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    हज इस्लामी जगत के लिए अवसर : 1

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    काबा, एकेश्वरवाद का केन्द्र और ज़मीन पर पवित्र स्थलों में से एक है। ऐसा स्थान, जहां शताब्दियों से ईश्वरीय दूत और उसके नेक बंदे उपासना करते थे और इसके आध्यात्मिक वातावरण से लाभान्वित होते रहे हैं।

    हज की आध्यात्मिक यात्रा में मोमिन अर्थात ईश्वर पर आस्था रखने वाले मुसलमान को यह अवसर मिलता है कि

    वह ईश्वर के निकट होने के मनमोहक क्षणों को दूसरी तरह आभास करे।

    इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाह हिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई के निकट सही हज वह है जो मनुष्य को भीतर से परिवर्तित कर दे और लोगों के दिलों में एकेश्वरवाद,

    ईश्वर से संपर्क और भरोसे का पौधा लगाए।

    हज जिस तरह एक मूल्यवान व्यक्तिगत उपासना है उसी तरह वैश्विक महासम्मेलन और इस्लामी राष्ट्र का प्रतीक है। हज संस्कार में लाखों लोग एकत्रित होते हैं

    और सामूहिक उपासना करके उनके दिल एक दूसरे से जुड़ जाते हैं। स्पष्ट सी बात है कि हज की अपार संभावनाएं मुसलमानों को उचित अवसर दे सकती है।

    वर्तमान समय में मुसलमानों से वर्चस्ववादी और साम्राज्यवादी शक्तियों का विरोध पहले से अधिक स्पष्ट हो गया है।

    शत्रुओं से मुक़ाबला करने के लिए सैद्धांतिक उपायों का खोजा जाना, इस्लामी जगत की मुख्य आवश्यकताओं में से है।

    पिछले कुछ समय से इस्लाम के शत्रु निर्धारित योजना के अंतर्गत इस्लाम की छवि को बिगाड़कर प्रस्तुत कर रहे हैं और मुसलमानों को आतंकवादी और हिंसक कार्यवाहियों में लिप्त बता रहे हैं।

    मक्के में मुसलमानों का महासम्मेलन, आध्यात्म और उपासना की आत्मा में वृद्धि के अतिरिक्त, मुसलमानों के लिए अवसर है

    ताकि वे इस्लामी जगत की समस्याओं और चुनौतियों के समाधान के लिए विचार विमर्श करें।

    इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अपने एक बयान में इस्लामी जगत की वर्तमान स्थिति की

    पैग़म्बरे इस्लाम सलल्लाहो अलैह व आलेही वसल्लम के समय में अहज़ाब नामक युद्ध की स्थिति से दी है।

    अहज़ाब युद्ध में समस्त अनेकेश्वरवादी एकजुट होकर अपनी समस्त क्षमताओं और संसाधनों का प्रयोग करके इस्लाम को जड़ से उखाड़ फेंकने चाहते थे।

    इस युद्ध में मुसलमानों ने अद्वितीय एकता, पैग़म्बरे इस्लाम के अनुसरण और विशेष रणशैली को अपनाकर नास्तिकों और अनेकेश्ववादियों को पराजय कर दिया।

    वरिष्ठ नेता इस बारे में कहते हैं कि वर्तमान स्थिति अहज़ाब युद्ध की भांति है और हज में मुसलमान राष्ट्रों की एकता और वैभव का प्रतीक, इस्लाम के शत्रुओं के मोर्चे को तोड़ सकता है।

    आत्मा प्रदान करने वाले हज के समीर से वातावरण एक रंग और एक आवाज़ हो गया है। हाजी मक्के के आकाश तले सफ़ेद कपड़ों को पहन कर निष्ठा और भक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं।

    हज में रंगों, जातियों और राष्ट्रों के अंतर को एक ओर रख दिया जाता है और सभी लोग व्यवहारिक रुप से एकेश्वरवाद के बिन्दु पर

    समानता और मित्रता का व्यवहारिक रूप से अनुभव करते हैं तथा हज के महा संस्कार में सहृदयता की चरमसीमा को दर्शाते हैं।

    किन्तु शत्रु मुसलमानों में मतभेद और विवाद के बीज बोना चाहते हैं। यह ऐसी स्थिति में है कि ईश्वर ने

    पवित्र क़ुरआन की विभिन्न आयतों में मुसलमानों को एकजुट रहने का अह्वान किया है और मतभेदों तथा विवादों के प्रति सचेत किया है।

    पवित्र क़ुरआन ने मोमिनों को ईश्वर की रस्सी को पकड़े रहने और वाद-विवाद से दूर रहने का निमंत्रण दिया है।

    जैसा कि सूरए आले इमरान की आयत नंबर तीस में कहा गया है कि सभी लोग ईश्वर की रस्सी को पकड़े रहो और मतभेद और वाद-विवाद से दूर रहो।

    इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता शत्रुओं के फूट डालने के संबंध में चेतावनी देते हुए कहते हैं “इस्लामी राष्ट्रों और सरकारों को शत्रुओं के मतभेद फैलाने वाले

    षड्यंत्रों और धूर्तताओं से सचेत रखना चाहिए अन्यथा सम्राज्यवादी शत्रु इस्लाम को हानि पहुंचा देंगे। उन्होंने कहा कि शत्रु बड़ी सूक्ष्मता से इस्लामी

    समाज में पाये जाने वाले विवादित मुद्दों को बढ़ा चढ़ाकर प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं और मुसलमानों को एकता प्रदान करने वाला हज इन प्रयासों को विफल बना देगा।

    आज इस्लामी जगत में कुछ मतभेद पाए जाते हैं और शत्रु इन मतभेदों का दुरूपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं। वरिष्ठ नेता का मानना है कि

    शीया और सुन्नी मुसलमानों के मध्य दिगभ्रमित और अतिवादी विचारधाराओं को सुदृढ़ करना, मतभेद उत्पन्न करने के लिए

    इस्लामी समाज के शत्रुओं की शैलियों में से है। क्योंकि मुसलमान जैसे ही इन विवादों पर नियंत्रण पा जाएंगे और समानताओं पर

    अपना ध्यान केन्द्रित कर लेंगे तब शत्रुओं के षड्यंत्र विफल हो जाएंगे और मुसलमानों के मध्य सहृदयता और एकता में वृद्धि होगी।

    इस्लामी क्रांति के संस्थापक हज़रत इमाम ख़ुमैनी हज की भव्य सामाजिक उपलब्धियों में से एक, एक मंच पर मुस्लिम समाज को एकत्रित करना और

    मुसलमान गुटों के मध्य विवादों को दूर करना बताते हैं। इसी के साथ ही वे एकता उत्पन्न करने में वक्ताओं और विचारकों की भूमिका को महत्त्वपूर्ण एवं

    निर्णायक मानते हैं तथा हज में इस वर्ग की भव्य उपस्थिति पर बल देते हैं। एक ईश्वर, एक क़िब्ला, एक क़ुरआन और पैग़म्बरे इस्लाम की जीवनी और उनके

    कथनों का अनुसरण, समस्त मुसलमानों के संयुक्त बिन्दु हैं।