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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-16 ईश्वर की विशेषताएं

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    ईश्वर के गुणों की गणना तो संभव नही है इस लिए हर वह गुण जो परिपूर्णता को दर्शाता हो और जिसमें किसी प्रकार की कमी की कल्पना न की जा सकती हो वह ईश्वर में होता है। यूं तो ईश्वर के बहुत से नाम और गुण हैं किंतु इस्लामी दर्शनशास्त्र और इस्लामी शिक्षाओं में ईश्वरीय गुणों के नाम से जिन विशेषताओं का वर्णन किया गया है वह कुछ विशेष गुण हैं जिन्हें दो भागों में बांटा गया है एक विशिष्ट गुण और दूसरे तुलनात्मक गुण। यहां पर हम ईश्वरीय गुणों के इन दोनों प्रकारों की विशेषताओं से आप को अवगत कराएगें। ईश्वर के गुण और विशेषताएं या तो ऐसी हैं जो स्वयं ईश्वर से संबंधित हैं उदाहरण स्वरूप जीवन, ज्ञान व शक्ति आदि या फिर ऐसी विशेषताएं हैं जो एक प्रकार से ईश्वर और उस की रचनाओं के मध्य संबंध को दर्शाती हैं जैसे अजीविका प्रदान करने वाला, पालनहार, रचयता आदि। ईश्वर के अस्तित्व की विशेषताओं को दर्शाने वाले और उस से सबंधित गुणों को विशिष्ट और ईश्वर की रचनाओं और ईश्वर के मध्य संबंध को दर्शाने वाले गुणों को तुलनात्मक गुण कहा जाता है अब प्रश्न यह उठता है कि इन दोनों में अंतर क्या है? इस प्रश्न के उत्तर में संक्षेप में यही कहा जा सकता है कि व्यक्तिगत गुण स्वयं ईश्वर से संबंधित होते हैं और उस की कल्पना के लिए किसी अन्य की कल्पना की आवश्यकता नहीं होती जैसे ज्ञान जीवन आदि ईश्वर की ऐसी विशेषताएं हैं जिन की कल्पना के लिए किसी अन्य की कल्पना की आवश्यकता नहीं है। बुद्धिजीवियों के मध्य ईश्वर की इस प्रकार की विशेषताओं के बारे में विभिन्न विचार पाए जाते हैं। अर्थात कुछ लोगों ने इस प्रकार की दो या तीन विशेषताओं का नाम लिया और उन्हें विशिष्ट विशेषताओं का स्रोत कहा और कुछ लोगों ने इस प्रकार की विशेषताओं की संख्या अधिक बताई है। ईश्वर की तुलनात्मक विशेषताएं उन विशेषताओं को कहते हैं जिनकी कल्पना के लिए ईश्वर के अतिरिक्त किसी अन्य वस्तु की कल्पना की भी आवश्यकता हो जैसे पालनहार या अजीविका प्रदान करने वाला। ईश्वर अजीविका प्रदान करता है इस अर्थ को पूर्ण रूप से समझने के लिए अजीविका लेने वाले की कल्पना आवश्यक है। अर्थात अजीविका प्रदान करने की ईश्वर की विशेषता और अजीविका लेने वाले की एक साथ कल्पना से अजीविका प्रदान करने वाले का गुण उभर कर आता है। ईश्वर की विशिष्ट विशेषताओं में मुख्य रूप से जीवन, शक्ति व ज्ञान है किंतु यह कैसे सिद्ध किया जा सकता है कि यह तीनों विशेषताएं ईश्वर में हैं?ईश्वर के लिए जीवन या प्राण, शक्ति तथा ज्ञान को सिद्ध करने का एक अत्यधिक सरल मार्ग यह है कि हम जब किसी रचना में इन गुणों को सिद्ध करते हैं अर्थात यदि हम यह कहते हैं कि अमुक व्यक्ति ज्ञानी है या अमुक वस्तु जीवित है या शक्तिशाली है तो एक प्रकार से हम उस व्यक्ति या वस्तु की परिपूर्णता को सिद्ध करना चाहते हैं अर्थात यह विशेषताएं परिपूर्णता का चिन्ह भी हैं तो फिर इन विशेषताओं का परिपूर्ण रूप उनके रचयिता में होना चाहिए। क्योंकि यह तो एक दम स्पष्ट बात है कि ईश्वर की समस्त रचनाओं में जितने भी गुण हैं सब के सब ईश्वर की देन हैं और कोई भी शक्ति कोई एसी वस्तु नहीं दे सकती जो उसके पास न हो अर्थात जिस में यह क्षमता होगी कि वह किसी को किसी गुण से सुसज्जित कर सकता है तो फिर स्पष्ट सी बात है कि वह गुण उस में अपने परिपूर्ण रूप में मौजूद होगा अन्यथा वह दूसरे को वह गुण नहीं दे सकता। दूसरे शब्दों में, यह संभव नहीं है कि ईश्वर प्राण व जीवन की उत्पत्ति करे किंतु स्वयं उससे वंचित रहे या वह अपनी किसी रचना को ज्ञान व शक्ति तो प्रदान करे किंतु स्वयं अज्ञानी व शक्तिहीन रहे। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि ईश्वर की कुछ रचनाओं में इन गुणों का होना इस बात का प्रमाण है कि यह गुण उन के रचयिता में सम्पूर्ण रूप से और बिना किसी त्रुटि के पाए जाते हैं। अर्थात ईश्वर अनन्त जीवन, ज्ञान व शक्ति का स्वामी है। हम अगले कार्यक्रमों में उसकी इन विशेषताओं पर चर्चा करेंगे। इस समय आज की चर्चा के मुख्य बिन्दुः • हर वह गुण जो परिपूर्णता को दर्शाता हो और जिस के कारण किसी प्रकार की कमी की कल्पना न की जा सकती हो वह ईश्वर में होता है।• इस्लामी दर्शनशास्त्र और इस्लामी शिक्षाओं में ईश्वरीय गुणों के नाम से जिने विशेषताओं का वर्णन किया गया है वह कुछ विशेष गुण हैं जिन्हें दो भागों में बांटा गया है एक व्यक्तिगत गुण और दूसरे तुलनात्मक गुण।• ईश्वर के अस्तित्व की विशेषताओं को दर्शाने वाले और उस से सबंधित गुणों को व्यक्तिगत और ईश्वर की रचनाओं और ईश्वर के मध्य संबंध को दर्शाने वाले गुणों को तुलनात्मक गुण कहा जाता है। • ईश्वर की कुछ रचनाओं में प्राण, ज्ञान व शक्ति जैसे गुणों का होना इस बात का प्रमाण है कि यह गुण उन के रचयता में सम्पूर्ण रूप से और बिना किसी कमी के पाए जाते हैं।