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    शियों के अहले सुन्नत से प्रश्न : 3

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    17-आप कहते हैं कि पैगम्बर ने कहा कि “मेरे असहाब सितारों के समान हैं तुम जिसका भी अनुसरन करोगे हिदायत प्राप्त कर लोगे।” परन्तु सहीह बुखारी किताब फ़ज़ाइल असहाबुन नबी, बाब मनाक़िबे उस्मान बिन उफ़्फ़ान 75/5 मे लिखा है कि वलीद पुत्र उक़बा नामक सहाबी ने शराब पी तथा आदरनीय उस्मान ने उनको अस्सी कोड़े मारने की अज्ञा दी। अब आप बताऐं कि अगर कोई वलीद पुत्र उक़बा नामक सहाबी का अनुसरन करते हुए शराब पिये तो क्या वह भी हिदात प्राप्त किये हुए है?

    18-खालिद पुत्र वलीद नामक सहाबी ने मालिक पुत्र नुवैरा नामक सहाबी को कत्ल किया। तथा उसी रात्री उनकी पत्नी के साथ बलात्कार किया।(अल कामिल फ़ित्तारीख नामक किताब मे सन् 11 हिजरी क़मरी की घटनाओं का उल्लेख करते हुए हदीसे सक़ीफ़ा व खिलाफ़ते अबु बकर359/2 के अन्तर्गत उपरोक्त कथन का उल्लेख किया गया है।) अब आप बताऐं कि अगर कोई व्यक्ति खालिद पुत्र वलीद नामक सहाबी का अनुसरन करते हुए किसी की हत्या करके उसकी पत्नी के साथ बलात्कार करे तो क्या वह भी हिदायत प्राप्त किये हुए है?

    19-कुऑन मे इस बात का वर्णन मिलता है कि असहाब का एक ग्रुप नमाज़े जुमा मे पैगम्बर को अकेला छोड़ कर क्रय विक्रय तथा मौज मस्ती मे लग गया। (सूरए जुमा की 11वी आयत के अन्तर्गत देखें) अब आप बताऐं कि अगर मुसलमान असहाब के इस ग्रुप का अनुसरन करते हुए नमाज़ को छोड़ कर क्रय विक्र व मौज मस्ती के लिए निकल जाऐं तो क्या वह हिदात प्राप्त किये हुए हैं?

    20-असहाब का एक ग्रुप ओहद व हुनैन नामक युद्धो मे रण भूमी से भाग गया और पैगम्बर के पुकारने पर भी उन्होने कोई ध्यान नही दिया।(सुराए आले इमरान आयत न.153 के अन्तर्गत देखें) अब आप बताऐं कि अगर मुसलमान असहाब के इस ग्रुप का अनुसरन करते हुए युद्ध भूमी से भागें तो क्या वह हिदायत प्राप्त किये हुए हैं?

    21-सआद पुत्र उबादा नामक सहाबी ने आदरनीय अबु बकर की बैअत नही की तथा उनकी खिलाफ़त को स्वीकार नही किया।(अल इसाबत फ़ी तमीज़िस सहाबत नामक किताब मे अस्क़लानी नामक सुन्नी विद्वान ने सआद नामक सहाबी के हालात का वर्णन करते हुए उपरोक्त कथन का उलेलेख किया है। तथा अल कामिल फ़ित्तारीख नामक किताब मे सन् 11 हिजरी क़मरी की घटनाओं का वर्णन करते हुए हदीसे सक़ीफ़ा व खिलाफ़ते अबु बकर के अन्तर्गत उपरोक्त कथन का उल्लेख मिलता है।) अब आप बताऐं कि अगर सभी सहाबी सितारों के समान हैं और उनके अनुसरन मे हिदायत की प्राप्ति है तो सआद पुत्र उबादा नामक सहाबी का अनुसरन करने वालो को हिदायत प्राप्त किये हुए व्यक्तियों के रूप मे क्यो स्वीकार नही करते हो?

    22-सहीह बुखारी मे किताबुस्सुलहे बाबे मा जाआ फ़िल इसलाह बैनन नास हदीस न. 1,2व 4 के अन्तर्गत उल्लेखित है कि एक बार कुछ असहाब मे आपस मे झगड़ा हुआ और उनमे मे लाठी डंडे,मुक्के लात व जूते चप्पल चले।अब आप बताऐं कि अगर आज मुसलमान उन असहाब का अनुसरन करते हुए आपस मे इसी प्रकार लड़े तो क्या वह हिदायत प्राप्त किये हुए कहलाऐंगे?

    23-इब्ने असीर नामक सुन्नी विद्वान अपनी किताब असदुल ग़ाब्बा फ़ी मारेफ़तिस सहाबा नामक किताब मे लिखा है कि आदरनीय उमर ने हातिब बिन अबी बलताह नामक बद्री सहाबी को अप शब्द कहे तथा उनको मुनाफ़िक़ कह कर सम्बोधित किया। अतः असहाब को बुरा भला कहना आदरनीय उमर का अनुसरन है। और वह भी एक सहाबी थे। और आपकी विचार धारा के अनुसार सहाबी का अनुसरन हिदायत की प्राप्ति का साधन है।

    24-तारीखे तबरी नामक किताब मे सन् 36 हिजरी क़मरी की घटनाओं का वर्णन करते हुए उल्लेख किया गया है कि आदरनीय आयशा ने (जो कि पैगम्बर की पत्नि व सहाबिया थी) तृतीय खलीफ़ा आदरनीय उस्मान को नासल कह कर सम्बोधित किया और इस प्रकार उनकी मान हानी की।बस इस प्रकार आदरनीय आयशा का अनुसरन व आदरनीय उस्मान की मान हानी हिदायत प्राप्ति का लक्षण है।

    25-अल कामिल फ़ित्ताऱीख नामक किताब मे सन् 38 हिजरी क़मरी की घटनाओं के अन्तर्गत उल्लेखित है। कि जब माविया की अज्ञा से आदरनीय आयशा के भाई मुहम्मद पुत्र अबु बकर की हत्या कर दी गई, तो इस के बाद से आदरनीय आयशा ने प्रत्येक नमाज़ के बाद माविया पर लाअनत की।बस माविया पर लाअनत करना आदरनीय आयशा का अनुसरन व हिदायत प्राप्ति का साधन भी।

    26-सहीह मुस्लिम मे किताबुल बर वस्सिलात वल आदाब, बाबे मन लआनाहुन नबी अव सबाहु अव दआ अलैहे, प्रथम हदीस के अन्तर्गत उल्लेखित है कि आदरनीय आयशा ने सूचित किया कि पैगम्बर(स0) ने दो सहाबियों पर नफ़रीन की। क्या यह सिद्ध होने के बाद भी कि पैगम्बर(स0) बुरे सहाबीयों पर स्वंय नफ़रीन करते थे। आप बुरे सहाबीयो पर लाअनत करने को (जो कि नफ़रीन के अन्तर्गत आती है) गुनाहे कबीरा व काफ़िर हो जाने का कारण मानते हो?