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    मदीने की हिज़रत

    मदीने की हिज़रत
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    आपकी तेरह साल की बेसात, मक्के के काफिर व मुशरेकीन लोगों ने नीयत किया था कि आप को इस शहर से बाहर किया जाए, यही कारण था कि आपके उपर इतना अत्याचर व सितम डाया गया, आख़िर में अल्लाह की तरफ़ से पैग़ाम पहुचा, आप मक्के को परित्याग़ करके मदीना की तरफ़ हिज़रत करे। और यह हिज़रत मुस्लमानों के लिए एक पुर बर्कत व पुर रहमत में परिवर्तन हो गया था. कि समस्त प्रकार आने वाली घटनाओं को इसी हिजरी साल में नाम रख़ा गया था।

    और मदीना के मुस्लमानों में अधिक से अधिक होने लगा, और इस्लामी राष्ट्र और शक्ति में बेशि होने लगी, इस्लाम की सम्मान दीन वा दीन बड़ती गई, हत्ता पृथ्वी के समस्त प्रकार समाज और तमद्दुन इस्लाम के तमद्दुन में परिवर्तन हो गया।

    पैग़म्बरे अकरम (स.) मदीना की ज़िन्दगी में, मुशरिकीन, यहूदी, मसीह और उन लोगों के सहायता करने वालों ने मुस्लमानों पर चड़ाई करके चेष्टा की, कि किसी प्रकार से इस्लाम व तौहीद को अनुशरण करने वालो को निस्त व नाबूद किया जाए। इन समस्त प्रकार झगड़ों चाहे यह छोटी हो या बड़ी रसूल (स.) के साथ थे, लेकिन रसूल (स.) इन समस्त प्रकार झगड़ा, यानी शिर्क व अधर्म को बाहर करने के लिए सब समय काफ़िर के सम्मूख़ीन थे, हज़रत अली (अ) फ़रमाते हैः (किसी युद्ध में कोई व्यक्ति रसूल (स.) के सामने अने का शक्ति नहीं दिखाई,))हालाकिं रसूल (स.) के सदाचार व्यबाहर सब समय सुल्ह व शान्ति के लिए था और बा अख़लाक़, नरमी, मेंहैरबान, व क्षमा के साथ…. उन लोगों के साथ सदाचार करते थें)) (( और लोगों ने इस सदाचार को बुरे कर्मो में लगाया)) इस कारण की वजह से हर दो तरफ़ बहुत सारे लोगं क़त्ल, और 80 बार मुसललहाने के मुक़ाबिल, एक हज़ार चार सो जनसाधारण व्यक्ति ने चड़ाउ की जीस में अक्सर लोग मृत के घाट उतार गये।

    दीन व दुनिया के नेता

    पैग़म्बरे अकरम (स.) मदीना की ज़िन्दगी में, अल्लाह के वही और क़ुरआन के विधान मुताबिक़ दीन व दुनिया के समस्त प्रकार के कार्य-काम करते रहे, कि किसतरह बड़े छोटे के साथ, पिता अपनी संतान के साथ, संतान आपने पिता के साथ, बीबी आपने शौहर के साथ, शौहर आपने बीबी के साथ, प्रतिवासी आपने प्रतिवासी के साथ, एक हाकिम जनसाधारण के साथ,जनसाधारण एक हाकिम के साथ, मुस्लमान अपर सम्प्रदाय के लोगों के साथ सदाचार करे। बिचार कानून, समाज को कैसे चलाया जाए, राजनिती, इक्तेसाद, इबादत, वन्दगी, यह सब कामों का नियम-पद्धती सब अल्लाह के वही के मुताबिक़ लोगों के दर्मियान बयान फ़रमाते थें।

    आप का पवित्र जीवन कि उपस्थित और सूचीपत्र ईलाही अपरों के लिए कोई कष्ट का कारण नहीं था, और आप सब समय अल्लाह के निर्देशनुसार से भाई चारा की ध्वनी बुलन्द करते थें,और क़ौम अनुशरण और उसकी परिस्तिश को समाप्त करते थें, वह धोका, ज़न्जीर कै़दी का जीवन बस्र करना और अज्ञानों वाली जीवन को समाप्त करके मानव जीवन के लिए एक स्वाधिन का पूरष्कार पेश किया है। वह एक पथ प्रदर्शक और दीन व दुनिया के लिए एक नेता और धर्मगुरु व निरपेक्षता व्यक्ति थें। और एक मज़हरे रह्मतूल लिल आलामीन थें, इस्लाम न्याय क़ायेम करना, अत्व्याचारी के अत्याचार को विरत करना, अपरों को अच्छा परामर्श देना,नसीहत करना, क्षमा करना, यह सब आपके भीतर मौजूद थी, और न किसी प्रकार का प्रतिशोध लेना और ना बुग्ज़ व हस्द आपके अन्दर उपस्थित थी। वह बख़शिश का एक नमूना था, और पृथ्वी में एक इस्लामी नेता थें, सब समय आप अपरों कों बड़ा समझते थें, आपने ख़ूर्मा और पानी के माध्यम जीवन बस्र किया, और माँस व गन्दुम अपरों को प्रदान किया, सूती का मोटा कपड़ा ख़ुद परीधान किया और नरम व नाजुक मख़मल का कपड़ा दूसरों को प्रदान किया। आपकी सदाचार एक दूसरों के साथ समान था, हत्ता बैठने का स्थान में भी, आपकी दृष्ट मुबारक सब के लिए समान थी।