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    हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम की अहादीस

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    हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम की अहादीस (प्रवचन)

    यहां पर अपने प्रियः अध्ययन कर्ताओं के अध्ययन हेतू   हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम के चालीस मार्ग दर्शक कथन प्रस्तुत किये जारहे है।

    1-मोमिन की तीन अवश्यक्ताऐं

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मोमिन को अवश्क्ता है कि अल्लाह  से तौफ़ीक़ (सामर्थ्य) प्राप्त करे,अपनी आत्मा से स्वंय उपदेश ले व नसीहत करने वाले की नसीहत को स्वीकार करे।

    2-रहस्य

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि किसी कार्य के दृढ़ होने से पहले उसका रहस्योदघटन उस कार्य के छिन्न भिन्न होने का कारण बनता है।

    3-सम्पत्ति की वृद्धि

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जब तक व्यक्ति अल्लाह का धन्यवाद करता रहता है अल्लाह उसके धन मे वृद्धि करता रहता है।

    4-तौबा

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि तौबा मे देर करना धोका है। और तौबा की देरी को अधिक बढ़ाना हैरानी (उद्विग्नता) है। और अल्लाह से टाल मटोल करने मे हलाकत (विनाश)है।

    5- प्रसन्नता व अप्रसन्नता

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी कार्य मे उपस्थित हो परन्तु उस कार्य से प्रसन्न न हो तो वह अनुपस्थित समान है। और अगर कोई किसी कार्य मे अनुपस्थित हो परन्तु उस कार्य से प्रसन्न हो तो वह उस कार्य मे उपस्थित व्यक्ति के समान है।

    6-मित्रता व शत्रुता

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह ने कुछ पैगम्बरों पर वही (संदेश) भेजी कि तुम्हारे दिल का संसार से उचाट हो जाना तुमको शीघ्र ही आराम पहुँचाने वाला है। और (दूसरों की ओर से मुँह मोड़ कर ) मेरी ओर आकृषित हो जाना तुम्हारे लिए मेरी ओर से तुमको  दिया गया सम्मान है।(किन्तु यह सब तो स्वंय तुम्हारे लिए है)अब प्रश्न यह है कि क्या तुमने मेरे किसी मित्र से मेरे कारण मित्रता व मेरे किसी शत्रु से मेरे कारण शत्रुता की?

    7-दुष्ट का साथ

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर कोई किसी दुष्ट को उम्मीदवार बना दे या उसकी इच्छा को पूरा कर दे तो उसका सबसे कम दण्ड यह है कि उसको समस्त वस्तुओं से वांछित कर दिया जायेगा।

    8-मूर्ख का चुप रहना

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर अज्ञानी व मूर्ख व्यक्ति चुप रहें तो मनुष्यों के मध्य मत भेद न हो।

    9-विश्वासघात

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि किसी विश्वासघाती का धरोहर होना भी विश्वासघाती होने के समान है।

    10-कथन का सुननना

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर कोई किसी की बात को सुन रहा है तो ऐसा है जैसे वह उसकी पूजा कर रहा है। अगर बोलने वाला अल्लाह की बात कह रहा है तो उसने अल्लाह की इबादत की और अगर बोलने वाला शैतान की ज़बान मे बोल रहा है तो उसने शैतान की इबादत की।

    11-कार्यों के कारक

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि चार वस्तुऐं व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करती हैं। (1)स्वास्थय (2) धनाढ़यता (3) ज्ञान (4) तौफ़ीक अर्थात अल्लाह की ओर से मिलने वाली समर्थ्य।

    12-अल्लाह की दृष्टि

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि यह जान लो कि तुम अल्लाह की दृष्टि से छिपे हुए नही हो। अतः यह देखो कि तुम किस हाल मे हो।

    13-अत्याचार

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अत्याचारी, अत्याचारी के सहयोगी व अत्याचार पर प्रसन्न रहने वाले सभी अत्याचार मे सम्मिलित हैँ

    14-धनी

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति अल्लाह की सहायता से धनी होगा लोग उससे अपनी अवश्यक्ता पूरी करेंगें। तथा जो व्यक्ति अल्लाह से डरेंगें लोग उनसे प्रेम करेंगें।

    15-अल्लाह

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जिसका पालन पोषण अल्लाह करे वह बर्बाद नही हो सकता। तथा जिसकी खोज मे अल्लाह हो वह उससे बच नही सकता।

    16-अल्लाह की महुब्बत

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि बहुत से लोगों से शत्रुता किये बिना अल्लाह की महुब्ब को प्राप्त नही किया जा सकता।

