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    2- इमाम हसन (अ)

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    हज़रत इमाम हसने (अ) आप अली इव्ने अबितालिब (अ) के एक सुमहान बालक है, माता हज़रत फातिमा ज़हरा (सालाः) रसूले खुदा की एकलौती बालिका है। हज़रत इमाम हसने (अ) हज़रत रसूल (स.) के नवासे और हज़रत अली (अ) के वाद दूसरे इमाम है।

    आप पवित्र रम्ज़ानुल मुवारक़ के 15 तारीख मगंल के दिन तीसरी हिज़री मदीना मुनव्वरह में जन्म लाभ किया, और जुमेंरात के दिन 28 सफ़र 49 हिजरी 48 बर्स में ज़हर से शहीद कीये गये।

    आप के भाई हज़रत इमाम हुसैन (अ) ने ग़ुस्ल व कफ़न का काम अंजाम दिये आप जन्नतूल बक़ी में मदफ़ून है। लेकिन दुःख के साथ कहना पड़ता है कि इस (जन्नतूल बक़ी को वहाबीयों ने नीस्त व नाबूद कर दिया है।

    आप आपने ज़माने में इल्म व ईबादत में हर एक से बड़े आलिम व आबिद और रसूले अकरम (स.) से मिलते जुलते थे और आप आपने ज़माने के दान व खैरात में हर एक से आगे थें।

    आपके सम्पर्क में बहुत सारी घटना पाई जाती हैं ज़िस में से एक घटना पेश कर रहा हूं। एक दिन आपकी कनीज़ आपकी सेवा में एक फूल पेश किया आपने फरमयाः मैं ने तुम को अल्लाह की राह में आज़ाद किया उस के बाद फरमयाः अल्लाह ने हम सब को इसी तरह तर्बीयत की है। जैसा की क़ुरआन मजीद में इर्शाद है ( जब कोई तुम्हारी सेवा में पुरुष्कार ले आये उससे अच्छा पुरुष्कार तुम पेश करो )।

    आपकी बुर्दबारी के बारे में कहा जता हैः कि एक दिन एक शामीने आप को देखकर गालियाँ देनी शुरु की आप उस को देखकर ख़ामोश रहे ताकि वह ख़ामोश हो ज़ाये। उस के बाद आप उस के निकट हंसते हुए सलाम करके फरमयाः भाई क्या गरीब व मूसाफ़िर हो या कुछ भूल गये हो। (( अगर मुझ से क्षमा चाहते हो तो क्षमा कर दुंगा, अगर कोई चीज़ मागंते हो में प्रदान करुंगा, अगर मुझे अपना समझते हो मै क़बूल करुंगा, अगर भूके हो तो खाना खिलाउंगा, अगर प्यासे हो तो सैराब करूंगा, अगर नंगें हो लिबास दुंगा व अगर मोहताज हो तो ज़रूरत पूरी करुंगा, अगर किसी ने तुम्हें भगा दिया है तो पनाह दुंगा, अगर कोई काम हो उसे अंजाम दुंगा)।

    मर्द शामी आपके मुबारक श्ब्दों को सुन कर रोने में मशगूल होगया और दिलही दिल में कहने लगे मुअविया ने झूटी बातें बताईं और मुझे गलत व पथ भ्रष्ट रास्ते में उतारा. उसके बाद कुछ देर के बाद में कहा मैं गवाही देता हूँ आप ज़मीन पर हुज्जते खुदा हैं।

    (الله اعلم حيث يجعل رسالته) (17)

    (अल्लाह बेहतर ज्ञान रखता है अपनी रिसालत को किस ख़ान्दान में प्रदान करें)।