islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. सेवेर-सवेरेः५

    सेवेर-सवेरेः५

    Rate this post

    वे देश और वे स्थान जहां पर सफ़ाई विशेषकर जल की सफ़ाई का ध्यान नहीं रखा जाता वहां पर यकृत की बीमारियां बहुत अधिक होती हैं। प्रदूषित जल के अतिरिक्त खानों में चिकनाई और मिर्च-मसालों का प्रयोग भी यकृत को ख़राब करने में महत्वूपर्ण भूमिका निभा रहा है। यकृत को स्वस्थ्य रखने के संबन्ध में इस्लामी चिकित्सा शैली के एक विशेषज्ञ श्री सैयद अली अबुलहबीब का कहना है कि कुछ एसे खाद्य पदार्थ हैं जो यकृत को स्वस्थ्य एवं सक्रिय बनाने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस प्रकार के खाद्य पदार्थों की संख्या कम नहीं है। डा. सैयद अली कहते हैं कि विभिन्न फल और तरकारियां विशेषकर काहू जिसे कुछ लोग सलाद पत्ता भी कहते हैं, खीरा, गाजर, अनार, शहतूत तथा ज़ैतून आदि यकृत के स्वास्थ्य की सहायता के लिए प्रसिद्ध हैं। इसी प्रकार से ज़ैतून का तेल यकृत पर चमत्कारिक प्रभाव डालता है। शहतूत का सेवन हिपैटाइटिस में बहुत लाभदायक सिद्ध होता है। इसी प्रकार तुलसी के बीज, बारहंग और तरजंबीन आदि यकृत की सफ़ाई में बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। यकृत को स्वस्थ्य रखने के लिए जौ का सूप, जौ की रोटी, खट्टा नीबू, प्रतिदिन छह ग्लास स्वच्छ पानी का सेवन साथ ही ज़ैतून के तेल का सेवन बहुत लाभदायक होता है। इसी प्रकार से मधु, किशमिश, शहतूत, अंजीन, कद्दू, लौकी, तिल, संतरे और मौसमी का जूस तथा बादाम का सेवन भी यकृत के लिए बहुत लाभदायक होता है।

    इस प्रकार उचित खाद्य पदार्थों का सेवन करके यकृत को स्वस्थ रखा जा सकता है। स्वस्थ्य यकृत को स्वस्थ्य शरीर और स्वस्थ्य आत्मा का आधार माना जाता है। यकृत का एक अन्य आश्चर्यचकित करने वाला कार्य एक एन्टीवायरेस पदार्थ बनाना है जिसे इन्टरफ़्रोन कहते हैं। यह पदार्थ एसी स्थिति में उत्पन्न होता है कि जब यकृत, पूर्ण रूप से स्वस्थ्य और सक्रिय हो।

    दाम्पत्य जीवन में यह बात बहुत अधिक देखने में आती है कि पति और पत्नी अपने दाम्पत्य जीवन के आरंभ के दो तीन वर्षों तक एक दूसरे के लिए आकर्षण रखते हैं। उनके मन में एक दूसरे के प्रति उत्साह और प्रेमपूर्ण उत्तेजना होती है। समय व्यतीत होने के साथ ही साथ उनके संबन्ध इतने सामान्य और साधारण हो जाते हैं कि प्रेमपूर्ण बातें करना तो दूर, एक-दूसरे पर आपत्ति जताने और छोटी-मोटी लड़ाई के लिए मन नहीं करता। बाहर से देखने वाले समझते हैं कि सबकुछ ठीकठाक है परन्तु पति और पत्नी के बीच कोई भावना रह ही नहीं जाती। अब आप ज़रा ध्यान दें, मन लगाकर सोचें। आरंभिक दिनों में आप दोनो अपने बाहृय रूप, कपड़ों, बालों और श्रंगार पर ध्यान दिया करते थे। पत्नी दस्तरख़ान पर खाना सजाती थी। पति के आने की प्रतीक्षा करते हुए चाय या शर्बत तैयार कर लेती थी। यदि दोनों काम पर जाते थे तो आते ही एक-दूसरे की सहायता से बातचीत करते हुए वे काम किया करते थे। घर की सफ़ाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाता था। पति जी आरंभिक दिनों में कभी फूल तो कभी कोई अन्य छोटा-मोटा उपहार लेकर घर में प्रवेश करते थे। पत्नी अपने पति की मनपसंद डिश बनाकर या उसकी पसंद का कोई काम करके उसे चौंकाने का प्रयास करती थी। यदि आप यह चाहते हैं कि एसी स्थिति उत्पन्न न होने पाए तो इसके लिए क्या किया जाए? इसके लिए कुछ उपाय हैं

    नंबर एक यह कि आरंभिक दिनों की भांति ही सदैव अपनी साज-सज्जा, सफ़ाई-सुथराई और कपड़ों पर विशेष ध्यान दें। यह काम पति और पत्नी दोनों को ही करना चाहिए।

