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    हज इस्लामी जगत के लिए अवसर : 2

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    एक अच्छी बात है कि काबे की पावन धरती पर मौजूद विचारक और बुद्धिजीवी इस्लामी जगत की समस्याओं और इसके कुछ गहन मतभेदों को दूर करने के लिए संयुक्त प्रयास करें

    और कार्यक्रम बनाएं। वर्तमान समय में पाकिस्तान में बहुत से लोग बाढ़ के विनाशकारी परिणामों सामना कर रहे हैं और बहुत ही विषम परिस्थिति में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

    क्या इन समस्याओं पर विचार विमर्श के लिए हज से बेहतर कोई और अवसर हो सकता है?

    इस समय इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान या फ़िलिस्तीन में इन देशों के अतिग्रहण के कारण उपजी समस्याओं ने इन देशों के दसियों लाख मुसलमानों के जीवन को शांति व सुरक्षा से वंचित कर दिया है।

    क्या मुसलमानों पर इन अत्याचारों से विरक्तता दर्शाने के लिए हज से बेहतर कोई अवसर हो सकता है?

    इस्लामी क्रांति के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी रहमतुल्लाह अलैह ने बड़ी सूझबूझ दूरगामी दृष्टि रखते हुए मुसलमानों से आह्वान किया कि वे हज के दिनों में अनेकेश्वरवादियों से विरक्तता की

    घोषणा शीर्षक के अंतर्गत समारोह आयोजित करें। इस समारोह में ईश्वरीय घर के दर्शनार्थी इस्लाम और मुसलमानों के शत्रुओं से,

    जिनमें अमरीका और ज़ायोनी शासन मुख्य रूप से हैं, विरक्तता की घोषणा करते हैं और मुसलमानों पर अत्याचार का समाचार विश्वासियों तक पहुंचाते हैं।

    यह कहा जा सकता है कि अमरीका और कुछ पश्चिमी देशों में पवित्र क़ुरआन के अनादर की हृदयविदारक घटना, इस्लाम से खुली शत्रुता का प्रमाण है।

    मुसलमानों को आतंकवादी व हिंसक प्रवृत्ति वाला दर्शाना, पश्चिमी देशों के इस्लामोफ़ोबिया नामक षड्यंत्र का एक भाग है।

    यह षड्यंत्र हाल में कुछ चरमपंथियों व नस्लभेदियों द्वारा अंतिम ईश्वरीय किताब के अनादर के रूप में सामने आया।

    इस अपमानजनक गतिविधि के पीछे लिप्त तत्वों व शत्रुओं की पहचान उन विषयों में है जिसकी हज के भव्य समारोह में समीक्षा की जा सकती है।

    इस प्रकार के षड्यंत्रों से निपटने का एक मार्ग क़ुरआन की शुद्ध शिक्षाओं का प्रसार है। ये ऐसी शिक्षा है जो हर व्यक्ति की प्रवृत्ति पर प्रभाव डालती है

    और जागरुक अंतरात्माओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।

    यदि पवित्र क़ुरआन की उच्च शिक्षाएं सुनियोजित रूप में विश्व स्तर पर प्रसारित हों तो बहुत से लोग इस आसमानी किताब की ओर उन्मुख होंगे।

    इसलिए इस्लाम के विरुद्ध शत्रुओं के षड्यंत्र और उससे निपटने के मार्गों की समीक्षा उन विषयों में है जिस पर हज के अवसर पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    इस्लामी जगत की एक पुरानी पीड़ा फ़िलिस्तीन का विषय है। कई वर्षों से ज़ायोनी शासन ने ग़ज़्ज़ा पट्टी का परिवेष्टन कर रखा है

    और इस क्षेत्र के फ़िलिस्तीनियों के लिए मूलभूत आवश्यकता की वस्तुएं व दवाएं नहीं पहुंचने दे रहा है।

    इस समय न केवल मुसलमान बल्कि विश्व के सभी स्वतंत्रताप्रेमी समाज ग़ज़्ज़ा की जनता की समस्याओं के अंत और उन्हें मानवीय सहायताएं भेजने की मांग कर रहे हैं।

    इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सय्यद अली ख़ामेनई फ़िलिस्तीन के विषय पर विचार विमर्श व समाधान निकालने के संबंध में

    हज की व्यापक क्षमता की ओर संकेत करते हुए कहते हैः एक राजनैतिक दल के रूप में ज़ायोनीवाद ने जिससे स्वंय यहूदी भी घृणा करते हैं साठ वर्षों से अधिक समय से

    फ़िलिस्तीन की इस्लामी भूमि और मुसलमानों के पहले क़िब्ले का अतिग्रहण कर रखा है और हर दिन वह नित नए अपराध करता है

    किन्तु अधिकांश इस्लामी सरकारें फ़िलिस्तीन के मुसलमानों की गुहार और उनकी सहायता की ओर से मौन धारण किए हैं।

    हज का भव्य आंदोलन इस रक्षात्मक मुद्रा व मतभेद के कारण का पता लगाने और फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के प्रति समस्त मुसलमानों के समर्थन में पूर्णतः प्रभावी हो सकता है।

    इस्लामी जगत के विचारकों व बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि मुसलमान राष्ट्र हज के विशाल समारोह के लिए सुव्यवस्थित उद्देश्य को दृष्टिगत रखें तो वे

    एकता व समरस्ता द्वारा महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित कर सकते हैं। जागरुकता लाने वाले सम्मेलनों का आयोजन और इस्लामी जगत की

    समस्याओं व चुनौतियों के संबंध में बुद्धिजीवियों व धर्मगुरुओं के बीच विचार विमर्श के स्वाभाविक रूप से अच्छे परिणाम निकलेंगे।