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  •  हज़रत अली (अ.) की नसीहत
    हज़रत अली (अ.) की नसीहत
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    हज़रत अली (अ.) की नसीहत

    हज़रत अली (अ.) की नसीहतRate this post हज़रत अली अलैहिस्सलाम: दुनिया के दिन, दो दिन हैं एक तुम्हारे हित में और दूसरा तुम्हारे अहित में, तो अगर वह तुम्हारे फ़ायदे में हो तो उदंडता न करो और अगर तुम्हारे नुकसान में हो तो क्षुब्धु व दु:खी मत हो। www.abna24.com

  •  किस तरह ग़रीबी और ऋण (क़र्ज़) से छुटकारा पाएँ ?
    किस तरह ग़रीबी और ऋण (क़र्ज़) से छुटकारा पाएँ ?
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    किस तरह ग़रीबी और ऋण (क़र्ज़) से छुटकारा पाएँ ?

    किस तरह ग़रीबी और ऋण (क़र्ज़) से छुटकारा पाएँ ?Rate this post सवालः मैं एक ग़रीब इंसान हूँ और पोर-पोर तक क़र्ज़ में डूबा हूँ। जितनी भी कोशिश करता हूँ सब बेकार हो जाती हैं। जिस काम को भी हाथ लगाता हूँ ख़राब हो जाता है। मुझे अपने क़र्ज़े को लेकर बहुत चिंता होती है […]

  •  इमाम खुमैयनी(र0) का वसीयत नामा
    इमाम खुमैयनी(र0) का वसीयत नामा
    3.5 (70.77%) 13 votes

    इमाम खुमैयनी(र0) का वसीयत नामा

    इमाम खुमैयनी(र0) का वसीयत नामा3.5 (70.77%) 13 votes इमाम खुमैयनी(र0) का दैविक-राजनीतिक मृत्युलेख (वसीयत नामा) इमाम खुमैयनी(र0)

  • बंदगी
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    बंदगी

    बंदगीRate this post ख़ुदा वन्दे आलम ने अपनी किताब क़ुरआन मजीद में फ़रमाया हैः “हमने जिन व इन्स को अपनी इबादत के लिए पैदा किया है।” ताकि वह इसके ज़रिए यानी इबादत और बंदगी के ज़रिए ख़ुदा के क़रीब जो कि इंसानी कमाल की आख़िरी मंज़िल है, उस तक पहुँच सके। हम देखते हैं कि […]

  • ग़ीबत
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    ग़ीबत

    ग़ीबतRate this post ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना है, ग़ीबत एक ऐसी बुराई है जो इंसान के मन मस्तिष्क को नुक़सान पहुंचाती है और सामाजिक संबंधों के लिए भी ज़हर होती है। पीठ पीछे बुराई करने की इस्लामी शिक्षाओं में बहुत ज़्यादा आलोचना की गयी है। पीठ पीछे बुराई की परिभाषा में कहा गया […]

  • लाउडस्पीकर का ज़ालिमाना इस्तेमाल
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    लाउडस्पीकर का ज़ालिमाना इस्तेमाल

    लाउडस्पीकर का ज़ालिमाना इस्तेमालRate this post ज़ुल्म सिर्फ़ यह नहीं है कि किसी का माल छीन लिया जाए या उसे कोई ज़िस्मानी तकलीफ़ पहुँचा दी जाए बल्कि अरबी ज़बान में ज़ुल्म, किसी भी चीज़ को बेजगह इस्तेमाल करने को कहते हैं क्योंकि किसी चीज़ का बेमहल और ग़लत इस्तेमाल यक़ीनन किसी न किसी को तकलीफ़ […]

  • आत्महत्या
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    आत्महत्या

    आत्महत्याRate this post आत्महत्या भी इस ज़माने के समाजी समस्याओं में सबसे ऊपर है, आज हिन्दुस्तान ही में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लोग आत्महत्या कर रहे हैं, और जान जैसी क़ीमती चीज़ ख़ुद अपने हाथों नष्ट कर रहे हैं। आत्महत्या की एक बड़ा कारण घरेलू समस्याएं भी हैं। आम तौर पर औरतें जहेज़ के […]

  • हसद
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    हसद

    हसदRate this post हसद का मतलब होता है किसी दूसरे इंसान में पाई जाने वाली अच्छाई और उसे हासिल नेमतों की समाप्ति की इच्छा रखना। हासिद इंसान यह नहीं चाहता कि किसी दूसरे इंसान को भी नेमत या ख़ुशहाली मिले। यह भावना धीरे धीरे हासिद इंसान में अक्षमता व अभाव की सोच का कारण बनती […]

  • अस्रे हाज़िर का जवान और आईडियल
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    अस्रे हाज़िर का जवान और आईडियल

    अस्रे हाज़िर का जवान और आईडियलRate this post आज के तरक़्क़ी याफ़ता दौर में हर नौ जवान को अपने आईडियल की तलाश है। कोई किसी फ़नकार में अपना आईडियल तलाश करता है तो कोई हिदायत कार में अपना आईडियल तलाश करने की कोशिश करता है और फिर उसी के तर्ज़ पर अपनी ज़िन्दगी गुज़ारने की कोशिश करता […]

  • एक हतोत्साहित व्यक्ति
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    एक हतोत्साहित व्यक्ति

    एक हतोत्साहित व्यक्तिRate this post कभी कभी हमारे जीवन में ऐसी घटनाएं घटती हैं कि जो जाने अन्जाने हमारी भावनाओं को उक्साने का कारण बनती हैं। इनमें से एक, कि जिसका सहन करना अत्यन्त कठिन होता है, हतोत्साह नामक स्थिति है। एकहतोत्साहित व्यक्ति बहुत ही सुस्त हो जाता है, उसे प्रसन्नता का आभास नहीं होता, […]

