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    बेनियाज़ी

    Rate this post नबी ए अकरम (स) ने फ़रमाया: خيرالغني غني النفس बेहतरीन बेनियाज़ी नफ़्स की बेनियाज़ी है। तबीयत एक अच्छा मदरसा है जिसकी क्लासों में तरबीयत की बहुत सी बातें सीखी जा सकती हैं। तबीयत के इन्हीं मुफ़ीद व तरबीयती दर्सों में से एक दर्स यह है कि जानवरों की ज़िन्दगी के निज़ाम में […]

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    उस लिबास के पहनने का बयान जो औरतों और काफ़िरों के लिये मख़सूस है

    Rate this post मर्दों के लिये औरतों का मख़सूस लिबास जैसे मक़ना, महरम (अंगिया) बुरक़ा वग़ैरह पहनना हराम है इसी तरह औरतों के लिये मर्दों का मख़सूस लिबास पहनना हराम है जैसे टोपी, अम्मामा, क़बा वग़ैरह और काफ़िरों का मख़सूस लिबास जैसे जुन्नार या अंग्रेज़ी टोपियाँ वग़ैरह मर्द औरत किसी के लिये जायज़ नही है। […]

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    अमामा बाँधने के आदाब

    Rate this post सर पर अम्मामा बाँधना सुन्नत है और तहतुल हनक बाँधना सुन्नत है और अम्मामे का एक रुख़ आगे की तरफ़ और दूसरा पीछे की तरफ़, मदीने के सादात के तर्ज़ पर डाल लेना सुन्नत है। शेख़े शहीद अलैहिर्रहमा ने फ़रमाया है कि खड़े हो कर अम्मामा बाँधना सुन्नत है।जनाबे रसूले ख़ुदा सल्ललाहो […]

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    रूई, ऊन और कतान के कपड़े पहनना

    Rate this post सब कपड़ो में अच्छा कपड़ा सूती है मगर ऊनी कपड़े को बारह महीने पहनना और अपनी आदत बना लेना मकरूह है। हाँ कभी कभी न होने के सबब से या सर्दी दूर करने की ग़रज़ से पहनना बुरा नही है चुनांचे बसनदे मोतबर हज़रत अमीरुल मोमिनीन (अ) से मंक़ूल है कि रूई […]

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    कपड़ो का वो रंग जो मसनून या मकरुह है

    Rate this post उन रंगों का बयान जिनका कपड़ो में होना मसनून या मकरुह है हफ़्ज़ मुवज़्ज़िन ने रिवायत की है कि मैं ने जनाबे इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) को देखा कि वह क़ब्र और मिम्बरे रसूल ख़ुदा (स) के दरमियान नमाज़ पढ़ रहे थे और जर्द कपड़े मानिन्दे बही, के रंग के पहने हुए […]

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    दो बुरी सिफ़तें- ज़्यादा खाना और इधर उधर देखना

    Rate this post हदीस- क़ाला रसूलुल्लाह (स.) इय्याकुम व फ़ुज़ूला अलमतअमि फ़इन्नाहु यसिमु अलक़ लबा बिलक़िसवति, व युबतिउ बिलजवारेहि अन अत्ताअति, व युसिम्मु अलहमामा अन समाई अलमौईज़ति; व इय्याकुम व फ़ुज़ूला अन्नज़र, फ़इन्ना यबदुरू अलहवा, व युलिदु अलग़फ़लता।[1] तर्जमा- हज़रत रसूले अकरम (स.) फ़रमाते हैं कि पुर ख़ोरी (ज़्यादा खाना) से बचो, क्योंकि यह आदमी […]

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    पाँच नेक सिफ़तें

    Rate this post हदीस- अन अनस बिन मालिक क़ाला “समिति रसूलल्लाहि(स) फ़ी बाअज़ि ख़ुतबिहि व मवाइज़िहि….. रहिमल्लाहु अमराअनक़द्दमा ख़ैरन,व अनफ़क़ा क़सदन, व क़ाला सिदक़न व मलका दवाइया शहवतिहि व लम तमलिकहु, व असा अमरा नफ़्सिहि फ़लम तमलिकहु।[1] ” तर्जमा- अनस इब्ने मालिक से रिवायत है कि उन्होंने कहा मैंने रसूलुल्लाह के कुछ ख़ुत्बों व नसीहतो […]

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    अल्लाह के अच्छे बन्दों के सिफ़ात

    Rate this post हदीस- अन इब्ने उमर क़ाला “ख़तबना रसूलुल्लाहि ख़ुतबतन ज़रफ़त मिनहा अलअयूनु व वजिलत मिनहा अलक़ुलूबु फ़काना मिम्मा ज़बत्तु मिन्हा:अय्युहन्नासु,इन्ना अफ़ज़ला अन्नास अब्दा मन तवाज़अ अन रफ़अति ,व  ज़हिदा अन रग़बति, व अनसफ़ा अन क़ुव्वति व हलुमा अन क़ुदरति……।”[1] तर्जमा- इब्ने उमर से रिवायत है कि पैगम्बर (स.) ने हमारे लिए एक ख़ुत्बा […]

