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    हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम की अहादीस

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    हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम की अहादीस (प्रवचन)

     हम यहां पर अपने प्रिय़ः अध्ययनकर्ताओं के लिए   हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  के चालीस मार्ग दर्शक कथन प्रस्तुत  कर रहे हैं।

    1-विपत्ति व कल्याण

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि कभी कभी ऐसा होता है कि हरीस(लालची) संसारिक वस्तुओं मे से किसी को प्राप्त करना चाहता है। परन्तु वह वस्तु जब उसको प्राप्त होती है तो उसके लिए मुश्किल( समस्या) बन जाती है। और कभी कभी ऐसा होता है कि व्यक्ति परलोक के लिए कार्य करने से बचता है या उसको अरूची पूर्ण करता परन्तु जब उसको कर देता है तो उसके द्वारा उसका कल्याण हो जाता है।

    2- सर्व श्रेष्ट महानता

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि जिहाद से बढ़कर कोई महानता नही है और नफ़्स( इन्द्रियों) को वश मे करने से बढ़कर कोई जिहाद नही है।

    3-नसीहत

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि मै तुमको पाँच बातों के लिए नसीहत करता हूँ।

    (1) अगर तुम पर अत्याचार किये जायें तो तुम अत्याचार न करो।

    (2) अगर तुम्हारे साथ विश्वासघात किया जाये तो तुम विश्वासघात न करो।

    (3) अगर तुमको झूटा कहा जाये तो क्रोधित न हो।

    (4) अगर तुम्हारी प्रशंसा की जाये तो प्रसन्न न हो।

    (5) अगर कोई तुम्हारी भर्त्सना करे तो विवेक से काम लो।

    4–पवित्र कथन

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि पाक कलाम( पवित्र कथन) जिससे भी सुनो उसको अपनाओ (ग्रहण करो) चाहे कहने वाला उस पर  खुद अमल न करे (स्वंय क्रियान्वित न हो।)

    5-ज्ञान व संतोष (हिल्म)

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि कोई भी दो वस्तुऐं आपस मे मिलकर इतनी शोभनीय नही हो सकती जैसे ज्ञान व हिलम  मिलकर शोभनीय हो जाता है।

    6-मानव समाज की महानता

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि समस्त महानता तीन बातों मे है (1) धर्म मे गहराई के साथ चिंतन (2) विपत्तियों पर सब्र करना अर्थात धैर्य से काम लेना (3) जीविका के व्यय के लिए योजना बद्ध कार्य करना।

    7-तीन विशेषताऐं

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि तीन विशेषताऐं संसार व परलोक के लिए हैं। (1) अत्याचार करने वाले को क्षमा करना। (2) नाता तोड़ने वाले के साथ नाता जोड़ना। (3) मूर्खतापूर्ण व्यवहार के समय संयम से काम लेना।

    8-दुआ

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह इस बात को पसन्द नही करता कि किसी इच्छा की पूर्ति के लिए बन्दे आपस मे एक दूसरे की खुशामदें करें। परन्तु वह इस बात को पसन्द करता है कि बन्दे उससे बार बार प्रश्न करे। वह अल्लाह जिसका जाप महान है। वह इस बात को पसन्द करता है कि उससे प्रश्न किया जाये व जो कुछ उसके पास है वह उससे माँगा जाये।

    9-ज्ञानी व तपस्वी

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि वह ज्ञानी जिसके ज्ञान से जनता लाभ प्राप्त करे वह सत्तर हज़ार तपस्वीयों से श्रेष्ठ है।

    10-पाप से बचना

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि कोई भी व्यक्ति उस समय पाप से सुरक्षित नही रह सकता जब तक वह अपनी ज़बान को क़ाबू मे न रखे।

    11-तीन फल

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो सत्य बोलता है उसके कार्य पवित्र होते हैँ।और जिसके विचार पवित्र होते हैं वह धनी होता है।और जो अपने परिवार के साथ अच्छा व्यवहार करता है उसकी आयु बढ़ा दी जाती है।

    12-आलस्य से मना

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि आलस्य व कम दिली से बचों क्योंकि यह दोनो समस्त बुराईयों की जड़ हैं। जो आलस्य करेगा वह दूसरो के अधिकारों की पूर्ति नही कर पायेगा। व जो तंग दिल होगा वह हक़ पर सब्र नही कर सकेगा।

    13- न्याय

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि परलय के दिन वह व्यक्ति बहुत अधिक पछताऐंगे जो संसार मे न्याय की प्रशंसा करते थे परन्तु स्वंय न्याय पूर्वक कार्य नही करते थे।

