islamic-sources

    1. home

    2. article

    3. 84- सूरए इनशेक़ाक़

    84- सूरए इनशेक़ाक़

    Rate this post

    84- सूरए इनशेक़ाक़ का हिन्दी अनुवाद

    शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो रहमान और रहीम है।

    1- जब आसमान फट जायेगा।

    2- और अपने रब का हुक्म बजा लायेगा और यह ज़रूरी भी है।

    3- और जब ज़मीन को बराबर करके फैला दिया जायेगा।

    4- और जो कुछ वह अपने अन्दर छुपाये है उसको निकाल कर खाली हो जायेगी।

    5- और अपने परवर दिगदार का हुक्म बजा लायेगी और यह ज़रूरी भी है।

    6- ऐ इंसान तू अपने रब की तरफ़ जाने की कोशिश कर रहा है तो एक दिन उसका सामना करेगा।

    7- बस जिसका नामा-ए- आमाल उसके दाहिने हाथ में दिया जायेगा।

    8- उसका हिसाब आसान होगा।

    9- और वह अपने घरवालों की तरफ़ खुशी खुशी आयेगा।

    10- और जिसका नामा-ए-आमाल कमर के पीछे की तरफ़ से दिया जायेगा।

    11- वह फ़रियाद करेगा कि मैं मर गया।

    12- और आग में दाखिल होगा।

    13- वह अपने अहलो अयाल में बहुत खुश था।

    14- उसका ख़्याल था कि पलट कर अल्लाह की तरफ़ नही जायेगा।

    15- हाँ उसका रब उसे बहुत देखने वाला है।

    16- मैं शफ़क़ की क़सम खाकर कहता हूँ ।

    17- रात और उन चीज़ों की क़सम जिनको वह ढक लेती है।

    18- और चाँद की क़सम जब वह पूरा हो जाये।

    19- तुम सब हमेशा एक हालत से दूसरी हालत मे दाखिल होते रहोगे।

    20- उनको क्या हो गया है कि ईमान नही ले आते।

    21- और जब उनके सामने क़ुरआन पढ़ा जाता है तो सजदा नही करते।

    22- बल्कि काफ़िर तो झुटलाते भी हैं।

    23- और अल्लाह खूब जानता है जो वह अपने दिलों में छुपाये हुए है।

    24- बस आप इन्हे दर्दनाक अज़ाब की खबर दे दें।

    25- उन लोगों के अलावा जिन्होने ईमान लाने के बाद नेक काम किये । उन के लिए तो कभी खत्म न होने वाला सवाब है।