    नंबर दो यह कि अपनी बातों को पारिवारिक झगड़ों और बखेड़ों या इसकी उसकी बुराई में सीमित न करें बल्कि अच्छी किताबें और अच्छी पत्रिकाएं पढ़ें। समाचारपत्र पढ़ने की आदत डालें ताकि अच्छे और ज्ञान वर्धक विषयों पर बातचीत कर सकें। सप्ताह के अंत में किसी मनोरंजन या किसी से मिलने-जुलने का कार्यक्रम बनाएं।

    नंबर तीन यह कि कुछ पति-पत्नी, माता-पिता बनने के पश्चात सदैव बच्चों के साथ ही कहीं जाना चाहते हैं जबकि उन्हें चाहिए कि बच्चों के बिना भी अपने लिए बाहर जाने का कोई कार्यक्रम बनाया करें। अकेले फ़िल्म देखने, टहलने जाना या कोई अन्य कार्य जिसमें एक-दूसरे से बात करने और एक-दूसरे पर ध्यान देने का समय मिले। इसके अतिरिक्त एसे लोगों से संबन्ध रखें जिनका दाम्पत्य जीवन सुखी हो। सदैव उचित अवसरों और त्योहारों की प्रतीक्षा न करें बल्कि एक-दूसरे को छोटे-मोटे उपहार देकर अपने सामान्य दिनों को आनंदमयी बनाएं। एक-दूसरे की प्रशंसा करने में न हिचकिचाएं। सुन्दर वाक्य सीधे दिल में उतर जाते हैं और साधारण से जीवन को अमृत समान मीठा कर देते हैं। यह काम किसी भी आयु में किया जा सकता है।

    खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि हरी चाय या ग्रीन टी में काफ़ी जैसी चुस्ती प्रदान करने वाली विशेषता पाई जाती है जबकि यह ऊर्जा का भी विनाश व अंत नहीं करती। ग्रीन टी धीरे-धीरे बड़े व्यवस्थित ढंग से ऊर्जा को स्वतंत्र करती रहती है। यह चाय यदि व्यायाम से पहले पी ली जाए तब भी बहुत अच्छा प्रभाव डालती है और उस समय भी बहुत सहायक सिद्ध होती है। जब आप थकन का आभास कर रहे हों। इसका प्रभाव काफ़ी से कहीं बेहतर है। अतः दिन में तीन-चार बार ग्रीन टी का सेवन काफ़ी लाभदायक होता है।

    ब्रोक्ली नामक सब्जी से आप अवश्यक परिचित हैं। इसे अधिक्तर सलाद में प्रयोग किय जाता है। इसमें प्रचुन मात्रा में विटमिन-बी होता है। यही कारण है कि शरीर के मोटाबोलिज़्म में इसकी महत्वूपर्ण भूमिका होती है और चर्बी आदि पिघलाने में ब्रोकली बहुत आगे रहता है। तो क्यों न आज से ही इसका सेवन आरंभ कर दिया जाए।

    यहां पर आपको एक एसी सच्ची घटना से अवगत कराते हैं जिसपर यदि विचार किया जाए तो यह बहुत रोचक सिद्ध होगी। प्राचीनकाल में एक ज्ञानी दीवानों की वेशभूशा में रहा करते थे। उनका नाम बोहलोल था। बोहलोल के पास एक व्यक्ति आया जो वास्तव में इस्लाम के उस नियम पर आपत्ति करना चाहता था जिसमें मदिरा या शराब को वर्जित किया गया है। उसने बोहलोल से पूछा कि यदि मैं अंगूर खाऊं तो क्या यह काम हराम है? उन्होंने कहा नहीं। उसने फिर कहा कि अंगूर खाकर यदि मैं धूप में लेट जाऊं तो क्या यह वर्जित है? इसपर बहलोल ने कहा कि नहीं। उसने कहा कि फिर एसा क्यों है कि अंगूर को यदि एक घड़े में रखकर उस घड़े को धूप में रख दिया जाए तो कुछ समय के बाद उसका सेवन वर्जित कहा जाता है। बोहलोल ने कहा कि देखो मैं तुम्हारे मुंह पर यदि थोड़ा सा पानी डाल दूं तो क्या तुमको पीड़ा होगी? व्यक्ति ने उत्तर दिया कि नहीं। उन्होंने फिर कहा कि यदि मैं थोड़ी सी मिट्टी तुम्हारे मुंह पर डाल दूं तो क्या तुम्हे दर्द होगा? बहलोल ने उत्तर दिया कि फिर यदि पानी और मिट्टी मिलाकर गोला बनाकर उसे घूप में रख दिया जाए और उसे तुम्हारे मुंह पर मारा जाए। यह कहकर बोहलोल ने मिट्टी का एक ढेला उठाया और खींचकर उस व्यक्ति को मारा। उसके लगते ही वह व्यक्ति चिल्ला कर कहने लगा कि तुमने मेरा सिर घायल कर दिया मेरा सिर तोड़ दिया। बोहलोल ने कहा कि अरे क्य हुआ, मैंने क्या किया? यह तो वही पानी और मिट्टी है जिससे दर्द नहीं होता। सुनो मैंने यह पाठ तुमको इसलिए दिया है कि तुम ईश्वर के आदेशों को समझो और उनपर विचार करों। न यह कि आदेशों की अवज्ञा करो और उनपर आपत्ति करो।