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    सृष्टि, ईश्वर और धर्म 41 ईश्वर और उसके दूत

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    वास्तव में ईश्वरीय दूत ही मनुष्य द्वारा ईश्वर की पहचान में मुख्य सहायक होते हैं इस लिए ईश्वरीय दूतों की पहचान वास्तव में ईश्वर की पहचान का एक भाग है। इस से पहले इस श्रंखला के आरंभ में हम विस्तार से इस बात पर चर्चा कर चुके हैं कि बुद्धि रखने वाले मनुष्य के सामने अपने लोक- परलोक सृष्टि और इसी प्रकार के ढ़ेर सारे विषयों के बारे में बहुत से प्रश्न आते हैं किंतु उनमें से कुछ प्रश्नों का उत्तर पाना हर बुद्धिमान मनुष्य के लिए आवश्यक होता है और यदि कोई स्वस्थ बुद्धि रखता होगा तो उसके मन में कुछ प्रश्न अवश्य उठेंगे और जब तक उसे उन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलेगा तब तक उसके मन को शांति भी नहीं प्राप्त होगी।इस प्रकार के प्रश्नों में से कुछ प्रश्न यह हो सकते हैंसंसार और मनुष्य के अस्तित्व का मूल स्रोत किया है? और उनका संचालन व निर्देशन किस के हाथ में है? यदि वास्तविक सफलता व कल्याण तक पहुंचने के लिए जीवन के सही मार्ग की पहचान आवश्यक है तो सही मार्ग की पहचान कैसे होगी? क्या इसके लिए कोई विश्वस्त साधन है? उस मार्ग तक पंहुचाने वाला कोई भरोसेमंद सहारा है? यदि है तो किस के पास है? इन प्रश्नों का उत्तर धर्म के तीन मूल सिद्धान्तों में निहित है और वह तीन मूल सिद्धान्त एकेश्वरवाद, प्रलय और ईश्वरीय दूतों के आगमन पर विश्वास है। इस श्रंखला के आरंभ में यदि आप को याद हो तो हमने ईश्वर की पहचान पर चर्चा की और चर्चा के दौरान हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि हर वस्तु का मूल स्रोत इस संसार का रचयिता और पालनहार है और सब कुछ उसके नियंत्रण व तत्वज्ञान के अंतर्गत चल रहा है और इस सृष्टि की कोई भी वस्तु किसी भी स्थान में किसी भी स्थिति में किसी भी तरह से ईश्वर से आवश्यकतामुक्त नहीं हो सकती। हमने अब तक की चर्चा में यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि इस संसार का कोई रचयिता है इसके साथ ही उस रचयिता की कुछ विशेषताओं का भी वर्णन किया और इसके लिए केवल बौद्धिक तर्कों का ही सहारा लिया गया किंतु जब बौद्धिक तर्कों से ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो गया है अर्थात यदि हमने मान लिया है कि इस संसार का स्वामी एक अनन्त शक्ति स्रोत व आवश्यकता मुक्त अस्तित्व है और उसका अस्तित्व ऐसा है जिसके आयामों को पूरी तरह से समझना असंभव है किंतु उसके चिन्हों और लक्षणों से उसकी विशेषताओं के कुछ भागों को समझा जा सकता है तो अब इस चरण की वार्ता में हम कुछ बातें उसके हवाले से कर सकते हैं अर्थात बौद्धिक तर्कों के साथ ही साथ ईश्वर के कुछ आदेशों का भी हवाला दे सकते हैं।

    अब हम जो चर्चा आरंभ करने जा रहे हैं उसका उद्देश्य इस बात को सिद्ध करना है कि सृष्टि की वास्तविकता और जीवन के सही मार्ग की पहचान के लिए बोध व बुद्धि के अतिरिक्त भी कुछ अन्य साधन मौजूद हैं जो इतने विश्वस्नीय हैं कि उनसे गलती करने की संभावना नहीं है। यहां पर यह भी बताते चलें कि आज के कार्यक्रम में हम जो भी चर्चा करेंगे वह वास्तव में भूमिका होगी इस लिए ध्यान से पढ़ें क्योंकि हो सकता है कि हमारी बात टुकड़े- टुकड़े में लगे किंतु अगली चर्चाओं में इन विषयों का ज्ञान आवश्यक है जिनका हम अपनी आज की चर्चा में वर्णन कर रहे हैं। वह साधन जो जिसमें गलती की कोई संभावना नहीं है ईश्वरीय संदेश है। ईश्वरीय संदेश अर्थात एक प्रकार से ईश्वरीय शिक्षा है जो ईश्वर के कुछ चुने हुए दासों से विशेष होती है और साधारण लोगों को उसकी वास्तविकता का ज्ञान नहीं होता क्योंकि इस प्रकार की ईश्वरीय शिक्षाओं का कोई चिन्ह उनके भीतर नहीं होता अलबत्ता साधारण लोग भी इस बात पर सक्षम होते हैं कि जब कोई यह दावा करे कि उसके पास ईश्वरीय संदेश आते हैं तो आवश्यक चिन्हों और लक्षणों से इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि ईश्वरीय संदेश का पात्र होने का दावा करने वाला सच बोल रहा है या नहीं।

    स्वाभाविक रूप से यदि साधारण लोगों के लिए यह सिद्ध हो जाए कि किसी के पास ईश्वरीय संदेश आते हैं और वह संदेश दूसरों तक भी पहुंचे तो फिर उस संदेश को स्वीकार करना आवश्यक होगा और उसका विरोध करना किसी के लिए सही नहीं होगा। इस प्रकार इस चर्चा के मूल विषय इस से प्रकार होंगेः ईश्वरीय दूतों के धरती पर आने की आवश्यकता क्यों है? ईश्वर से संदेश प्राप्त करने के बाद और लोगों तक उसे पहुंचाने से पूर्व ईश्वरीय संदेशों में फेर बदल नहीं हो सकती, अर्थात ईश्वरीय दूत ग़लती या भूल से सुरक्षित होता है और इसी प्रकार इस बात पर भी चर्चा करेंगे कि यह कैसे सिद्ध होगा कि कौन ईश्वरीय दूत है और कौन झूठ बोल रहा है।

    जब हम इस बात पर चर्चा कर लेंगे कि ईश्वर के संदेशों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ईश्वरीय दूतों की आवश्यकता है तो फिर इस बात पर चर्चा करेंगें कि ईश्वरीय दूत इतिहास में कौन लोग रहे हैं और अंतिम दूत है? और अंतिम दूत के बाद लोगों के मार्गदर्शन का दायित्व किस पर है? इन सब बातों को लेकर हमारी चर्चा आरंभ हो चुकी है किंतु आज की चर्चा अगली चर्चाओं की भूमिका थी।