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    सूरए यूसुफ़, आयतें 41-43, (कार्यक्रम 386)

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    आइये अब सूरए यूसुफ़ की आयत संख्या 41 की तिलावत सुनते हैं।يَا صَاحِبَيِ السِّجْنِ أَمَّا أَحَدُكُمَا فَيَسْقِي رَبَّهُ خَمْرًا وَأَمَّا الْآَخَرُ فَيُصْلَبُ فَتَأْكُلُ الطَّيْرُ مِنْ رَأْسِهِ قُضِيَ الْأَمْرُ الَّذِي فِيهِ تَسْتَفْتِيَانِ (41)(यूसुफ़ ने कहा) हे मेरे बंदी साथियो! तुम में से एक तो (रिहा होकर) अपने स्वामी को मदिरापान कराएगा और दूसरे को सूली पर चढ़ा दिया जाएगा और पक्षी उसका सिर खा जाएंगे। जिस बारे में तुमने मुझ से पूछा था उसका फ़ैसला हो चुका है और निश्चित ही वह होकर रहेगा। (12:41)पिछले कार्यक्रम में हमने कहा था कि हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने अपने बंदी साथियों के सपनों की व्याख्या से पूर्व अवसर से लाभ उठाते हुए उन्हें एकेश्वरवाद की ओर निमंत्रित किया। इसके पश्चात वे उनके सपनों की व्याख्या करते हुए कहते हैं कि जिसने स्वप्न में यह देखा कि वह शराब बना रहा है वह रिहा होगा और इसी कार्य में व्यस्त रहेगा और जिसने यह देखा था कि पक्षी उसके सिर पर मौजूद रोटियों में से खा रहे हैं वह सूली पर लटकाया जाएगा और इतने दिनों तक सूली पर लटका रहेगा कि पक्षी उसका सिर खा जाएंगे और यह बात अटल है और हो कर ही रहेगी।इस घटना से पता चलता है कि कभी कभी अनेकेश्वरवादी भी ऐसे स्वप्न देखते हैं जो सच्चे होते हैं और व्यवहारिक होते हैं।इस आयत से हमने सीखा कि कुछ सपने ऐसी वास्तविकताओं को दर्शाते हैं जो भविष्य में घटने वाली होती हैं और जो सपनों की सही व्याख्या कर सकता है वह वास्तविकता बता सकता है चाहे वह कुछ लोगों के लिए अप्रिय ही क्यों न हो।ईश्वर के प्रिय बंदे बिना सोचे समझे और अटकल व अनुमान लगाकर बात नहीं करते बल्कि वे अनन्य ईश्वर की ओर से प्रदान किए गए ज्ञान के आधार पर बात करते हैं।आइये अब सूरए यूसुफ़ की आयत संख्या 42 की तिलावत सुनते हैं।وَقَالَ لِلَّذِي ظَنَّ أَنَّهُ نَاجٍ مِنْهُمَا اذْكُرْنِي عِنْدَ رَبِّكَ فَأَنْسَاهُ الشَّيْطَانُ ذِكْرَ رَبِّهِ فَلَبِثَ فِي السِّجْنِ بِضْعَ سِنِينَ (42)और (यूसुफ़ ने) उन दोनों में से जिसके बारे में वे जानते थे कि वह रिहा होगा, उससे कहा कि अपने स्वामी के समक्ष मेरी बात करना किन्तु शैतान ने उसे यह बात भुलवा दी कि वह अपने स्वामी के समक्ष यूसुफ़ की बात करता, तो वे कई वर्षों तक कारावास में रहे। (12:42)हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के साथी बंदियों के सपनों की व्याख्या के पश्चात उन्होंने रिहा होने वाले बंदी से कहा कि मिस्र के शासक के समक्ष मेरे विषय पर बात करना, चूंकि मुझे निर्दोष होने के बावजूद बंदी बने हुए काफ़ी समय बीत चुका है अतः शायद वह मुझे रिहा करने पर तैयार हो जाए। किन्तु वह व्यक्ति रिहा होने के बाद यह बात भूल गया जिसके परिणाम स्वरूप हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को अन्य सात वर्षों तक कारावास में रहना पड़ा।रोचक बात यह है कि इस आयत में भूलने को कि जो स्वाभाविक बात है, शैतानी कार्य बताया गया है, मानो जब शैतान किसी अनेकेश्वरवादी पर वर्चस्व जमाता है तो उसकी बुद्धि और स्मरण शक्ति पर नियंत्रण कर लेता है, इस प्रकार से कि मनुष्य वह बातें भूल जाता है जिन्हें शैतान उसे भुलवाना चाहता है किन्तु ईश्वर के प्रिय व पवित्र बंदों के संबंध में ऐसा नहीं होता और वे कभी कोई बात नहीं भूलते क्योंकि शैतान उन पर वर्चस्व नहीं जमा सकता।इस आयत से हमने सीखा कि अपने अधिकार की प्राप्ति और अत्याचार की समाप्ति के लिए दूसरों से निवेदन करना एक स्वाभाविक बात है किन्तु ईश्वर के प्रिय बंदों को सबसे पहले ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए।पवित्र लोगों का बंदी बनना शैतान और शैतान रूपी लोगों की इच्छा होती है तथा पवित्र लोगों पर से आरोपों का हटना शैतान और उसके अनुयाइयों के मार्ग से मेल नहीं खाता।आइये अब सूरए यूसुफ़ की आयत संख्या 43 की तिलावत सुनते हैं।وَقَالَ الْمَلِكُ إِنِّي أَرَى سَبْعَ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعَ سُنْبُلَاتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَاتٍ يَا أَيُّهَا الْمَلَأُ أَفْتُونِي فِي رُؤْيَايَ إِنْ كُنْتُمْ لِلرُّؤْيَا تَعْبُرُونَ (43)और (मिस्र) के शासक ने कहा कि मैंने सपने में देखा है कि सात दुर्बल गायें, सात मोटी गायों को खा रही हैं और इसी प्रकार मैंने अनाज की सात हरी और सात सूखी बालियों को देखा है। हे मेरे सरदारो! यदि तुम स्वप्न की व्याख्या करते हो तो मुझे स्वप्न का अर्थ बताओ। (12:43)हज़रत यूसुफ़ की घटना के आरंभ से अब तक तीन स्वप्न सामने आए हैं, एक हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम का स्वप्न और दो उनके साथी बंदियों के सपने, अलबत्ता अभी तक हज़रत यूसुफ़ का स्वप्न व्यवहारिक नहीं हुआ है।इस आयत में मिस्र के शासक के सपने का इस प्रकार वर्णन किया गया है कि वह सात मोटी गायों के साथ साथ हरी बालियां देखता है और सात दुर्बल गायों के साथ साथ सूखी बालियों को देखता है। यद्यपि वह जानता है कि कोई महत्त्वपूर्ण घटना घटने वाली है किन्तु उसे और उसके दरबारियों को इस सपने का अर्थ ज्ञात नहीं हो पाता अतः चिंतित हो जाता है कि कहीं ऐसा न हो कि सत्ता उसके हाथ से निकल जाए।इस आयत से हमने सीखा कि सपनों में सभी वस्तुओं और पशुओं का एक विशेष अर्थ होता है और वे किसी न किसी बात के प्रतीक होते हैं जैसे दुर्बल गाय, अकाल का प्रतीक जबकि मोटी गाय संपन्नता की निशानी होती है।हर कोई सपनों की व्याख्या नहीं कर सकता, सपनों का अर्थ जानने के लिए दक्ष लोगों से संपर्क करना चाहिए।