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    सृष्टि ईश्वर और धर्म ५५-1

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    संसार में घटने वाली सभी घटनाएं कुछ कारकों के अंतर्गत होती हैं किंतु हर कारक का पता प्रयोगशालाओं में नहीं लगाया जा सकता बल्कि कुछ काम ऐसे भी होते हैं जिनके कारकों का पता लगाना असंभव लगता है। इस प्रकार के कार्यों को असाधारण कार्य कहा जाता है।

    असाधारण कार्य यदि ऐसा हो जिसकी क्षमता प्राप्त की जा सके जैसे जादू-टोना तो वह असाधारण होने के बावजूद मोजिज़ा या ईश्वरीय दूतों की सत्यता प्रमाणित करने वाला चमत्कार कभी नहीं होगा।

    ईश्वरीय दूतों की सत्यता प्रमाणित करने वाला असाधारण कार्य वह होता है जो ईश्वर की विशेष अनुमति से हो और जिसे सीखा या सिखाया न जा सके तथा जिसपर कोई अन्य शक्ति अपना प्रभाव न डाल सके। पाठकों इसी विषय को आगे बढ़ाते हैं। मोजिज़े के संदर्भ में कुछ शंकाएं प्रस्तुत की जाती हैं जिनमें कुछ का यहां पर हम वर्णन और उनका निवारण प्रस्तुत कर रहे हैं। पहली शंका यह पेश की जाती है कि हर भौतिक प्रक्रिया के लिए विशेष कारक की आवश्यकता होती है जिसे वैज्ञानिक प्रयोगों द्वारा समझा जा सकता है अब यदि कोई ऐसी प्रक्रिया नज़र आए जिसके कारक का ज्ञान न हो तो उसे असाधारण प्रक्रिया उसी समय तक कहा जा सकता है जबतक उसके कारक का पता न चला हो किंतु कारक का ज्ञान न होना इस अर्थ में नहीं है कि उसका कोई कारक ही नहीं क्योंकि यदि हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि मोजिज़ा या चमत्कार के कारक का कभी पता ही नहीं लगाया जा सकता है तो इसका अर्थ यह होगा कि हम कारक व परिणाम के मूल सिद्धांत का इन्कार कर रहे हैं। अर्थात इस शंका के अंतर्गत यह कहा जाता है कि मोजिज़ा या चमत्कार इसलिए असाधारण होता है क्योंकि उसके कारक का ज्ञान नहीं होता किंतु जब भौतिक प्रयोगों द्वारा उसके कारक का ज्ञान हो जाए तो फिर व मोजिज़ा या चमत्कार नहीं रह जाता।

    इस शंका का उत्तर इस प्रकार दिया जा सकता है कि कारक व परिणाम के सिद्धान्त का अर्थ केवल यह होता है कि हर प्रक्रिया व परिणाम के लिए एक कारक की आवश्यकता होती है किंतु इसका अर्थ कदापि यह नहीं है कि निश्चित रूप से उस कारक का ज्ञान होना भी आवश्यक है। अर्थात यदि हम यह कहें कि चमत्कार या असाधारण कार्य के कारण को प्रयोगशालाओं में पहचाना नहीं जा सकता तो यह बात कारक व परिणाम के सिद्धान्त के विरुद्ध नहीं होगी क्योंकि यह तार्किक सिद्धान्त है कि किसी विषय का ज्ञान न होने का अर्थ यह नहीं है कि उसका अस्तित्व ही नहीं है। यूं भी प्रयोगशाला में केवल भौतिक कारकों का ही पता लगाया जा सकता है किंतु भौतिकता से परे विषयों का ज्ञान किसी भी प्रकार से प्रयोगशालाओं में प्रयोग द्वारा नहीं समझा जा सकता।

    इसके अतिरिक्त मोजिज़े या चमत्कार के बारे में यह भी कहना सही नहीं है कि वह उसी समय तक चमत्कार रहेगा जब तक उसके कारकों का ज्ञान न हो क्योंकि यदि उन कारकों को भौतिक साधनों से पहचानना संभव होता तो फिर वह असाधारण कार्य भी सामान्य व साधारण भौतिक प्रक्रियाओं की भांति होते और उसे किसी भी स्थिति में असाधारण कार्य नहीं कहा जा सकता और यदि उसके कारकों का ज्ञान असाधारण रूप से हो तो फिर वह भी मोजिज़ा होगा।

    मोजिज़े या चमत्कार पर एक शंका यह की जाती है कि पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स) लोगों द्वारा मोजिज़े और चमत्कार दिखाने की मांगों को प्रायः अस्वीकार कर दिया करते थे तो यदि मोजिज़ा और चमत्कार पैग़म्बरी सिद्ध करने का साधन है कि तो वे ऐसा क्यों करते थे?

    इस शंका के उत्तर में हम यह कहेंगे कि वास्तव में बहुत से ऐसे लोग थे जो पैग़म्बरे इस्लाम (स) द्वारा मोजिज़े के प्रदर्शन और हर प्रकार से अपनी पैग़म्बरी के प्रमाण प्रस्तुत किये जाने के बाद भी बार-बार मोजिज़े और चमत्कार की मांग करते थे और उनमें ज्ञान और विश्वास प्राप्त करने की भावना नहीं होती थी इसीलिए यह कदापि आवश्यक नहीं है कि हर ईश्वरीय दूत लोगों की मांगों पर किसी बाज़ीगर की भांति चमत्कार दिखाने लगे बल्कि जब आवश्यक होता है तब ईश्वरीय दूत चमत्कार दिखाता है। इसीलिए यदि हम आज के युग में कोई असाधारण काम देखें तो उसे मोजिज़ा या चमत्कार उस अर्थ में नहीं कह सकते। इन बातों का वर्णन हमने अपनी आज की और पिछली चर्चाओं में की है।

    वास्तव में मोजिज़ा पैग़म्बरों की पैग़म्बरी सिद्ध करने का साधन होता है और अतीत के जिन ईश्वरीय दूतों ने मोजिज़ा या विशेष अर्थ में चमत्कार का प्रदर्शन किया है वह उनके समाज की परिस्थितयों के अनुकूल रहे हैं उदाहरण स्वरूप हज़रत मूसा, जिन्हें यहूदी, ईसाई और मुसलमान ईश्वरीय दूत मानते हैं जिस काल में थे उसमें जादू का अत्याधिक चलन था और उन्हें पराजित करने के लिए मिस्र के शासक फ़िरऔन ने, जिसके बनवाए हुए पिरामिड आज भी लोगों के आकर्षण का केन्द्र हैं, जादूगरों को बुलाया था। इसीलिए हजऱत मूसा को एसा चमत्कार दिया गया था जो जादूगरों को असमर्थ करने की क्षमता रखता था। इसके अतिरिक्त हज़रत ईसा का उदाहरण पेश किया जा सकता है। उनके काल में चिकित्सकों का अत्याधिक सम्मान था इसीलिए उन्हें ऐसा चमत्कार दिया गया जो चिकित्सकों के सामर्थ्य में नहीं था। या फिर पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैही व आलेही व सल्लम के काल में साहित्य को अत्याधिक महत्व प्राप्त था और अरब, दूसरी भाषा बोलने वाले सभी लोगों को गूंगा कहते थे। इस काल में ईश्वर ने उन्हें क़ुरआन जैसा मोजिज़ा प्रदान किया जिसमें बार बार साहित्यकारों को चुनौती दी गयी है कि वह उस जैसी या उसके किसी एक अंश जैसी रचना करें।

    मोजिज़ा या चमत्कार पर हमारी चर्चा समाप्त हुई अंत में मुख्य बिन्दुओं पर एक दृष्टिः

    मोजिज़ा या चमत्कार के कारक भौतिक नहीं होते बल्कि यह ईश्वर की विशेष अनुमति से, उसके दूतों की सत्यता सिद्ध करने के लिए होता है।

    यदि किसी प्रक्रिया के कारक को प्रयोगशाला में न पहचाना जा सके तो यह इस बात का प्रमाण नहीं होगा कि उस प्रक्रिया का कोई कारक ही नहीं है क्योंकि प्रयोगशालाओं में केवल भौतिक वस्तुओं का पता लगाया जा सकता है जब कि इस सृष्टि की बहुत सी प्रक्रियाएं भौतिक नहीं होती और न ही उनके कारक भौतिक होते हैं।

    ईश्वरीय दूत के लिए कदापि यह आवश्यक नहीं है कि वह लोगों की मांग पर चमत्कार दिखाए बल्कि वह जब आवश्यकता समझता है चमत्कार दिखाता है और यह काम उसकी अपनी इच्छा पर निर्भर होता है।

    ईश्वर ने अपने दूतों की सत्यता सिद्ध करने के लिए हर दूत के काल की विशेष परिस्थितियों के अनुसार उसे चमत्कार दिये हैं।