    17-गंभीरता

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि गंभीरता ज्ञानी का परिधान है अतः इसका त्याग न करो।

    18-ज्ञानी का कर्तव्य

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर ज्ञानी व्यक्ति सदुपदेश न करें, व भटके हुए व्यक्ति का मार्ग दर्शन न करें, मुरदे को देख कर उसे जीवित न करें, तो उन्होने अपने साथ विश्वासघात किया।

    19-उपद्रवी

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जानलो कि उपद्रवी की संगत मे न बैठना क्योंकि वह देखने मे बहुत अच्छा प्रतीत होता है परन्तु उसका प्रभाव बहुत बुरा होता है।

    20-शत्रुता

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जिस व्यक्ति ने तुम्हारी इच्छाओं का अनुकरण करते हुए सफलता के मार्ग को तुम से छिपाया उसने तुम से शत्रुता की।

    21-आदर

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मोमिन का आदर इस बात मे है कि वह अपनी अवश्यक्ता की पूर्ति हेतू किसी से प्रश्न न करे।

    22-ज्ञानानुरूप कार्य

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति ज्ञान के बिना कार्य करेगा वह सुधार से अधिक दुर्दशा बना देगा।

    23-इन्द्रीय इच्छा

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो इन्द्रीय इच्छांओं का अनुकरण करेगा वह शत्रु की अच्छाओं की पूर्ति करेगा।

    24-दृढ प्रतिज्ञा

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि दृढ प्रतिज्ञ रहो ताकि अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सको या उससे समीप हो सको।

    25-मित्र

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि निस्वार्थ व विश्वसनीय मित्र एक दूसरे के लिए सम्पत्ति हैं।

    26- अल्लाह की प्रसन्नता

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मनुष्य अधिक क्षमा याचना, सद् व्यवहार, और अधिक दान के द्वारा अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त कर सकता है।

    27-लज्जित न होना

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि शीघ्रता न करने वाला,परामर्श करने वाला व संकल्प करते समय अल्लाह पर भरोसा करने वाला कभी लज्जित नही हो सकता।

    28-सद्व्यवहारिता का त्याग

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति सद् व्यवहारिता को त्याग देगा वह दुखों मे ग्रस्त हो जायेगा।

    29-पहचान

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति किसी काम मे प्रवेश होने के मार्ग को नही पहचानेगा वह उससे निकलने के मार्ग को भी नही पहचान पयेगा।

    30-इच्छाऐं

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि इच्छाओ (के घोड़े) पर सवार व्यक्ति की ठोकरें इलाज योग्य नही होतीं।

    31-धन्वाद न करना

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि नेअमत (सम्पत्ति)का धन्यवाद न करना क्षमा न किया जाने वाले पाप के समान है।

    32-कुशलता

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि कुशलता अल्लाह का सर्व श्रेष्ठ उपहार है।

    33-दया

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अपने से निर्बल व्यक्तियों पर दया करो। और निर्बलों पर दया करके अल्लाह से अपने लिए दया माँगो।

    34-उपहार व मार्ग दर्शन

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जान लो कि जो अल्लाह के उपहार को स्वीकार नही करता उसको अल्लाह के उपहार प्राप्त नही होते। और जो अल्लाह के मार्ग दर्शन को स्वीकार नही करता वह भटक जाता है।

    35-अल्लाह व बन्दों का बदला

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मनुष्यों का बदला अल्लाह के बदले के बाद तथा मनुष्यो की प्रसन्नता अल्लाह की प्रसन्नता के बाद है। (अर्थात पहले अल्लाह को प्रसन्न करो व बाद मे मनुष्यों को प्रसन्न करो)

    36-अल्लाह पर विश्वास

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह पर विश्वास समस्त मूल्यवानों का मूल्य व समस्त उच्चताओं को प्राप्त करने की सीढी है।

    37-अल्लाह पर भरोसा

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो अल्लाह पर भरोसा करता है अल्लाह उसे प्रसन्न कर देता है।

    38- (ज़ोह्द) इन्द्री निग्रह

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि ज़ोह्द की अन्तिम सीमा पापो से दूरी है।

    39-लालच

     हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि व्यक्ति को ख़राब करने वाली कोई वस्तु लालच से बढ़कर नही है।

    40-परख

      हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति किसी को परखे बिना उसका अनुयायी बन जायेगा तो वह अपने को थका देने और मार डालने वाली विपत्ति मे ग्रस्त कर लेगा।

    ।।अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव वा आलि मुहम्मद।।