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    सृष्टि ईश्वर और धर्म 74

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    पिछली कई चर्चाओं में हमने यह सिद्ध किया है कि यही संसार सब कुछ नहीं है बल्कि इस लोक के बाद भी एक लोक है जहां हिसाब किताब होगा और उस लोक के प्रथम चरण के रूप में हम ने क़यामत या प्रलय अथवा उस दिन के बारे में जब कर्मों का हिसाब लिया जाएगा कुछ बातें जानी किंतु प्रलय और हिसाब किताब के दिन के बारे में कुछ प्रचलित शंकाएं हैं जिनका हम यहां उल्लेख कर रहे हैं।

    कुछ लोग क़यामत और उस दिन शरीर में आत्मा की वापसी के बारे में यह शंका करते हैं कि हम यह मानते हैं कि आत्मा भौतिक नहीं होती इस लिए वह नष्ट नहीं होती और उसमें इस बात की क्षमता भी होती है कि वह शरीर में वापस आ जाए किंतु शरीर में वापसी के लिए स्वंय शरीर में उसे स्वीकार करने की क्षमता नहीं होती क्योंकि विश्व की हर प्रक्रिया में उसके लिए आवश्यक परिस्थितियों का होना अनिवार्य है। उदाहरण स्वरूप गर्भ धारण करने के बाद भी यद्यपि गर्भ धारण की प्रक्रिया पूर्ण रूप से सही हुई हो किंतु यदि उसके बाद की परिस्थियां अनुकूल नहीं होगीं तो वह गर्भ एक मनुष्य का रूप धारण नहीं कर सकता इसी प्रकार आत्मा में शरीर में वापसी की क्षमता होती है किंतु शरीर नष्ट हो चुका होता है और उसमें आत्मा को पुनः स्वीकार करने की क्षमता नहीं रह जाती इसी लिए क़यामत के दिन मुर्दों का पुनः जीवित होना संभव नहीं है और यदि आत्मा किसी शरीर में जाएगी तो फिर वह , मरे हुए मनुष्य का अपना शरीर नहीं होगा बल्कि कोई अन्य शरीर होगा और अन्य शरीर को पारितोषिक या दंड देने का कोई औचित्य नहीं है। इस शंका के उत्तर में हम यह कह सकते हैं कि हमें जो कुछ दिखायी देता है वही सब कुछ नहीं है अर्थात आज हम जो व्यवस्था देख रहे हैं उसका अर्थ यह नहीं है कि उसके अतिरिक्त कोई अन्य व्यवस्था संभव ही नहीं है। बल्कि यह संभव है कि किसी विशेष घटना के लिए कुछ एसे कारक भी हों जिनका हमें ज्ञान ही न हो जैसा कि बहुत से वैज्ञानिक तथ्यों में सिद्ध हो चुका है। आज हमारे इस आधुनिक युग में बहुत सी एसी चीज़े हैं जिनके बारे में आज से सौ वर्ष पहले का मनुष्य सोच भी नहीं सकता था। तथा इसी प्रकार हम वैज्ञानिक खोजों पर यदि ध्यान दें तो हमें पता चलेगा कि सारी खोजें इस विश्व में पहले से मौजूद तत्व व व्यवस्था का ज्ञान प्राप्त कर लेना है। उदाहरण स्वरूप गुरुत्तवाकर्षण पहले से था किंतु उसका ज्ञान किसी को नहीं था, यह व्यवस्था आरंभ से अपना काम कर रही थी किंतु किसी को इसका ज्ञान नहीं था इस प्रकार से हम यह कह सकते हैं कि किसी तथ्य से अनभिज्ञता, उसके न होने का प्रमाण नहीं है। अब यदि हमें आज इस बात का ज्ञान नहीं है कि नष्ट हुए शरीर में पुनः किस प्रकार आत्मा प्रवेश करेगी तो इस अनभिज्ञता को, नष्ट हुए शरीर में आत्मा के पुनः वास की बात का ठुकराने का प्रमाण नहीं बनाया जा सकता। इस के साथ मानव इतिहास में बहुत सी एसी घटनाएं हैं जिनके अंतर्गत एसे लोग जीवित हुए हैं जिन की जीवन की संभावना नहीं थी। क़यामत और हिसाब किताब के दिन पुनर्जीवन के संदर्भ में एक यह शंका की जाती है कि पुनर्जीवन के समय शरीर पूर्ण रूप से नष्ट हो चुके होंगे बल्कि मिट्टी में मिल चुके होंगे तो यदि उन्ही शरीरों में आत्मा को पुनः लौटाना होगा तो सारे शरीरों की पहचान होनी चाहिए और इतने सारी शरीरों को अलग करना और फिर उसमें आत्मा डालना किस प्रकार संभव होगा। इस शंका का उत्तर