    14-सिलाहे रहम (रक्त सम्बन्धियों सें मेल मिलाप)

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि सिलाहे रहम मनुष्य के क्रिया कलापों को पवित्र करता है, धन को बढ़ाता है, विपत्तियों को टालता है, परलोक के हिसाब किताब को आसान करता है व आयु को बढ़ाता है।

    15-शिष्ठाचार के साथ बातचीत

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि लोगों से कहो कि श्रेष्ठ यह है कि वह जिस प्रकार अपने आपको संबोधित कराना पसंद करते है उसी प्रकार तुम से बोलें।

    16-अगर मोमिन हो तो

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर तुम मोमिन हो तो अल्लाह के अतिरिक्त किसी दूसरे को अपना राज़दार न बनाओ और न अल्लाह के अतिरिक्त किसी पर भरोसा करो। क्योंकि कुऑन मे वर्णित आश्यों के अतिरिक्त सम्बन्धों के समस्त स्रोत व राज़ अल्लाह की दृष्टि मे अमान्य हैं।

    17-मोमिन मोमिन का भाई

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि मोमिन मोमिन का भाई है। न वह उसे गाली देता है न उसे किसी वस्तु से वाँछित करता है।

    18-ग़ीबत व बोहतान की परिभाषा

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि अपने दीन बन्धु की किसी ऐसी बात को किसी से कहना जिसको अल्लाह ने छिपाया हो ग़ीबत कहलाता है। तथा किसी से उस दोष को सम्बन्धित करना जो उसमे न पाया जाता हो यह बोहतान कहलाता है।

    19-गालियाँ देने वाला

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह गालियाँ देने वाले नीच व्यक्ति से क्रोधित रहता है।

    20-शिष्टाचार

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि शिष्टाचारी वह है जो उस स्थान पर बैठना पसंद करे जो उसके योग्य न हो। (अर्थात निम्ण स्थान) व जब किसी से मिले तो स्वंय सलाम करे व बहस करने से बचे चाहे वह हक़ पर ही क्यों न हो।

    21-सर्व श्रेष्ठ तपस्या

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अपने पेट व जनेन्द्री को पवित्र रखना सबसे बड़ी तपस्या है।

    22-सच्चे शिया के लक्षण

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो व्यक्ति अल्लाह से न डरता हो और अल्लाह के आदेशो का पालन न करता हो वह हमारा शिया नही है।

    23– पाप का कारण

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति पाप करता है तो इस का अर्थ यह है कि उसने अल्लाह को नही पहचाना है।

    24-बुद्धि

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि जब अल्लाह ने बुद्धि को उत्पन्न किया तो उससे प्रश्नो उत्तर किये। उससे कहा कि आगे आ तो वह आगे आगयी। जब उससे कहा कि पीछे हट तो वह पीछे हट गयी। अल्लाह ने कहा कि मैं अपनी महानता व सम्मान की सौगन्ध के साथ कहता हूँ कि मैं समस्त संसार मे तुझ से अधिक किसी से प्रेम नही करता हूँ। मैं जिसको अधिक मित्र रखता हूँ उसे पूर्ण रूप से तुझे (बुद्धि) प्रदान करता हूँ। समस्त आदेश व निषेध तथा पुरूस्कार व दण्ड तुझे (बुद्धि को) दृष्टि मे रखते हुए हैं।

    25-बुद्धि के आधार पर

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि अल्लाह प्रलय के दिन प्रत्येक व्यक्ति का हिसाब किताब उसको प्रदान की गयी बुद्धि को दृष्टि मे रखते हुए करेगा।

    26-ज्ञान

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि ज्ञानीयों से ज्ञान प्राप्त करो तथा अपने धर्म बन्धुओं को वह ज्ञान प्रदान करो। चूँकि इसी प्रकार ज्ञानीयों ने वह ज्ञान तुम्हे प्रदान किया है। तुम मे से जो भी एक दूसरे को ज्ञान प्रदान करेगा उसको ज्ञान प्राप्त करने वाले से भी अधिक फल दिया जायेगा।

    27-बिना ज्ञान

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर कोई बिना ज्ञान के मनुष्यों को धार्मिक आदेश देता है तो रहमत लाने वाले फरिश्ते व दण्डित करने वाले फरिश्ते उस व्यक्ति पर लानत करते हैँ। और उसके आदेशानुसार कार्य करने वालों के पाप भी उसको सम्मिलित होंगे।

