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    हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम की अहादीस

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    हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम की अहादीस (प्रवचन)

    अपने प्रियः अध्ययन कर्ताओं के लिए यहाँ पर हज़रत  हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम के चालीस मार्ग दर्शक कथन प्रस्तुत किये जारहे हैं।

    1- मार्ग दर्शक

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह ने मनुष्यो के लिए  ज़ाहिर व बातिन(प्रत्यक्ष व परोक्ष) दो मार्ग दर्शकों का प्रबन्ध किया है।प्रत्यक्ष मार्ग दर्शक आदरनीय पैगम्बरो व इमामों को बनाया तथा परोक्ष मार्ग दर्शक बुद्धि को बनाया।

    2- बुद्धिमान

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति संसारिक मोहमाया से दूर व परलोकीय माया के अभिलाषी होते हैं। क्योकि वह जानते हैं कि संसार व परलोक दोनो माँगने वाले व मिलने वाले हैं। जो परलोक को माँगता है संसार उसको माँगता है ताकि अपनी जीविका उससे प्राप्त करे। और जो संसार को माँगता है परलोक उसके पीछे आता है ताकि उसकी मृत्यु हो और उसका संसार व परलोक दोनो समाप्त हो।

    3-संसारिक मोह माया

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि एकाँत पर संतोष करना बुद्धिमत्ता का लक्षण है। जो अल्लाह से परिचित होगा वह संसारिक मोहमाया व संसारिक मोहमाया के जाल मे फसे व्यक्तियों से दूर रहेगा। और अगर जो कुछ अल्लाह के पास है उसमे रूची रखेगा तो अल्लाह भयंकर स्थिति मे उसका सहायक, एकाँत मे उसका मित्र, दरिद्रता मे उसका धन व परिवार से दूर होने की स्थिति मे उसका गर्व होगा।

    4-धनवान

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो बिना धन के धनवान होना चाहे, अपने हृदय को  ईर्श्या से दूर रखना चाहे और अपने धर्म को सुरक्षित रखना चाहे तो उसे चाहिए कि अल्लाह के समक्ष रोये व अल्लाह से प्रार्थना करे कि उसकी बुद्धि को पूर्ण करे। क्योंकि बुद्धिमान अवश्क्ता अनुसार मिलने पर ही संतोष करता है। और जो अवश्क्ता योग्य मिलने पर संतोष करता है वह धनी हो जाता है। और जो अवश्क्ता योग्य मिलने पर संतोष नही करता वह कभी भी धनी नही हो सकता।

    5-निस्वार्थता

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर कोई निस्वार्थ रूप से अपने मोमिन भाई से भेंट करने के लिए इस लिए जाये ताकि अल्ला की ओर से मिलने वाला परितोषिक उसे प्राप्त हो और अल्लाह का वचन पूर्ण हो तो इस स्थिति मे अल्लाह उसके घर से निकलने के समय से लेकर उस के घर मे प्रविष्ट होने के समय तक सत्तर हज़ार फ़रिश्तों को उसके ऊपर छोड़ता है। ताकि वह उसको यह संदेश दें कि पाको पाकीज़ा( पवित्र) जन्नत तुझे मुबारक( मंगलमय) हो कि तूने उसमे एक स्थान प्राप्त कर लिया।

    6- सर्व श्रेष्ठ

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि तुम मे सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति वह है जो संसार को अपने लिए प्रतिष्ठा का केन्द्र न समझे। जानलो कि तुम्हारे शरीर का मूल्य केवल स्वर्ग है अतः इस से कम पर इसे मत बेंचो।

    7- अपमानित न करो

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो दूसरे व्यक्तियो को अपमानित करने से बचेगा अल्लाह क़ियामत (परलय) के दिन उसकी ग़लतियों(त्रुटियों) को अनदेखा करेगा। तथा जो (संसार मे) दूसरे व्यक्तियो पर क्रोधित नही होगा अल्लाह क़ियामत के दिन उस पर क्रोधित नही होगा।

    8-नमाज़ पढ़ना

     इमाम काज़िम अलैहिस्लाम ने कहा कि अल्लाह को पहचानने के बाद सर्व श्रेष्ठ कार्य जिनके द्वारा बन्दा अल्लाह से अधिक समीप हो सकता है, वह नमाज़ पढ़ना, अपने माता पिता के साथ सद् व्यवहार करना तथा ईर्श्या, घमँड व स्वेच्छाचारिता का त्यागना है।

