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    सूरए यूसुफ़, आयतें 44-49, (कार्यक्रम 387)

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    आइये अब सूरए यूसुफ़ की आयत संख्या 44 और 45 की तिलावत सुनते हैं।قَالُوا أَضْغَاثُ أَحْلَامٍ وَمَا نَحْنُ بِتَأْوِيلِ الْأَحْلَامِ بِعَالِمِينَ (44) وَقَالَ الَّذِي نَجَا مِنْهُمَا وَادَّكَرَ بَعْدَ أُمَّةٍ أَنَا أُنَبِّئُكُمْ بِتَأْوِيلِهِ فَأَرْسِلُونِ (45)(मिस्र के शासक के दरबारियों ने) कहा, ये तो बिखरे हुए स्वप्न हैं और हम ऐसे सपनों की व्याख्या से अवगत नहीं हैं। (12:44) और उन दोनों में से जो रिहा हो गया था उसे कुछ समय बाद (यूसुफ़ की) याद आई उसने कहा कि मैं तुम्हें इस स्वप्न की व्याख्या बता सकता हूं तो मुझे (यूसुफ़ के पास) भेज दो। (12:45)पिछले कार्यक्रम में हमने कहा था कि मिस्र के शासक ने एक विचित्र स्वप्न देखा कि कुछ मोटी गायों को दुर्बल गायें खा रही हैं। उसने अपने दरबार के दक्ष लोगों से कहा कि वे उसके स्वप्न की व्याख्या करें।ये आयतें कहती हैं कि दरबार वालों ने शासक के सपने को एक बिखरा हुआ सपना बताया कि जिसकी व्याख्या का कोई लाभ नहीं है। किन्तु वह व्यक्ति जो कारावास में हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के साथ था और उन्होंने उसके स्वप्न की सही व्याख्या की थी, उसे याद आया कि उसने उन्हें वचन दिया था कि वह शासक के सामने उनकी बात करेगा। अतः उसने शासक से कहा कि वह उसे कारावास में हज़रत यूसुफ़ के पास भेज दे ताकि वह उसके स्वप्न की व्याख्या करें।इन आयतों से हमने सीखा कि केवल ईश्वर के प्रिय बंदे ही सच्चे सपने नहीं देखते, संभव है कि कोई अत्याचारी शासक भी ऐसा स्वप्न देखे जो आगे चलकर सच्चा सिद्ध हो।दक्ष और विशेषज्ञ लोगों को जो एकांत में रहते हैं संसार के सामने लाना चाहिए ताकि लोग उनसे लाभ उठा सकें।आइये अब सूरए यूसुफ़ की आयत संख्या 46 और 47 की तिलावत सुनते हैं।يُوسُفُ أَيُّهَا الصِّدِّيقُ أَفْتِنَا فِي سَبْعِ بَقَرَاتٍ سِمَانٍ يَأْكُلُهُنَّ سَبْعٌ عِجَافٌ وَسَبْعِ سُنْبُلَاتٍ خُضْرٍ وَأُخَرَ يَابِسَاتٍ لَعَلِّي أَرْجِعُ إِلَى النَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَعْلَمُونَ (46) قَالَ تَزْرَعُونَ سَبْعَ سِنِينَ دَأَبًا فَمَا حَصَدْتُمْ فَذَرُوهُ فِي سُنْبُلِهِ إِلَّا قَلِيلًا مِمَّا تَأْكُلُونَ (47)(उसने) कहा, यूसुफ़! हे सच्चे पुरुष! हमें इस सपने का अर्थ बताओ कि सात मोटी गायों को सात दुर्बल गायें खा रही हैं और सात बालिया हरी हैं और सात बालिया सूखी हैं। ताकि जब मैं वापस लौटकर लोगों के पास जाऊं तो शायद वे भी सपने की व्याख्या को जान जाएं। (12:46) यूसुफ़ ने कहा कि निरंतर सात वर्षों तक खेती बाड़ी करते रहो तो जो कुछ तुम काटो, अपने खाने के थोड़े से भाग के अतिरिक्त सभी दानों को उनकी बालियों में ही रहने देना। (12:47)हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने जो काम किया उससे उनकी महानता पूर्ण रूप से स्पष्ट है। उन्होंने अपने बंदी साथी से यह नहीं कहा कि क्यों तुम मुझे भूल गए थे और अब मेरे पास क्यों आए हो। इसी प्रकार उन्होंने यह भी नहीं कहा कि मैं शासक के स्वप्न की व्याख्या उसी समय करूंगा जब वह मुझे कारावास से रिहा कर देगा। उन्होंने बिना किसी शर्त के तुरंत ही न केवल यह कि स्वप्न की व्याख्या कर दी बल्कि अकाल से बचने का मार्ग भी बता दिया ताकि लोगों को अधिक कठिनाई न हो। इससे हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के ज्ञान व संचालन शक्ति का पता चलता है।