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    1- इमाम अली (अ)

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    हज़रत अमिरुल मोमेंनीन (अ) अबुतालिब (अ) के पुत्र, माता फातिमा बिन्ते असद, और रसूले खुदा पैग़म्बरे अकरम (स.) के दामाद, और समस्त इमामों के पिता है। एंव रसूले खुदा के बाद समस्त मोमिन के इमाम है, जो तेरह (13) रजब गुरुवार के दिन रसूले खुदा (स.) के जन्म के तीस साल बाद मक्के (ख़ाना-ए काबा) में जन्म लाभ किया, और शबे जुमअ 19 रम्ज़ानुल मुबारक मस्जिदे कूफ़ा के मेंहराबे इबादत में अब्दुर रहमान इब्ने मुल्जि़म ने तलवार मारी और तीन दिन बाद 63 साल के उम्र में दरजे शहादत और विजय प्राप्त की. और परवरदिगार से जा मिले।

    हज़रत इमाम हसने व इमाम हुसैन (अ) ने ग़ुस्ल व कफ़न का काम अंजाम देकर मृत देह को नजफ़े अशरफ़ में आपकी वसीयत के मुताबिक उसी स्थान पर पिनहानी तौर पर दफ़न किया ताकि ख़वारिज से शान्ति व संरक्षण रहे, उस के बाद हज़रत इमाम जाफर सादिक़ व इमाम काज़िम (अ) ने उन पवित्र स्थान को बताया।

    हज़रत अमीरूल मोमेंनीन अली इब्ने अबी तालिब (अ) के लिए बहुत सारे गुणावली है जो गिन्ती के बाहर है, अली (अ) प्रथम व्यक्ति है जितने हज़रत रसुल (स.) पर विश्वास किया, और आपने जीवन में किसी प्रकार की मूर्ती पूजा नहीं की, और समस्त प्रकार युद्धों में विजय प्राप्त की लेकिन किसी प्रकार के युद्ध से नहीं भागे।