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    स्वर्गीय दूत तथा पश्चाताप करने वालो के पाप

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारियान   सुरए तौबा की छंदो की व्याख्या मे उल्लेख हुआ है कि स्वर्गीय दूत पापी के पापो को लौहे महफ़ूज़ पर पेश करते है, परन्तु वहॉ पर पापो के स्थान पर अच्छाईया तथा नेकिया देखते है, तो फ़ौरन सजदे (अपने शीर्ष […]

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    शक़ीक़े बलख़ी की पश्चाताप

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारियान   शक़ीक़ एक धनवान व्यक्ति का पुत्र था, वह व्यापार तथा सेर सपाटे के लिए रोम के शहरो की यात्रा करता था, एक बार वह रोम के किसी शहर मे मूर्तिपूजको का एक कार्यक्रम देखने के लिए मुर्ति गृह गया, देखता […]

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    देहाती व्यक्ति की मूर्ति पूजा से पश्चाताप

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारियान   इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम कहते हैः पैगम्बर किसी जंग के लिए जा रहे थे, एक स्थान पर अपने असहाब (साथीयो) से कहाः रास्ते मे एक व्यक्ति मिलेगा, जिसने तीन दिन से शैतान के विरूद्ध दृढ़ निश्चय कर रखा है, अभी थोड़ी […]

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    एक यहूदी किशोर की पश्चाताप

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारियान   इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम कहते हैः एक यहूदी किशोर अधिकांश रसूले खुदा सललल्लाहो अलैहे वआलेहि वसल्लम के पास आया करता था, पैगम्बर को भी उसके आने जाने पर कोई आपत्ति नही थी बल्कि कभी कभी उसको किसी कार्य के लिए भी […]

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    अबू बसीर का पड़ौसी 3

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारियान   इस के पूर्व के दो लेखो मे अबू बसीर और उनके पड़ौसी से समबंधित कुछ् बातो का वर्णन किया गया जिसके पहले लेख मे अबु बसीर अपने पड़ौसी से परेशान रहते है समझाने बुझाने पर भी वह कोई ध्यान नही […]

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    अबू बसीर का पड़ौसी 2

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारियान   इस लेख के पूर्व लेख मे इस बात को उल्लेखित किया गया है कि अबु बसीर ने अपने पड़ौसी से कई बार विनम्रता से कहा परन्तु उसने अबु बसीर की बात पर कोई ध्यान नही दिया तथा अबू बसीर ने […]

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    अबू बसीर का पड़ौसी -1

    Rate this post पुस्तक का नामः पश्चाताप दया की आलंग्न लेखकः आयतुल्ला हुसैन अंसारियान एक पड़ौसी को अपने दूसरे पड़ौसी का दयालु भाई के समान ध्यान रखना चाहिए, संकट मे उसकी सहायता करे, उसकी समस्याओ का समाधान करे, युगी घटनाओ तथा बिगाड़ सुधार मे उसका सहयोग करे, किन्तु अबू बसीर का पड़ौसी ऐसा नही था, […]

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    लिबास के आदाब और आरास्तगी ए लिबास की फ़ज़ीलत

    Rate this post मोतबर हदीस में इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) से नक़्ल है कि ख़ुदा वंदे आलम अपने किसी बंदे को नेमत अता फ़रमाए और उस नेमत का असर उस पर ज़ाहिर हो तो उस को ख़ुदा का दोस्त कहेगें और उस का हिसाब अपने परवरदिगार का शुक्र अदा करने वालों में होगा और अगर […]

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    इस संसार में ईश्वर की ओर से दो पापों की सज़ा

    Rate this post दो चीज़ की सज़ा ईश्वर इस संसार में देता है एक अत्याचार और दूसरे मां-बाप की अकृतज्ञता (नाशुकरी) पैग़म्बरे इस्लाम पीड़ित की बददुआ का असर पीड़ित (मज़लूम) की बददुआ से डरो कि उसकी बददुआ आग की तरह आसमान में जाती हैः पैग़म्बरे इस्लाम मितव्ययिता (क़ेनाअत) का फ़ायदा हे आदम की संतान! जिससे […]

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    ज़िंदगी का सुकून छीनने वाली तीन चीज़े

    Rate this post जिस व्यक्ति में तीन बातें होंगी वह कभी ख़ुश नहीं रह सकताः द्वेष(कीना), ईर्ष्या (हसद) और दुर्व्यवहार (बुरा एख़लाक़) हज़रत अली अलैहिस्सलाम इंसान का मित्र और उसका दुश्मन हर इंसान की मित्र उसकी बुद्धि और उसकी अज्ञानता उसकी शत्रु हैः पैग़म्बरे इस्लाम इंसान का दोस्त और उसका दुश्मन हर इंसान की दोस्त […]

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    इंसान का मित्र और उसका दुश्मन

