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    (6) सर को पीनी में डुबोना-

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    (1618) अगर रोज़े दार जान बूझ कर सारा सर पानी में डुबो दे तो चाहे उस का बाक़ी बदन पानी से बाहर रहे मशहूर क़ौल की बिना पर उसका रोज़ा बातिल हो जाता है। लेकिन बईद नही कि ऐसा करना रोज़े को बातिल न करे। अगरचे ऐसा करने में शदीद कराहत है और मुमकिन हो तो इस से एहतियात करना बेहतर है।

    (1619) अगर रोज़े दार अपने आधे सर को एक दफ़ा और बाक़ी सर को दूसरी दफ़ा पानी में डुबोये तो उस का रोज़ा सही होने में कोई इशकाल नही है।

    (1620) अगर सारा सर पानी में डूब जाये तो चाहे कुछ बाल पानी से बाहर भी रह जायें तो उस का हुक्म भी मसअला (1618) की तरह है।

    (1621) पानी के अलावा दूसरी सय्याल(द्रव) चीज़ों मसलन दूद्ध में सर डुबोने से रोज़े को कोई ज़रर नही पहुँचता और मुज़ाफ़ पानी में सर डुबो ले तो इस से उस के रोज़े में कोई इशकाल नही है।

    (1623) अगर कोई रोज़े दार यह ख़याल करते हुए अपने आपको पनी में गिरा दे कि उस का सर पानी में नही डूबेगा लेकिन उसका सर पानी में डूब जाये तो उसके रोज़े में कोई इशकाल नहीं है।

    (1624) अगर कोई शख़्स भूल जाये कि रोज़े से है और सर पानी में डुबो दे तो अगर पानी में डूबे हुये उसे याद कि रोज़े से है तो बेहतर यह है कि रोज़े दार फ़ौरन अपना सर पानी से बाहर निकाले और अगर न निकाले तो उसका रोज़ा बातिल नही होगा।

    (1425) अगर कोई शख़्स रोज़े दार के सर को पानी में डुबो दे तो उस के रोज़े में कोई इशकाल नही है लेकिन जब कि वह अभी पानी में है दूसरा शख़्स अपना हाथ हटाले तो बेहतर है कि फ़ौरन अपना सर पानी से बाहर निकाल ले।

    (1526) अगर रोज़े दार ग़ुस्ल की नियत से सर पानी में डुबो दे तो उस का रोज़ा और ग़ुस्ल दोनों सही हैं।

    (1627) अगर कोई रोज़े दार किसी को डूबने से बचाने की ख़ातिर सर पानी में डूबो दे तो चाहे उस शख़्स को बचाना वाजिब ही क्यों न हो एहतियाते मुस्तहब यह है कि रोज़े की क़ज़ा बजा लाये।