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    हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम की अहादीस

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     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम की अहादीस (प्रवचन)

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के वह प्रवचन जो उनकी ग़ैबते सुग़रा के समय उनसे प्राप्त हुए अपने प्रियः अध्ययन कर्ताओं की सेवा मे प्रस्तुत कर रहे हैँ।

    नोट– हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ग़ैबते सुग़रा की अवधि मे अपने विशवसनीय मित्रों व अपने मुख्य प्रतिनिधियों से भेंट करते थे। तथा उनको अपने अनुयाईयों के उत्थान व विकास  के लिए विभिन्न सुझाव देते व उनकी कठिनाईयों का निवारण करते थे।

    1-संदेश

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने अपने अनुयाईयों को संदेश दिया कि मैं तुम्हारे दैनिक जीवन के कार्यों से अचेत नही हूँ।और न ही तुम्हारी याद को भूल पाता हूँ। अगर ऐसा न होता तो विपत्तियाँ तुमको घेर लेती व शत्रु तुम्हारा सर्वनाश कर देते।

    2- अप्रसन्नता

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि तुम्हे चाहिए कि प्रत्येक उस कार्य को करो जो तुमको हम से अधिक समीप करे। व प्रत्येक उस कार्य से दूर रहो जिससे हम अप्रसन्न हों या जिससे हम क्रोधित होंते हों।

    3-अनुसरन

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह से डरो और हमारा अनुसरण करो।अपने कार्यों को हमारे ऊपर छोड़ दो य़ह हमारा उत्तरदायित्व है कि तुम को जिस प्रकार इस मार्ग पर लाये थे हम उसी प्रकार तुमको संतुषट करके ले चलेगें। अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए हमारी मुहब्बत के साथ हमारी ओर बढ़ो।

    4- अल्लाह का संकल्प

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह ने यह संकल्प कर लिया है कि हक़ अपने अन्तिम चरण तक सफलता प्राप्त करे व बातिल का विनाश हो। और मैंने जो कहा है वह इस बात पर साक्षी है।

    5-संसार की रचना

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह ने संसार को व्यर्थ मे नही रचा है और प्रजा को स्वतन्त्र नही छोड़ा है। अपितु अल्लाह ने संसार को अपनी शक्ति से रचा है और उसने मनुष्य को आँख कान दिल व बुद्धि प्रदान की है।और इसके बाद डराने वाले व खुश खबरी देने वाले पैगम्बरो को उनकी ओर भेजा। ताकि वह अल्लाह की अज्ञा पालन का निर्देश दें व उसकी अवज्ञा से रोकें। तथा उनमे जो व्यक्ति अल्लाह के आदेशों के बारे मे नही जानते उनको अल्लाह के आदेशों के सम्बन्ध मे बताऐं।

    6-बातिल की समाप्ति

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह जिस समय हमको बोलने की अज्ञा देगा उस समय हक़ प्रकट होगा व बातिल समाप्त हो जायेगा।

    7-ज़हूर

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह की अज्ञा के बिना ज़हूर (प्रकट होना) नही होगा और वह भी एक लम्बे समय के बाद जब हृदय अपवित्र हो जायेंगे व पृथ्वी पर चारो ओर अत्याचार फैल जायेगा।

    8-झूटा व्यक्ति

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जान लो कि कुछ व्यक्ति शीघ्र ही मुझे देखने व मेरे प्रतिनिधि होने का दावा करेगें। परन्तु याद रखो कि सुफयानी के प्रकट होने व आसमानी अवाज़ के सुनने से पहले जो मुझे देखने का दावा करे वह झूटा है।

    9-संसार का पतन

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि संसार का विनाश व पतन शीघ्र होने वाला है। मैं तुमको अल्लाह रसूल व अल्लाह की किताब पर क्रियान्वित होने व बातिल को समाप्त करने का संदेश देता हूँ।

    10-मुहम्मद का सार रूप

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने स्वंय अपने बारे मे कहा कि मैं आदरनीय आदम अलैहिस्सलाम का शेष, आदरनीय नूह अलैहिस्सलाम का खज़ाना ,आदरनीय इब्राहीम का चुना हुआ व आदरनीय मुहम्मद का सार रूप हूँ। इन सब महान आत्माओं पर अल्लाह की रहमत हो।

    11-शंकाओं का समापन

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अत्याचारी यह समझते हैं कि अल्लाह की हुज्जत संसार से समाप्त हो गई है। अगर हम को बोलने की अज्ञा दी जाये तो हम उनकी समस्त शंकाओं को दूर कर देंगें।

    12-छीँकना

    आदरनीय इमाम महदी का नसीम नामी सेवक कहता है कि इमाम महदी ने मुझसे कहा कि क्या मैं तुझे छीँकने के बारे मे खुश खबरी दूँ ? मैंनें कहा कि जी। इमाम ने कहा कि अगर स्वंय छीँक आजाये तो व्यक्ति तीन दिन तक मृत्यु से सुरक्षित हो जाता है।

    13-शैतान की नाक

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि नमाज़ के अतिरिक्त कोई चीज़ शैतान की नाक पृथवी पर नही रगड़वा सकती। अतः नमाज़ पढ़कर शैतान की नाक पृथ्वी पर रगड़ो।

    14- अज्ञा के बिना

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि किसी की सम्पत्ति को उसकी अज्ञा के बिना प्रयोग करना हराम (निषिद्ध) है।

    15-अल्लाह की शरण

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मैं देखने के बाद अँधा होने से, मार्ग प्राप्ति के बाद मार्ग से भटकने से, अनुचित कार्य करने व उपद्रव मे घिरने से अल्लाह की शरण चाहता हूँ ।