    Rate this post हर इंसान की मित्र उसकी बुद्धि और उसकी अज्ञानता उसकी शत्रु हैः पैग़म्बरे इस्लाम इंसान का दोस्त और उसका दुश्मन हर इंसान की दोस्त उसकी अक़्ल है और उसकी दुश्मन उसकी जेहालत हैः पैग़म्बरे इस्लाम दुर्व्यवहार जान लो कि बंदा अपने दुर्व्यवहार के कारण नरक के अंतिम दर्जे में होगाः पैग़म्बरे इस्लाम […]

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    दुर्व्यवहार

    Rate this post जान लो कि बंदा अपने दुर्व्यवहार के कारण नरक के अंतिम दर्जे में होगाः पैग़म्बरे इस्लाम ईर्ष्या से हानि ईर्ष्या शरीर को कमज़ोर और रोगी बनाता हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम हसद से नुक़सान हसद, जिस्म को कमज़ोर करता है और इंसान को मरीज़ कर देता हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम जल्दबाज़ी का नुक़सान […]

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    ईर्ष्या से हानि

    Rate this post ईर्ष्या शरीर को कमज़ोर और रोगी बनाता हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम हसद से नुक़सान हसद, जिस्म को कमज़ोर करता है और इंसान को मरीज़ कर देता हैः हज़रत अली अलैहिस्सलाम जल्दबाज़ी का नुक़सान लोग जल्दबाज़ी के कारण बर्बाद होते हैं अगर लोग जल्दबाज़ी से दूर रहते तो कोई भी बर्बाद न होताः […]

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    ग़ौर व फ़िक्र

    Rate this post و يتفكرون فى خلق السموات والارض ربنا ما خلقت هذا باطلا और वह आसमान व ज़मीन की ख़िलक़त के बारे में ग़ौर व फ़िक्र करते हैं, परवर दिगार तूने इन्हें बेहूदा ख़ल्क़ नही किया है। सूरा ए निसा आयत न. 189 घर के माहौल में ज़िन्दगी बसर करना बहुत आसान है, क्योंकि […]

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    दिक़्क़त

    Rate this post يا ويلتى ليتنى لم اتخذ فلانا خليلا वाय हो मुझ पर, काश फ़लाँ शख़्स को मैंने अपना दोस्त न बनाया होता। (सूरा ए फ़ुरक़ान आयत न. 28 ) इंसान की कुछ परेशानियाँ, उसके अपने इख़्तियार से बाहर होती हैं जैसे सैलाब व तूफ़ान का आना, वबा जैसी बीमारियों का फैलना वग़ैरा । […]

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    नज़र अंदाज़ करना

    Rate this post عظموا اقداركم بالتغافل عن الدني من الامور बेअहमीयत चीज़ों से लापरवाही बरतते हुए उन्हे नज़र अंदाज़ करके अपनी शख़्सियत की हिफ़ाज़त करें। क्यों नज़र अंदाज़ करना चाहिये? समाजी ज़िन्दगी और घरेलू ज़िन्दगी में वाज़ेह फ़र्क़ होता है। घर के माहौल में घर के अफ़राद दो, तीन या कभी इससे ज़्यादा होते हैं। […]

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    शुक्रिये व क़द्रदानी का जज़्बा

    Rate this post لئن شكرتم لأزيدنكم अगर तुम ने शुक्र अदा किया तो मैं यक़ीनन नेमतों को ज़्यादा कर दूँगा। सूरः ए इब्राहीम आयत न. 127 इंसान को समाजी एतेबार से एक दूसरे की मदद की ज़रूरत होती है। अगर कुल की सूरत में समाज मौजूद है तो उसके जुज़ की शक्ल में फ़र्द का […]

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    सब्र व तहम्मुल

    Rate this post رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا पालने वाले हमें सब्र अता फ़रमा। सूरः ए बक़रा आयत 250 ख़ुदावंदे आलम ने क़ुरआने मजीद में इस नुक्ते की दो बार तकरार की है कि ان مع العسر يسری आराम व सुकून दुशवारी व सख़्ती के साथ है। दक़ीक़ मुतालए से मालूम होता है कि निज़ामे ज़िन्दगी बुनियादी […]

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    एतेमाद व सबाते क़दम

    Rate this post كانهم بنين مرصوص वह लोग सीसा पिलाई हुई दिवार की तरह हैं। सूरः ए सफ़ आयत न. 5 नहजुल बलाग़ा में हज़रत अली अलैहिस्लाम का यह क़ौल नक़्ल हुआ हैं- يوم لک و يوم عليک एक रोज़ तुम्हारे हक़ में और दूसरा तुम्हारे ख़िलाफ़ है। इस से मालूम होता है कि ज़िन्दगी […]

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    हिदायत व रहनुमाई

    Rate this post وَنَصَحْتُ لَكُمْ وَلَكِن لاَّ تُحِبُّونَ النَّاصِحِينَ और मैने तुम्हे नसीहत की मगर तुम नसीहत करने वालों को पसंद नही करते। सूरः ए आराफ़ आयत 78 समाजी ज़िन्दगी, दर अस्ल इंसान का बहुत से नज़रियों व अफ़कार से दो चार होना है। उनमें से कुछ अफ़कार मज़बूत व पायदार होते हैं और कुछ […]

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