इस आयत में हज़रत यूसुफ़ को सिद्दीक़ अर्थात अत्याधिक सच्चा व्यक्ति कहा गया है अर्थात ऐसा व्यक्ति जिसकी करनी उसकी कथनी की पुष्टि करती है। ऐसे अनेक लोगों के विपरीत जिनकी करनी उनकी कथनी से समन्वित नहीं होती बल्कि अधिकांश अवसरों पर उनकी कथनी और करनी में विरोधाभास होता है। अलबत्ता हज़रत यूसुफ़ के अतिरिक्त हज़रत इब्राहीम और हज़रत इदरीस को भी क़ुरआने मजीद में अत्याधिक सच्चा कहा गया है। पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैह व आलेही व सल्लम ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को भी सिद्दीक़ की उपाधि प्रदान की थी।इन आयतों से हमने सीखा कि सरकारों को समस्याओं और संकटों की समाप्ति के लिए समाज के विद्वानों और दक्ष लोगों से लाभ उठाना चाहिए।भविष्य के लिए कार्यक्रम बनाना और आर्थिक संकटों से निपटने की तैयारी करना, सरकारों के मुख्य दायित्वों में से एक है।ईश्वर के प्रिय बंदे अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के बारे में विचार करने से पूर्व सामाजिक कठिनाइयों की समाप्ति और लोगों के कल्याण के बारे में सोचते हैं।आइये अब सूरए यूसुफ़ की आयत संख्या 48 और 49 की तिलावत सुनते हैं।ثُمَّ يَأْتِي مِنْ بَعْدِ ذَلِكَ سَبْعٌ شِدَادٌ يَأْكُلْنَ مَا قَدَّمْتُمْ لَهُنَّ إِلَّا قَلِيلًا مِمَّا تُحْصِنُونَ (48) ثُمَّ يَأْتِي مِنْ بَعْدِ ذَلِكَ عَامٌ فِيهِ يُغَاثُ النَّاسُ وَفِيهِ يَعْصِرُونَ (49)फिर इसके बाद सात वर्ष बड़े कठिन आएंगे और जो कुछ तुमने उनके लिए इकट्ठा कर रखा होगा वह खा जाएंगे सिवाय उस थोड़े से भाग के जो तुम बीज डालने के लिए बचाए रखते हो। (12:48) फिर उसके बाद एक वर्ष ऐसा आएगा जिसमें लोगों के लिए भरपूर वर्षा होगी और उसमें वे फलों के रस निचोड़ेंगे। (12:49)हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने मिस्र के शासक के सपने की पूर्ण रूप से व्याख्या की और कहा कि सात वर्षों तक अच्छी वर्षा होगी और इन वर्षों में जो कुछ तुम उगाओ उसमें से बहुत थोड़ा खाओ और बाक़ी सब सुरक्षित रखते जाओ। इसके बाद के सात वर्षों में अकाल पड़ेगा और जो कुछ तुमने पहले एकत्रित किया था उसमें से खाओ और अगले वर्ष की खेती बाड़ी के लिए थोड़ा बीज व अनाज सुरक्षित रखो। उसके बाद एक वर्ष ऐसा होगा जिसमें भरपूर वर्षा होगी और इतनी संपन्नता आएगी कि लोग फलों का रस निचोड़ेंगे और उससे लाभ उठाएंगे।इन आयतों से हमने सीखा कि विशेष परिस्थितियों के लिए खाद्य सामग्री के भंडारण की सिफ़ारिश की गई है और यह बात ईश्वर पर भरोसे से विरोधाभास नहीं रखती।मौसम तथा वर्षा का पूर्वानुमान, ऋतु के कार्यक्रमों के लिए एक लाभदायक बात है और इससे लाभ उठाया जाना चाहिए।