के लिए सीख हो। अलबत्ता पशु, ईश्वर की दया से दूर नहीं हैं परन्तु मनुष्य का मानव स्तर से गिर कर पशुओं की श्रेणी में पहुंचना भी, ईश्वर के दरबार तथा उसकी दया से उसके दूर होने की निशानी है।सूरए बक़रह की ६७वीं आयत इस प्रकार है।وَإِذْ قَالَ مُوسَى لِقَوْمِهِ إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُكُمْ أَنْ تَذْبَحُوا بَقَرَةً قَالُوا أَتَتَّخِذُنَا هُزُوًا قَالَ أَعُوذُ بِاللَّهِ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْجَاهِلِينَ (67)और याद करो उस समय को जब मूसा ने अपनी जाति वालों से कहा कि ईश्वर ने तुम्हें आदेश दिया है कि तुम एक गाय ज़िब्ह करो, उन्होंने कहा कि क्या तुम हमारा परिहास कर रहे हो, मूसा ने कहा कि मैं ईश्वर से पनाह चाहता हूं कि मैं जाहिलों में से हो जाऊं। (2:67) बनी इस्राईल की गाय की घटना का सारांश, जिसके कारण इस सूरे का नाम सरए बक़रह रखा गया है, ६७ से ७३ तक की आयतों में उल्लेख किया गया है जो इस प्रकार है। बनी इस्राईल में एक ऐसा मृतक मिला जिसके हत्यारे के बारे में ज्ञात नहीं था कि कौन है। क़बीलों के बीच मतभेद उत्पन्न हो गया और हर गुट ने दूसरे गुट पर हत्या का आरोप लगाना आरंभ किया। फ़ैसले के लिए ये विषय हज़रत मूसा के पास ले जाया गया। चूंकि सामान्य मार्ग से इस समस्या का समाधान संभव नहीं था अतः हज़रत मूसा ने चमत्कार द्वारा समस्या का समाधान किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने आदेश दिया है कि तुम एक गाय ज़िब्ह करो और उसका एक टुकड़ा मृतक व्यक्ति के शरीर पर लगाओ तो वह जीवित हो उठेगा और अपने हत्यारे को परिचित करा देगा। उन्होंने ये सुनकर हज़रत मूसा से कहा कि क्या तुम हमारा परिहास कर रहे हो और इस प्रकार का समाधान बता रहे हो। परन्तु हज़रत मूसा ने कहा कि परिहास करना जाहिलों का कार्य है और ईश्वरीय दूत कभी ये काम नहीं करता, अगर तुम्हें हत्यारा चाहिए तो ये कार्य करो। ये आयत हमको सिखाती है कि यदि ईश्वरीय आदेश हमारी बुद्धि में न आए तो भी हमें उनका इन्कार नहीं करना चाहिए या उसे महत्त्वहीन नहीं समझना चाहिए। यद्यपि ईश्वर अपने विशेष ज्ञान द्वारा हज़रत मूसा को हत्यारे का नाम बता सकता था परन्तु गाए को ज़िब्ह करने का आदेश इस बात की निशानी है कि इस जाति में बछड़े की पूजा तथा गाए के प्रति श्रद्धा की भावना मौजूद थी तथा ईश्वर इस भावना को समाप्त करना चाहता था।सूरए बक़रह की ६८वीं आयत इस प्रकार है।قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّنْ لَنَا مَا هِيَ قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ لَا فَارِضٌ وَلَا بِكْرٌ عَوَانٌ بَيْنَ ذَلِكَ فَافْعَلُوا مَا تُؤْمَرُونَ (68)बनी इस्राईल ने हज़रत मूसा से कहा कि अपने पालनहार से कहो कि वो हमें स्पष्ट रूप से बता दे कि वो गाय कैसी हो? मूसा ने कहा, ईश्वर कहता है वो गाय न बूढ़ी हो और न बछिया, बल्कि इन दोनों के बीच की (पक्की आयु) की हो, तो जो कुछ तुम्हें आदेश दिया गया है उसको यथाशीघ्र पूरा करो। (2:68) जब बनी इस्राईल के लोग समझ गए कि गाय को