  • धर्म ज्योति-6
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    धर्म ज्योति-6

    धर्म ज्योति-6Rate this post नैतिक आचरण के बारे में बात करने से पहले स्वस्थ मनुष्य के रूप में धर्म में गहरी आस्था रखने वाले मनुष्य के विचारों एवं अनुभूतियों के बारे में विवरण पेश करना ज़रूरी लगता है। इसलिए कि नैतिक सकारात्मक आचरण एवं व्यवहार की उत्पत्ति मनुष्य के विश्वास और उसकी मनोवृत्ति की ही […]

  • ईश्वर के बारे में सकारात्मक विचार के सुपरिणाम
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    ईश्वर के बारे में सकारात्मक विचार के सुपरिणाम

    ईश्वर के बारे में सकारात्मक विचार के सुपरिणामRate this post ईश्वर के बारे में सकारात्मक विचार, ईश्वर को प्रसन्न करने के मार्ग में व्यवहार करने के लिए मनुष्य को प्रोत्साहित करता है, और सुखमय जीवन एवं नेक कार्य करने के लिए आवश्यक शांति एवं सुख प्रदान करता है। पैग़म्बरे इस्लाम का कथन है कि उस […]

  • धर्म ज्योति-4
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    धर्म ज्योति-4

    धर्म ज्योति-4Rate this post भले लोग ग़ुस्सा पी लेते हैं क्रोध, मनुष्य का आतंरिक उबाल होता है।  यदि उसपर नियंत्रण न किया जाए तो उसके बड़े भयानक और कभी कभी तो मनुष्य और समाज के लिए एसे परिणाम सामने आ सकते हैं जिनकी कभी क्षतिपूर्ति भी संभव नहीं होती। धार्मिक शिक्षाओं में भी इस बात […]

  • धर्म ज्योति-3
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    धर्म ज्योति-3

    धर्म ज्योति-3Rate this post इस्लाम की नैतिक व्यवस्था, एकेश्वरवाद के दृष्टिकोण पर आधारित है। इस अर्थ में कि यह संसार एक तत्वदर्शितापूर्ण इरादे से अस्तित्व में आया है और सृष्टि की व्यवस्था दया, भलाई और सभी अस्तित्वों को उनकी योग्य परिपूर्णता तक पहुंचाने पर आधारित है। यदि नैतिक प्रशिक्षण और उसके सिद्धांत धर्म व धार्मिक […]

  • धर्म ज्योति-2
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    धर्म ज्योति-2

    धर्म ज्योति-2Rate this post 1970 के दशक में तेल के उत्पादन और उसके मूल्य में वृद्धि के साथ ही ईरान के अत्याचारी शासक मुहम्मद रज़ा पहलवी को अधिक शक्ति का आभास हुआ और उसने अपने विरोधियों के दमन और उन्हें यातनाए देने में वृद्धि कर दी। शाह की सरकार ने पागलपन की सीमा तक पश्चिम […]

  • धर्म ज्योति-1
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    धर्म ज्योति-1

    धर्म ज्योति-1Rate this post इस समय नैतिकता के सिद्धांतों व मानकों को हर समय से अधिक भौतिक हितों और स्वतंत्रता, मानवता प्रेम, न्याय एवं मानवाधिकार जैसे विषयों की भेंट चढ़ाया जा रहा है। आज हम एक ऐसे समय में जीवन बिता रहे हैं जिसमें नैतिक बुराइयां और परिवारों का विघटन न केवल पश्चिमी समाजों या […]

  • अच्छी बातें
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    अच्छी बातें

    अच्छी बातेंRate this post   इंसान की क़ाबिलियत उसके अख़लाक़ से ज़ाहिर होती है। इंसान की फ़ितरत उसके किरदार से ज़ाहिर होती है। इंसान की नफ़रत उसके हसद से ज़ाहिर होती है। इंसान की जहालत उस के ग़ुस्से से ज़ाहिर होती है। इंसान की शफ़क़्क़त उसकी हमदर्दी से ज़ाहिर होती है। इंसान की ख़ुशी उसके […]

  • ज़मीन पर सजदा
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    ज़मीन पर सजदा

    ज़मीन पर सजदाRate this post सजदा उन अफ़आल (कामों) में सबसे उपर है जिनसे इंसान की बंदगी और विनम्रता का पता चलता है। सजदा नमाज़ का रुक्न (स्तम्भ कि जिसके छूटने पर नमाज़ सही नहीं रहेगी चाहे भूले ही से क्यों न हो।) है, नमाज़ी के लिये हर रकअत में दो सजदे बजा लाना वाजिब […]

  • झूठ क्यों नहीं बोलना चाहिए
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    झूठ क्यों नहीं बोलना चाहिए

    झूठ क्यों नहीं बोलना चाहिएRate this post आम तौर पर झूठ किसी एक रूहानी कमज़ोरी की वजह से पैदा होता है यानी कभी ऐसा भी होता है कि इंसान ग़ुरबत और लाचारी से घबरा कर, दूसरे लोगों के उसको अकेले छोड़ देने की बुनियाद पर या फिर अपने ओहदे और मंसब की हिफ़ाज़त के लिए […]

  • क़ज़ा नमाज़़
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    क़ज़ा नमाज़़

    क़ज़ा नमाज़़Rate this post सवाल 521:  मैं 17 साल की उम्र तक एहतेलाम और ग़ुस्ल वग़ैरह के बारे में नहीं जानता था और उन उमूर के मुताल्लिक़ किसी से भी कोई बात नहीं सुनी थी ख़ुद भी जनाबत और गु़स्ल वाजिब होने के मानी नहीं समझता था लिहाज़ा क्या उस उमर तक मेरे रोज़े और […]

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