islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. 3- इमाम हुसैन (अ)

    3- इमाम हुसैन (अ)

    Rate this post

    हज़रत इमाम हुसैन (अ) अली इव्ने अबि तालिब (अ) के बालक, सम्मानिता माता हज़रत फातिमा ज़हरा (सालाः) रसूले खुदा की एकलोती बेटी है। हज़रत इमाम हुसैन (अ) हज़रत रसूल (स.) के नवासे और आपने भाई हसने (अ) के बाद तीसरे रहबर (धार्मिक नेता) है। आपने तीसरी शअबान चार हिजरी मदीना मुनव्वरह में जन्म लिया और दस मुहर्रम सन 61 हिजरी में (प्रसिद्ध व मअरुफ़ धटना) कर्रबला में हॄदय काँप प्यास के अबस्था में यज़ीदीयों ने शहीद किया। आपके शहादत के तीन दिन बाद, हज़रत इमाम ज़ैनुल अबेदीन (अ) ने खून से सनी हूई पाक लाश को उसी कर्बला में दफन किया, आपकी उम्रे मुबारक मात्र 57 साल थे।

    आपके तमाम सिफाते व गुणावली के लिए यही कहना काफ़ी है कि आप रसूले खुदा (स.) के ज़िगर के एक टुकड़े है. पैग़म्बरे अकरम (स.) ने फ़रमायाः

    (حسين منی و انا من حسين)

    हुसैन मुझ से है और मैं हुसैन से हुँ

    और इमाम हसने व इमाम हुसैन (अ) के लिए फरमायाः

    هما ريحانتای فی الدنيا

    हसने और हुसैन दो फुल हैं जिसमें हमारी खुश्बू पाई जाती है और वह दोनों धरती में उपस्थित है। एक और स्थान में फरमायाः

    الحسن والحسين سيدا شباب اهل الجنة

    हसने और हुसैन जन्नत के जवानों के नेता है। दूसरी हदीस में फरमायाः

    الحسن والحسين امامان قاما او قعدا

    हसने व हुसैन दो इमाम है चाहे क़्याम करे या क़्याम ना करें। इमाम हुसैन (अ) आप हर एक से ज़्यादा ज्ञान रखने वाले व ईबादत करने वाले व्यक्ति में से थें और आपने पिता हज़रत अली व रसूले खुदा (स.) के एक आयेनाह थें।

    हज़रत इमाम हुसैन (अ) अधिक रातों में आपने काधों पर पैसा का थैला भर कर ग़रीब व बेसहारा व्यक्तियों के लिए ले जाते थे। और यह थैला का असर उस समय मअलूम हुआ जब आप शहादत पाये, इस से स्पष्ट होता है कि आप बहुत करीम व बुर्दबार व मेंहरबान थें। हदीस में आया है कि एक मैदान या बियाबान नशीन अरब कुछ कविता पढ़के आप से क्षमा मांगी,आपने उसके बदले में उस को चार हज़ार दिर्हम देकर उस से कहाः मैने जो कुछ तुमहें दिया है बहुत कम है।

    (यहाँ अरवी भाषा थी जिस को तर्जमा कर दिया गया है)

    वह व्यक्ति पैसा लेकर रोना शुरु किया, आपने उस्से कहाः शायद पैसा कम होने के कारण तुम नाराज़ी हो? उस ने कहा नहीं हमारा रोना इस लिए है कि यह ज़मीन किस तरह एक दानी व्यक्ति को छुपा के रखेगी।

    हाँ! इमाम हुसैन (अ) एक ऐसे व्यक्ति थें जिसने अपना शरीर का ख़ुन देकर आपने नाना के ईस्लाम को अनंत जीवन प्रदान किया। इमाम हुसैन (अ) का इंक़लाब एक ऐसा इंक़लाब था कि उस का उदाहरण अतीत ज़माने में भी नहीं मिला और ना मिलेगा। इमाम हुसैन (अ) आपने भाई के बाद धरती में उत्तम व्यक्ति थे जिसने अपना शरीर का ख़ुन देकर धर्म की मज़बूत जड़ को बचाया है।