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    सूरए बक़रह; आयतें 264-267 (कार्यक्रम 75)

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    सूरए बक़रह की आयत संख्या २६४ तथा २६५ इस प्रकार है।يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آَمَنُوا لَا تُبْطِلُوا صَدَقَاتِكُمْ بِالْمَنِّ وَالْأَذَى كَالَّذِي يُنْفِقُ مَالَهُ رِئَاءَ النَّاسِ وَلَا يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآَخِرِ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ صَفْوَانٍ عَلَيْهِ تُرَابٌ فَأَصَابَهُ وَابِلٌ فَتَرَكَهُ صَلْدًا لَا يَقْدِرُونَ عَلَى شَيْءٍ مِمَّا كَسَبُوا وَاللَّهُ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِرِينَ (264) وَمَثَلُ الَّذِينَ يُنْفِقُونَ أَمْوَالَهُمُ ابْتِغَاءَ مَرْضَاةِ اللَّهِ وَتَثْبِيتًا مِنْ أَنْفُسِهِمْ كَمَثَلِ جَنَّةٍ بِرَبْوَةٍ أَصَابَهَا وَابِلٌ فَآَتَتْ أُكُلَهَا ضِعْفَيْنِ فَإِنْ لَمْ يُصِبْهَا وَابِلٌ فَطَلٌّ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ (265)हे ईमान लाने वालो! अपने दान को जताकर और दुखी करके नष्ट न करो उस व्यक्ति की भांति कि जो लोगों को दिखाने के लिए दान देता है और अल्लाह तथा प्रलय पर ईमान नहीं रखता। उसका उदाहरण उस कठोर और समतल पत्थर की भांति है कि जिसपर मिट्टी की एक परत हो और जैसे ही तेज़ वर्षा हो तो चट्टान साफ़ हो जाती है। वह व्यक्ति अपने किए का कोई लाभ उठाने में सक्षम नहीं होता और ईश्वर, इन्कार करने वालों का मार्गदर्शन नहीं करता। (2:264) और उन लोगों का उदाहरण कि जो अल्लाह को प्रसन्न करने और अपनी आत्मा को दृढ़ करने के लिए दान करते हैं उस उद्यान की भांति होता है कि जो ऊंचे स्थान पर हो और सदैव वर्षा होती रहे जिससे उसमें दुगने फल हों और अगर भारी वर्षा न भी हो तो भी फुहार पड़ती रहे और तुम जो कुछ भी करते हो अल्लाह उससे अवगत है। (2:265) इन आयतों में लोगों को दान की ओर प्रोत्साहित करने के बाद सही दान और ग़लत दान दोनों को उदाहरण द्वारा स्पष्ट किया गया है। आयत में दिखावे के लिए दान करने वाले के काम का उदाहरण उस नर्म भूमि से दिया जाता है जिसके नीचे कठोर पत्थर होता है और जिसपर कुछ भी उगना संभव नहीं है। उसका दान भी हालांकि दूसरों के लिए लाभदायक होता है किंतु उसे उसका कोई लाभ नहीं प्राप्त होता और इसी प्रकार उन लोगों के दान का उदाहरण जो पवित्र भावना और मानव प्रेम के अन्तर्गत काम करते हैं उस बीज की भांति है जो ऊंची और उपजाऊ भूमि में बोया गया हो। वर्षा चाहे तेज़ हो या हल्की न केवल यह कि उस बीज को नहीं धोता बल्कि उसके कई गुना बढ़ने का कारण बन जाती है क्योंकि भूमि उपजाऊ होती है वर्षा का पानी भली भांति सोख लेती है और पौधे की जड़ें गहराई तक चली जाती हैं।इस आयत से मिलने वाले पाठःउस अच्छे काम का महत्व होता है जो पवित्र भावना के साथ किसा जाए और उसके बाद कोई ऐसा काम न किया जाए जिससे उस अच्छे काम को आघात पहुंचे।ईश्वर की प्रसन्नता अच्छी विशेषताओं को बढ़ाना आदि मानव सेवा के लिए सही भावनाए हैं।दिखावा और पाखण्ड, अल्लाह तथा प्रलय पर वास्तविक ईमान न रखने का चिन्ह है।सूरए बक़रह की आयत संख्या २६६ इस प्रकार है।أَيَوَدُّ أَحَدُكُمْ أَنْ تَكُونَ لَهُ جَنَّةٌ مِنْ نَخِيلٍ وَأَعْنَابٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ لَهُ فِيهَا مِنْ كُلِّ الثَّمَرَاتِ وَأَصَابَهُ الْكِبَرُ وَلَهُ ذُرِّيَّةٌ ضُعَفَاءُ فَأَصَابَهَا إِعْصَارٌ فِيهِ نَارٌ فَاحْتَرَقَتْ كَذَلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآَيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَ (266)क्या तुममें से कोई यह चाहता है कि उसके लिए खजूर और अंगूर का बाग़ हो जिसके नीचे से नहर बहती हो उसके लिए उसमें हर फल उपलब्ध हो और फिर वह बूढ़ा हो जाए और उसकी संतान भी कमज़ोर हों और आंधी आए और उस बाग़ में आग लग जाए। और अल्लाह इसी प्रकार निशानियों का तुम्हारे लिए वर्णन करता है कि शायद तुम चिंतन करो। (2:266) यह आयत उन लोगों के लिए एक उदाहरण देती है जो अच्छा काम करते हैं किंतु दिखावा करके या जताकर अपने अच्छे काम को प्रभावहीन कर देते हैं। निर्धन और आवश्यकता रखने वालों की सहायता करना समाज के बाग़ में एक वृक्ष लगाने की भांति है कि जिसके लिए अत्यधिक परिश्रम करना पड़ता है अगर इस काम को सतर्कता से न किया जाए तो यह वृक्ष घमण्ड और दिखावे जैसे रोगों का शिकार होकर बहुत जल्दी सूख जाएगा और फिर पश्चाताप के अतिरिक्त कुछ भी बाक़ी नहीं बचेगा। इतिहास में उल्लेख है कि पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने कहा है कि अल्लाह के नाम का जप करो कि हर जप के साथ स्वर्ग में तुम्हें एक वृक्ष प्रदान किया जाएगा। उपस्थित लोगों में से एक ने पूछाः तो फिर स्वर्ग में हमारे कई बाग़ होंगे। पैग़म्बर सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने कहा अलबत्ता लोग कभी उसी ज़बान से जिससे अल्लाह के नाम का जप किया है दूसरों की पीठ पीछे बुराई भी करते है कि जिसकी आग समस्त वृक्षों को भस्म कर देती है। बहरहाल प्रलय के दिन कि जब मनुष्य को अच्छे कर्म की आवश्यकता होगी यह देखना बहुत कठिन होगा कि हमारे अच्छे कर्मों को दिखावे और घमण्ड में नष्ट कर डाला है।इस आयत से मिलने वाले पाठःअच्छे काम हमें घमण्डी न बना दें। ऐसा भी हो सकता है कि हम अपने अच्छे कर्मो को दूसरे ग़लत काम करके नष्ट कर दें। बाग़ लगाने के बाद वृक्षों के बड़े होने और फल देने में वर्षों लग जाते हैं किंतु एक क्षण में लगने वाली आग सब कुछ भस्म कर देती है।सूरए बक़रह की आयत संख्या २६७ इस प्रकार है।يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آَمَنُوا أَنْفِقُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا كَسَبْتُمْ وَمِمَّا أَخْرَجْنَا لَكُمْ مِنَ الْأَرْضِ وَلَا تَيَمَّمُوا الْخَبِيثَ مِنْهُ تُنْفِقُونَ وَلَسْتُمْ بِآَخِذِيهِ إِلَّا أَنْ تُغْمِضُوا فِيهِ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌ (267)हे ईमान वालो! अपने कमाए हुए पवित्र धन और जो कुछ हमने धरती से तुम्हें प्रदान किया है, दान करो और अपवित्र और ग़लत धन के पीछे न जाओ कि तुम स्वयं उसे लेना पसंद नहीं करते सिवाए इसके कि उपेक्षा और अनदेखी से काम लो और जान लो कि अल्लाह, आवश्यकतामुक्त एवं प्रशंसनीय है। (2:267) मुसलमान सदैव ही पैग़म्बर सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम से यह पूछा करते थे कि निर्धनों को दान में क्या दिया जाना चाहिए। इस आयत में दान करने के लिए एक सामूहिक मानदंड बता दिया है कि पवित्र चीज़ें दान करो वह चाहे जो कुछ भी हो। चाहे धन-दौलत हो कि जो व्यापार या नौकरी से प्राप्त होता है या फिर खाद्य सामग्री या धरती से उगने वाली कोई अन्य वस्तु हो। महत्वपूर्ण बात यह है कि वह हलाल और पवित्र धन से हो और उचित हो ऐसा न हो कि जो कपड़ा या खाना फेंकने योग्य हो जाए उसे दान कर दिया जाए। जैसाकि पैग़म्बर सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के काल में मदीने में कुछ लोग अच्छी खजूरें स्वयं रखते थे और ख़राब तथा सूखी हुई खजूरें निर्धनों में बांट दिया करते थे। इस आयत में ऐसे ही लोगों की ओर संकेत के साथ पूछा गया है कि यदि कोई तुम्हें यह देता तो क्या तुम उसे स्वीकार कर लेते?इस आयत से मिलने वाले पाठःदान के समय निर्धनों के मान-सम्मान की सुरक्षा करनी चाहिए। बेकार और ख़राब चीज़ों का दान न यह कि कोई प्रभाव नहीं रखता बल्कि लेने वाले का अपमान करता है।दान करने का उद्देश्य कंजूसी से बचना है न कि फ़ालतू पड़ी हुई चीज़ों से छुटकारा प्राप्त करना।मनुष्य की अंतरात्मा, दूसरों के साथ उसके व्यवहार की सबसे अच्छी कसौटी है जो व्यवहार उसे अपने साथ नापसंद हो वही काम उसे दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए।