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    सोने चांदी का इस्तेमाल

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    सवाल 429: मर्दों के बारे में सोने की अंगूठी ख़ास तौर पर नमाज़ में पहनने का क्या हुक्म है?

    जवाब: किसी हालत में मर्द के लिये सोने की अंगूठी पहनना जाएज़ नहीं है और ऐहतियाते वाजिब की बिना पर इस में उसकी नमाज़ भी बातिल है।

    सवाल 440: मर्दों के लिये सफ़ैद सोने की अंगूठी पहनने का क्या हुक्म है?

    जवाब: जिसे सफ़ैद सोना कहा जाता है अगर वो यही ज़र्द (पीला) सोना है कि जिसमें कोई मवाद (केमिकल) मिलाकर इसके रंग को बदल दिया गया हो तो हराम है लेकिन अगर इस में सोने की मिक़दार इतनी कम हो के उर्फ़े आम में इसे सोना न कहा जाये तो एतराज़ नहीं है और प्लाटीनम के इस्तेमाल में भी कोई हर्ज नहीं है।

    सवाल 441: क्या उस वक़्त भी सोना पहनने में कोई शरई ऐतराज़ है जब वो ज़ीनत के लिये न हो और दूसरों को नज़र न आये?

    जवाब: मर्दों के लिये हर सूरत में सोना पहनना हराम है चाहे उसे ज़ीनत के इरादे से न पहना जाये या दूसरे की नज़र से छिपा कर रखा जाये।

    सवाल: 442 मर्दों का थोड़े से वक़्त के लिये सोना पहनना क्या हुक्म रखता है? चूंके हम कुछ लोगों को ये दावा करते हुए देखते हैं कि कम मुद्दत के लिये जैसे अक़्द के वक़्त सोना पहनने में कोई हर्ज नहीं है?

    जवाब: मर्दों के लिये सोना पहनना हराम है और थोड़े या ज़्यादा वक़्त में कोई फ़र्क़ नहीं है।

    सवाल 443: नमाज़ गुज़ार के लिबास के अहकाम को नज़र में रखते हुए और उस हुक्म के पेशे नज़र के मर्दों के लिये सोने से तैयार होना हराम है नीचे दिये गऐ दो सवालों के जवाब बयान फ़रमायें?

    1- क्या सोने से ज़ीनत करने का मतलब ये है कि मर्दों के लिये मुतलक़ तौर पर सोने का इस्तेमाल हराम है चाहे वो हड्डी के आप्रेशन और दांत बनवाने के लिये ही क्यों न हो?

    2- इस बात को मद्देनज़र रखते हुए के हमारे शहर में रिवाज है के नये शादी शुदा जवान ज़र्द (पीले) सोने की अंगूठी पहनते हैं और आम लोगों की नज़र में ये चीज़ इनकी ज़ीनत में शुमार नहीं होती बल्कि ये उस शख़्स के लिये इज़देवाजी ज़िन्दगी के आग़ाज़ (शादी शुदा ज़िन्दगी की शुरुआत) की अलामत समझी जाती है तो इस सिलसिले में आपकी राय क्या है?

    जवाब: 1- मर्दों के सोना पहनने के हराम होने का मेयार ज़ीनत (ख़ूबसूरती) का सादिक़ आना नहीं है बल्कि किसी भी तरह और किसी भी इरादे से सोना पहनना हराम है चाहे वो सोने की अंगूठी हो या हार हो या ज़ंजीर वग़ैरा लेकिन ज़ख्म में भरने और दांत बनवाने के लिये मर्दों के इस्तेमाल में कोई हर्ज नहीं है।

    2- मंगनी वाली ज़र्द सोने की अंगूठी पहनना मर्दों के लिये हर सूरत में हराम है।

    सवाल 444: सोने के इन ज़ेवरात को बेचने और इन्हें बनाने का क्या हुक्म है जो मर्दों से मख़सूस हैं और जिन्हें औरते नहीं पहनतीं?

    जवाब: सोने के ज़ेवरात बनाना अगर सिर्फ़ मर्दों के इस्तेमाल के लिये हो तो हराम है और इसी तरह इन्हें इस मइरादा के लिये ख़रीदना और बेचना भी जाएज़ नहीं है।

    445: हम कुछ दावतों में देखते हैं के मिठाई चांदी के ज़रूफ़ (बरतनों) में पेश की जाती है क्या इस अमल को चांदी के ज़रूफ़ (बरतन) में खाना समझा जायेगा? और इसका क्या हुक्म है?

    जवाब: खाने के मक़सद से चांदी के बरतन में से खाने वग़ैरह की चीज़ का उठाना अगर खाने पीने में चांदी के बतरतों का इस्तेमाल शुमार किया जाये तो हराम है।

    सवाल 446: क्या दांत पर सोने का ख़ौल चढ़वाने में कोई हर्ज है? और दांत पर प्लाटीनम का ख़ोल चढ़वाने का क्या हुक्म है?

    जवाब: दांत पर सोने या प्लाटीनम का खोल चढ़वाने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन अगर ज़ीनत की ग़र्ज़ से सामने के दांतों पर सोने का खोल चढ़वाए तो कोई ऐतराज़ नहीं है।