में हम यह कहेंगे कि यह वास्तव में ईश्वरीय ज्ञान से अनभिज्ञता का है अर्थात इस से पहले की चर्चाओं में हम यह बता चुके हैं कि अनभिज्ञता व अज्ञान वास्तव में मनुष्य की विशेषताएं और और बहुत सारी चीज़े जिनके बारे में ज्ञान हमारे लिए संभव नहीं है वह ईश्वर के लिए साधारण व सामान्य सी बात है और हम अपने ज्ञान की तुलना किसी भी रूप में उसके ज्ञान से नहीं कर सकते। यदि इस संसार में भौतिक कारणों से हमें कुछ वस्तुओं का ज्ञान अत्याधिक कठिन लगे तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसका ज्ञान ईश्वर के लिए भी कठिन होगा। ठीक उसी प्रकार से जैसे एक आम मनुष्य के सामने यदि शीशे और हीरे के टुकड़े मिला कर रखे दिये जाएं तो उसके लिए शीशे और हीरे के टुकड़ों को अलग करना बहुत कठिन काम होगा किंतु जौहरी के लिए यह एक साधारण काम होगा वैसे भी काम कठिन है या सरल इसका संबंध काम से नहीं होता बल्कि काम करने वाले से होता है। अर्थात हम यह कह सकते है कि कोई काम स्वंय कठिन या सरल नहीं होता बल्कि कठिनाई या सरलता काम करने वाले पर निर्भर होती है इसी लिए बहुत से एसे काम हैं जो कुछ लोगों के लिए कठिन और कुछ अन्य लोगों के सरल होते हैं। उदाहरण स्वरूप, कार चलाना, ड्रायविंग न जानने वाले के लिए अत्याधिक कठिन काम है किंतु जानने वाले के लिए साधारण काम है। इसी प्रकार बहुत से आप हर काम के बारे में सोच सकते हैं और हम यह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईश्वर हर काम पर सक्षम है और उसके लिए कोई भी काम कठिन नहीं है। इसके अतिरिक्त सड़ी गली हड्डियों से आज से पहले के युग में किसी की पहचान अंसभव थी किंतु आज यह सब संभव हो गया है। आज के विज्ञान ने इतनी प्रगति कर ली है कि डीएनए और जीन द्वारा प्रयोगशालाओं में बहुत सी एसी बातों का पता लगा लिया जाता है कि जिन के बारे में पहले कोई सोच भी नहीं सकता था और रोचक बात यह है कि ज्ञान व विज्ञान की यह यात्रा जारी है और कोई नहीं जान सकता कि इसका चरम कहां होगा और यह यात्रा कहां जाकर रूकेगी इसी लिए बुद्धि के अनुसार आज असंभव लगने वाले बहुत से काम, भविष्य में साधारण व सामान्य काम हो सकते हैं इस लिए यदि आज हमारी नज़र में कोई काम भौतिक कारणों के अंतर्गत अंसभव लगता है तो यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह काम भविष्य में भी असंभव ही रहेगा। क़यामत या प्रलय के दिन पुनर्जीवन का एक प्रमाण जिसका क़ुरआन में बार बार उल्लेख किया गया है यह है कि जिस ईश्वर ने कुछ न होने से यह सब कुछ बना दिया, उसके लिए नष्ट हुए शरीर से फिर उसी मनुष्य को बनाना क्यों अंसभव होगा? जिसने पहली बार रचना की वही दूसरी बार भी बनाएगा। हमारी चर्चा अगले सप्ताह भी जारी रहेगी फिलहाल आज की चर्चा के मुख्य बिन्दुः

    • यदि हमें आज इस बात का ज्ञान नहीं है कि नष्ट हुए शरीर में पुनः किस प्रकार आत्मा प्रवेश करेगी तो इस अनभिज्ञता को, नष्ट हुए शरीर में आत्मा के पुनः वास की बात का ठुकराने का प्रमाण नहीं बनाया जा सकता।• हम अपने ज्ञान की तुलना किसी भी रूप में उसके ज्ञान से नहीं कर सकते। यदि इस संसार में भौतिक कारणों से हमें कुछ वस्तुओं का ज्ञान अत्याधिक कठिन लगे तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसका ज्ञान ईश्वर के लिए भी कठिन होगा।• कोई काम स्वंय कठिन या सरल नहीं होता बल्कि कठिनाई या सरलता काम करने वाले पर निर्भर होती है इसी लिए बहुत से एसे काम हैं जो कुछ लोगों के लिए कठिन और कुछ अन्य लोगों के सरल होते हैं।