    9-झूट न बोलना

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति कभी झूट नही बोलते चाहे झूट से उनका स्वार्थ ही क्यों न सिद्घ  होता हो।

    10-कम बोलना

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि कम बोलना बुद्धिमत्ता है। आप लोगों को  चाहिए कि कम बोलो क्योंकि यह श्रेष्ठ व्यक्तियो का चलन है। इससे गुनाहों(पापों) मे कमी होती है।

    11-जन्नत का हराम होना

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह ने अपशब्द बोलने वाले,गाली देने वाले,निर्लज्ज व ऐसे व्यक्तियों के लिए जिन को इस बात का ऐहसास न हो कि वह क्या कह रहे हैं और उन को क्या कहा जा रहा है जन्नत (स्वर्ग) को हराम(निषेद्ध)किया है।

    12- अहँकार

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अहँकार से दूर रहो। क्योंकि जिसके हृदय मे एक छोटे से दाने के बराबर भी अहँकार होगा वह जन्नत मे नही जासकता।

    13- समय का विभाजन

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि प्रयत्न करो कि अपने समय को चार भागो मे विभाजित करो। एक भाग को अल्लाह से विनती करने के लिए, एक भाग को जीविका जुटाने के लिए, एक भाग को अपने ऐसे विश्वसनीय मित्रो की संगत मे बैठने के लिए जो तुमको तुम्हारी बुराईयों से अवगत करायें तथा निस्वार्थ रूप से तुम्हारे मित्र हों। तथा एक भाग अल्लाह द्वारा हलाल की गयी वस्तुओं से आनंदित होने के लिए आरक्षित करो तथा इस अन्तिम भाग से अन्य तीनो भागों के लिए शक्ति प्राप्त करो।

    14-गौरव मय

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि धार्मिक लोगों की संगत मे बैठना संसार व परलोक दोनो के लिए गौरवमय है।भला चाहने वाले बुद्धिमान से परामर्श करने मे सफलता तथा वृद्धि है और यह अल्लाह का एक उपहार है। जब भलाई चाहने वाला बुद्धिमान कोई परामर्श दे तो उसका विरोध न करो। क्योंकि अगर उसका विरोध करोगे तो संकट मे फस जाओगे।

    15-संगत

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि बुद्धिमान व अमानतदार व्यक्तियों के अतिरिक्त अन्य लोगों की संगत मे बैठने व उनसे मित्रता करने से इस प्रकार बचो जैसे नरभक्षी वन्य प्राणीयों से बचते हो।

    16-जाल मे फसना

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति संसारिक मोह माया के जाल मे फस जाता है उसके हृदय से परलोक का भय निकल जाता है। अल्लाह से दूर तथा उसके क्रोध से प्रकोपित व्यक्ति के अतिरिक्त कोई भी किसी को संसारिक मोह माया मे लिप्त होने की शिक्षा नही देता।

    17-लोलुपता

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि लालच से दूर रहो, क्योंकि लालचा अपमान की कुँजी है। लालच बुद्धि, वीरता, सम्मान व ज्ञान को समाप्त कर देता है।

    18-सत्यवादिता

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि सत्यवादिता व अमानतदारी से जीविका मे वृद्धि होती हैं। तथा असत्य बोलने व विश्वासघात करने से दरिद्रता मे वृद्धि होती है।

    19-मज़ाक़

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि मज़ाक़ न किया करो क्योंकि इससे तुम्हारे मुखः का तेज लुप्त हो जाता है।

    20- अल्लाह से डरना

      हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि सदैव अल्लाह से डरो व सत्य को अपनाओ चाहे इस के कारण तुम्हारे प्राण भी चले जायें। क्योंकि तुम्हारा कल्याण    वास्तव  मे सत्य मे ही है। अल्लाह से डरो व असत्य से दूर रहो चाहे उससे तुम्हे लाभ ही क्यों न हो रहा हो क्योकि वास्तविक्ता यह है कि असत्य मे हानी ही हानी है।

    21-नवाफ़िल नमाज़

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि नावाफ़िल नमाज़ अल्लाह से क़रीब होने का रास्ता  है।

    22-प्रतिकार

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि क़ियामत (परलय) के दिन यह घोषणा की जायेगी कि जिसका प्रतिकार अल्लाह पर हो वह खड़ा हो जाये। परन्तु क्षमा करने वालों और व्यक्तियो के मध्य संधि कराने वालो के अतिरिक्त कोई खड़ा न होगा और वही अल्लाह से अपना प्रतिकार लेगें।