ज़िब्ह करने का आदेश गंभीर है तो उन्होंने बहाना बनाना आरंभ कर दिया कि हम कैसी गाए को ज़िब्ह करें। शायद ये बहाने वास्तविक हत्यारे की ओर से लोगों को समझाए जा रहे थे कहीं ऐसा न हो कि उसे अपमानित होना पड़े और लोग उसे पहचान जाएं। यद्यपि प्रश्न, किसी विषय को समझने के लिए किया जाता है परन्तु बनी इस्राईल इस प्रकार के प्रश्न करके ईश्वर के आदेश के पालन से बचाना चाहते थे, उसे समझना नहीं चाहते थे। इसी कारण उन्होंने अपने प्रश्नों को अत्यंत अशिष्टता के साथ प्रस्तुत किया और कहा कि, हे मूसा तुम अपने ईश्वर से पूछो। मानो मूसा का ईश्वर और उनका ईश्वर अलग हो।अब सूरए बक़रह की ६९वीं आयत इस प्रकार है।قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّنْ لَنَا مَا لَوْنُهَا قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ صَفْرَاءُ فَاقِعٌ لَوْنُهَا تَسُرُّ النَّاظِرِينَ (69)बनी इस्राईल ने एक बार फिर कहाः हे मूसा अपने पालनहार से कहो कि वो हमें स्पष्ट रूप से बताए कि उस गाए का रंग क्या हो? मूसा ने कहाः ईश्वर कहता है, विशुद्ध पीले रंग की गाय जिसका रंग, देखने वालों को भला लगे। (2:69) यद्यपि गाए को ज़िब्ह करने का आदेश पुनः दिया गया परन्तु मानो वे यह कार्य नहीं करना चाहते थे अतः उन्होंने एक बार फिर एक नया प्रश्न किया कि उस गाए का रंग क्या हो? जबकि पहले तो आदेश में गाए के रंग की कोई भूमिका नहीं थी और दूसरे यदि आवश्यक होता तो पहले आदेश में ही उसका उल्लेख हो जाता। ईश्वर ने उस गाय के लिए पीले रंग का निर्धारण किया ताकि इस संबन्ध में उनके पास कोई बहाना न रहे और वो ये भी जान ले कि वो ईश्वर के आदेश से जिसे ज़िब्ह कर रहे हैं उसे बुरा और महत्वहीन नहीं होना चाहिए बल्कि स्वस्थ, बीच की आयु का और सुन्दर और आखों को भले लगने वाले रंग का होना चाहिए।इन आयतों से मिलने वाले पाठः ईश्वरीय आदेशों के पालन में हमें बहाने और धोके से काम नहीं लेना चाहिए तथा विदित रूप से धर्म के पालन के नाम पर, ईश्वरीय आदेशों के मूल तत्व को जो उस आदेश का आधार है, नहीं बदलना चाहिए क्योंकि धर्म के चेहरे को परिवर्तित करने से मानवता का चेहरा परिवर्तित हो जाता है जैसा कि शनिवार के दिन मछली पकड़ने वालों के साथ हुआ। ईश्वरीय दंड केवल प्रलय से विशेष नहीं है बल्कि ईश्वर कुछ पापों का दंड संसार में भी देता है ताकि उस काल व आने वाले समय के लोगों के लिए शिक्षा सामग्री रहे। ईश्वरीय आदेशों का परिहास नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें अतर्क व अकारण समझना चाहिए बल्कि ईश्वरीय आदेशों के समक्ष हमें पूर्ण रूप से नतमस्तक रहना चाहिए क्योंकि जो कुछ ईश्वर ने कहा है वह हमारी और मानव समाज की भलाई के लिए है। यद्यपि हत्यारे की खोज के लिए गाए का वध विदित रूप से लाभरहित दिखाई पड़ता है परन्तु यह कार्य बनी इस्राईल में गाय को ईश्वर का रूप समझकर गौपूजा की भावना को भी समाप्त करता है और ईश्वर की शक्ति को भी स्पष्ट करता है कि किस प्रकार वह एक मरे हुए जानवर के मांस के स्पर्श से, एक अन्य मरे हुए व्यक्ति को जीवित करता है।