    28–नरकीय ज्ञानी

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर कोई विद्वानो पर अपवाद करने मूर्खों से लड़ने या समाज को अपनी ओर आकृषित करने के उद्देश्य से ज्ञान प्राप्त करे तो ऐसे व्यक्ति का स्थान नरक है।

    29-संसार व दीन (धर्म)

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि अल्लाह  संसार अपने मित्रों व शत्रुओं दोनो को देता है। परन्तु दीन केवल अपने मित्रो को देता है।

    30-तीन अवगुण

    इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने कहा कि अपने गुनाहों को भूल जाना। अपने पुण्यों को अधिक समझना व अपने मत को सर्व श्रेष्ठ समझना यह तीनो अवगुण मनुष्य की कमर तोड़ देते हैं।

    31-पारसा फ़कीह के लक्षण

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम अलैहिस्सलाम ने कहा कि पारसा फ़क़ीह ( फ़कीह अर्थात धार्मिक आदेशों का ज्ञान रखने वाला पुरूष) वह है जो संसारिक मोह माया के जाल मे न फसा हो और परलोक की ओर आकृषित हो तथा आदरनीय पैगम्बर की सुन्नत (जीवन शैली) पर कार्य करता हो।

    32-मनोविनोद

    इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह उस व्यक्ति से प्रेम करता है जो सभा मे बैठकर मनो विनोद करे तथा लोगों को हंसाये। इस शर्त के साथ कि उसके कथनो मे अशलीलता व अभद्रता न हो।

    33-तीन बुराईयां

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि तीन बुराईयाँ ऐसी हैं कि उनमे ग्रस्त व्यक्ति मरने से पहले उनके दण्ड को भुगतता है।— (1) अत्याचार (2) रक्त सम्बन्धियों से नाता तोड़ना (3) झूटी सौगन्ध खाना कि यह अल्लाह से लड़ने समान है।

    34-अल्लाह से माँगना

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह इस बात को बहुत अधिक प्रियः रखता है कि उससे प्रार्थना की जाये व जो उसके पास है उससे माँगा जाये।

    35-अल्लाह से दुआ

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह की सौगन्ध कोई बन्दा अल्लाह से दुआ न करे अगर उसके द्वारा माँगी गई वस्तु उसको प्रदान न हो।

    36-दुआ का उचित समय

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह उस बन्दे से अधिक प्रेम करता है जो उससे अधिक दुआ माँगता है। तुम्हे चाहिए कि सुबह को सूर्य निकलने से पहले दुआ माँगा करो। क्योकि इस समय आसमान के कपाट खुलते है और मनुष्यों को जीविका प्रदान की जाती है। तथा इस समय बड़ी दुआऐं भी स्वीकृत होती हैं।

    37-धर्म बन्धु के लिए दुआ

      हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि वह दुआ जिसके स्वीकृत होने की आशा अधिक होती है, और वह दुआ जो अति शीघ्र स्वीकृत होती है, वह अपने धर्म बन्धु के लिए उसकी अनुपस्थिति मे की गई दुआ है।

    38-परलय के दिन नही रोयेंगे

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम  ने कहा कि परलय के दिन समस्त लोग रोयेंगे परन्तु तीन समुदाये ऐसे है जो नही रोयेंगे— (1) व्यक्तियों का वह समुदाय जो रात्री मे जाग कर अल्लाह के नाम का जाप करता हैं। (2) व्यक्तियों का वह समुदाय जो अल्लाह के भय से संसार मे रोता हैं। (3) व्यक्तियों का वह समुदाय जो पराई स्त्रीयों पर दृष्टि नही डालता।

    39-रेशम का कीडा

     हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम ने कहा कि संसारिक मोह माया मे फसा व्यक्ति रेशम के कीड़े के समान है। क्योकि वह जितना अधिक रेशम अपने ऊपर लपेटता जाता है उसके बाहर निकलने का मार्ग उतना ही तंग होता जाता है। और अन्त मे वह इसी शोक मे मर जाता है।

    40- द्विवादी

    हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम अलैहिस्सलाम ने कहा कि द्वि वादी व्यक्ति बहुत नीच होते हैं। वह व्यक्ति के सम्मुख उसकी प्रशंसा करते हैं। तथा उसके पीछे उसकी बुराई करते हैं। अगर वह धनी होता है तो उससे ईर्ष्या करते है। और अगर वह विपत्ति मे घिर जाता है तो उसकी सहायता नही करते।