    23-निस्सहाय की सहायता

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि तुम्हारा निस्सहाय की सहायता करना  महान् सदक़ा (दान) है।

    24-नये पाप

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जब भी मनुष्य नये नये प्रकार के पाप करते है तो अल्लाह उनको नये नये प्रकार के अन गिनत कष्टो मे लिप्त कर देता है।

    25-इमाम की प्रतिक्षा

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह को पहचान ने के बाद सर्व श्रेष्ठ कार्य इमाम के आने की प्रतिक्षा करना है।

    26-शक्तिशाली

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर कोई सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बनना चाहे तो उसे चाहिए कि वह केवल अल्लाह पर तवक्कुल (निस्पृहता) करे।

    27-दो दिन बराबर

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जिस व्यक्ति के दो दिन अध्यात्मिकता के आधार पर बराबर हों वह व्यक्ति हानी मे है। और जिसका दूसरा दिन पहले दिन से बुरा हो वह मलऊन (अल्लाह की दया व कृपा से दूर) है। और जो अपने अन्दर आध्यात्मिक वृद्धि न देखे वह भी हानी मे है। औऱ जो हानी मे हो उस के लिए मृत्यु जीवन से श्रेष्ठ है।

    28-कर्तव्य

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अपने भाई के प्रति तुम्हारा सबसे बड़ा कर्तव्य यह है कि जो बात उसको संसार या परलोक मे लाभ पहुँचा सकती है तुम उस बात को उससे न छिपाओ।

    29-उपदेश

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जिन वस्तुओं को तुम्हारी आँखें देखती हैं उन सभी वस्तुओं मे तुम्हारे लिए उपदेश है।

    30-संकट का स्वाद

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जिस व्यक्ति ने संकट व विपत्तियों का स्वाद न चखा हो उसके सम्मुख उपकार का कोई महत्व नही है।

    31- मोमिन

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि कोई भी व्यक्ति उस समय तक मोमिन नही बन सकता जब तक वह अल्लाह से न डरे और उसकी दया व कृपा का उम्मीदवार न हो। तथा भयभीत व उम्मीदवार उस समय तक नही हो सकता जब तक वह भय खाने वाली व उम्मीद रखने वाली वस्तुओं पर क्रियान्वित न हो।

    32- बुद्धिमान

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति उस व्यक्ति से बात नही करता जिसके सम्बन्ध मे उसे डर हो कि वह मुझे झुटला देगा। और न उस व्यक्ति से प्रश्न करता जिसके बारे मे भय हो कि मना कर देगा। और न उस वस्तु के सम्बन्ध मे वचन देता जिसकी वह सामर्थ्य नही रखता।

    33-द्वि वादी

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि कितना नीच है वह व्यक्ति जो द्विवादी व द्विमुख वाला हो। ऐसा व्यक्ति अपने धर्म भाई के मुख पर उस की प्रशंसा करता है व उसके पीछे उसकी बुराई करता है।

    34- तर्क

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि प्रत्येक वस्तु के लिए एक तर्क है। और बुद्धि का तर्क चिंतन है, और चिंतन का तर्क चुप रहना है।

    35-युद्ध

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अपनी इच्छाओं से जिहाद (युद्ध) करो ताकि अपनी आत्मा को इन इच्छाओं से दूर रख सको। अपनी इन्द्रियों को वश मे रखने के लिए इच्छाओं से युद्ध करना इसी प्रकार अनिवार्य है जैसे शत्रु से युद्ध अनिवार्य है।

    36-ज्ञान

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जान लो कि ज्ञान मोमिन की खोई हुई वस्तु है अतः इसका प्राप्त करना अनिवार्य है।

    37-नीच व्यक्ति

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह की प्रजा मे सबसे नीच वह व्यक्ति है जिसकी अभद्रता के कारण लोग उसके पास उठने बैठने से बचें।

    38-पवित्र कार्य

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति सत्य बोलता है उसके कार्य पवित्र होते हैं।

    39-अप व्यय

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति अप व्यय करेगा उसके पास से नेअमते (सम्पत्ति) छिन्न भिन्न हो जायेंगी।

    40- ज्ञान व अध्यात्म

     हज़रत इमाम काज़िम अलैहिस्सलाम ने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति ज्ञान व अध्यात्म के साथ थोड़ी माया पर भी प्रसन्न हो सकता है,परन्तु ज्ञान व अध्यात्म के बिना पूर्ण संसार मिलने पर भी प्रसन्न नही होगा।

    ।।अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदिंव व आलि मुहम्मद।