    16-हक़ हमारे साथ है

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि हक़ हमारे साथ है व हमारे बीच मे है। झूट बोलने वाले के अतिरिक्त कोई भी हमारी तरह यह नही कहेगा।

    17-अल्लाह की इच्छा

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मेरे ज़हूर (प्रकट होने) का समय अल्लाह की इच्छा पर है। व हर व्यक्ति कि मेरे प्रकट होने के समय को निश्चित करेगा व झूटा है।

    18-अल्लाह

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह वह है जिसने शरीरों को उत्पन्न किया व जो जीविका प्रदान करता है। न वह शरीर रखता और न ही उसने किसी शरीर मे प्रवेश किया है। उसके समान कोई वस्तु नही है वह सुनने वाला व जानने वाला है।

    19-अल्लाह हमारे साथ है

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अल्लाह हमारे साथ है और हमे अल्लाह के अतिरिक्त किसी वस्तु की अवश्यक्ता नही है। हक़ हमारे साथ है अगर कोई हमारा साथ न दे तो इससे हमे कोई घबराहट न होगी।

    20-वास्तविक ज्ञान

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि वास्तविक ज्ञान हमारा जानना है। काफ़िर का कुफ्र तुमको नुकसान नही पहुँचा सकता।

    21- दर्शन का सौभाग्य

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अगर हमारे शिया( अल्लाह उनको अपनी बन्दगी व अज्ञा पालन मे सफलता दे) अल्लाह को दिये हुए वचनों को पूरा करने पर एक जुट होते तो हमारे दर्शन का सौभाग्य शीघ्र प्राप्त कर लेते।

    22-बुद्धि हीन अज्ञानी

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने मुहम्मद पुत्र अली पुत्र हिलाले करख़ी से कहा कि बुद्धि हीन अज्ञानी व ऐसे शियों ने जिनके इमान से मच्छर का पर अधिक शक्ति शाली है हमको दुखित किया है।

    23-शुक्र का सजदा

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि शुक्र का सजदा अनिवार्य मुसतहब्बात मे से है।

    24-दुआ का माँगना

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि वाजिब नमाज़ के बाद दुआ माँगने को मुस्तहब नमाज़ के बाद दुआ माँगने पर इसी प्रकार श्रेष्ठता है जैसे वाजिब को मुस्तहब पर श्रेष्ठता है।

    25-कब्रो को सजदा करना

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि कब्रों को सजदा करना जायिज़ नही है।(अर्थात निषिद्ध है)

    26- मानव सेवा

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि अपने आपको मानव सेवा के लिए समर्पित कर दो, अपने बैठने के लिए गृह द्वार को चुनो व मनुषयों की अवशक्ताओं की पूर्ति करो।

    27- पृथ्वी की सुरक्षा

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मेरे अस्तित्व से पृथ्वी वासीयों की इसी प्रकार सुरक्षा होती है जिस प्रकार सितारों से आकाश की सुरक्षा होती है।

    28-कठिनाईयो का निवारण

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि समाजिक कठिनाईयों के निवारण हेतू हमारे कथनो का उल्लेख करने वालों से संम्पर्क स्थापित करो। क्योंकि वह मेरी ओर से तुम पर हुज्जत हैं व मैं अल्लाह की ओर से उन पर हुज्जत हूँ।

    29-मानव लाभ

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि ग़ैबत के समय मे मुझ से इसी प्रकार मानव को लाभ पहुँचेगा जिस प्रकार सूर्य बादलों के पीछे छिपकर मानव को लाभान्वित करता है।

    30-सूचनाऐं

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि आपकी समस्त सूचनाए हमारे ज्ञान मे हैं व आप लोगों की कोई भी सूचना हम से छिपी हुई नही है।

    31- तुम्हारी भलाई

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मेरे प्रकट होने की दुआऐं अधिकता के साथ किया करो क्योंकि इसी मे तुम्हारे लिए भलाई है।

    32-अन्तिम वली

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मैं अन्तिम वली हूँ। अल्लाह मेरे द्वारा मेरे परिवार व मेरे शियों से विपत्तियों को दूर करायेगा।

    33-अल्लाह की हुज्जत

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि पृथ्वी अल्लाह की हुज्जत से रिक्त नही है। अल्लाह की हुज्जत  प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप मे पृथ्वी पर है।

    34-माल का खाना

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो हमारे माल(माले खुम्स इत्यादि) मे से कुछ खायेगा वह अपने पेट को आग से भरेगा, व अन्त मे नरकीय आग मे जलेगा।

    35- पवित्र

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि हम तुम लोगों के माल को केवल इस लिए स्वीकार करते है कि तुम पवित्र हो जाओ।

    36-लानत

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि जो हमारे माल से एक दिरहम (सोने का सिक्का)भी हराम कर के खायेगा, उस पर अल्लाह व समस्त फ़रिश्तों की लानत हो।

    37-बैअत

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि मैं जब खरूज (किसी के विरूध उठ खड़ा होना) करूँगा तो किसी ताग़ूत( दुष्ट) की बैअत मेरी गर्दन मे न होगी।

    38- ग़ैबत का कारण

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि ग़ैबत का कारण वही है जिसके लिए अल्लाह ने कहा है कि ऐ इमानदारों बहुत सी चीज़ों के बारे मे न पूछा करो क्योकि अगर उन्हे प्रकट कर दिया जाये तो वह तुम को बुरा लगेगा।

    39- रिश्तेदारी

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि यह जान लो कि अल्लाह से किसी की कोई रिशतेदारी नही है।

    40-ईश्वरेच्छा का केन्द्र

     हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने कहा कि हमारे हृदय ईश्वरेच्छा के केन्द्र हैं जब वह किसी बात को चाहता है तो हम भी चाहते हैं।

    ।।अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव वा अलि मुहम्मद।।