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    सिफ़ाते मोमिन (7)

    Rate this post कुछ अहादीस के मुताबिक़ 25 ज़ीक़ादह रोज़े “ दहुल अर्ज़ ” और इमाम रिज़ा अलैहिस्सलाम के मदीने से तूस की तरफ़ सफ़र की तारीख़ है। “दह्व”के माअना फैलाने के हैं। कुरआन की आयत “ व अलअर्ज़ा बअदा ज़ालिका दहाहा ”[1]  इसी क़बील से है। ज़मीन के फैलाव से क्या मुराद हैं ? […]

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    सिफ़ाते मोमिन (6)

    Rate this post मुक़द्दमा- इस हफ़्ते की अख़लाक़ी बहस में पैग़म्बर अकरम(स.) की एक हदीस बयान की जो आपने हज़रत अली अलैहिस्सलाम से बयान फरमाई थी। इस हदीस में मोमिन की 103 सिफ़तें बयान की गईं हैं जिनमें से छब्बीस सिफ़ते बयान हो चुकी हैं और इस जलसे में पाँच सिफते और बयान करनी है। […]

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    सिफ़ाते मोमिन (5)

    Rate this post मुक़द्दमा- गुज़िश्ता जलसों में पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की एक हदीस बयान की जो आपने हज़रत अली अलैहिस्सलाम से खिताब फ़रमायी थी इसमें मोमिन के 103 सिफ़ात बयान फ़रमाये गये हैं जिनमें से बाईस सिफ़ात बयान हो चुके हैं और आज हम इस जलसे में चार सिफ़ात और बयान करेगें। हदीस- “…..अहला मिन […]

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    सिफ़ाते मोमिन (4)

    Rate this post मुक़द्दमा- पिछले जलसों में हमने पैग़म्बरे अकरम (स.) की एक हदीस जो आपने हज़रत अली (अ.) से खिताब फ़रमाई बयान की, यह हदीस मोमिने कामिल के(103) सिफ़ात के बारे में थी। इस हदीस से 16 सिफ़ात बयान हो चुकी हैं और अब छः सिफात की तरफ़ और इशारा करना है। हदीस- “……..बरीअन […]

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    सिफ़ाते मोमिन (3)

    Rate this post इस से पहले जलसे में पैग़म्बर (स.) की एक हदीस बयान की जिसमें आपने मोमिन के 103 सिफ़ात बयान फ़माये है, उनमें से दस साफ़ात बयान हो चुके हैं और इस वक़्त छः सिफ़ात और बयान करने हैं। हदीस- “ …… मुज़क्किरु अलग़ाफ़िल, मुअल्लिमु अलजाहिल, ला यूज़ी मन यूज़ीहु वला यखूज़ु फ़ी […]

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    सिफ़ाते मोमिन (2)

    Rate this post मुक़द्दमा- गुज़िश्ता अखलाक़ी बहस में पैगम्बरे इस्लाम (स.) की एक हदीस नक़्ल की जिसमें आप हज़रत अली (अ.) को खिताब करते हुए फ़रमाते बैं कि कोई भी उस वक़्त तक मोमिन नही बन सकता जब तक उसमें 103 सिफ़ात जमा न हो जायें, यह सिफ़ात पाँच हिस्सो में तक़सीम होती है। पाँच […]

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    सिफ़ाते मोमिन

    Rate this post हदीस- रुविया इन्ना रसूलल्लाहि (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि) क़ाला “यकमलु अलमोमिनु ईमानहु हत्ता यहतविया अला माइता व सलासा ख़िसालिन फेलिन व अमलिन व नियतिन व बातिनिन व ज़ाहिरिन फ़क़ाला अमिरुल मुमिनीना(अलैहिस्सलाम) या रसूलल्लाह (सलल्ललाहु अलैहि व आलिहि) मा अलमाअतु व सलासा ख़िसालिन ? फ़क़ाला (सलल्ललाहु अलैहि व आलिहि) या अली मिन सिफ़ातिल […]

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    बदकारी

    Rate this post बदकारी की सुरक्षा के लिये इस्लाम ने दो तरह के इंतेज़ामात किये हैं: एक तरफ़ इस रिश्ते की ज़रूरत और अहमियत और उसकी सानवी शक्ल की तरफ़ इशारा किया है तो दूसरी तरफ़ उन तमाम रास्तो पर पाबंदी लगा दी है जिसकी वजह से यह रिश्ता ग़ैर ज़रुरी या ग़ैर अहम हो […]

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    नज़्म व ज़ब्त

    Rate this post اوصيكم بتقوى الله و نظم امركم हज़रत अली (अ.)  नो फ़रमायाः मैं तुम्हे तक़वे और नज़्म की वसीयत करता हूँ। हम जिस जहान में ज़िन्दगी बसर करते हैं यह नज़्म और क़ानून पर मोक़ूफ़ है। इसमें हर तरफ़ नज़्म व निज़ाम की हुकूमत क़ायम है। सूरज के तुलूअ व ग़ुरूब और मौसमे […]

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    पैगम्बर अकरम (स.) का पैमाने बरादरी

    Rate this post पैगम्बर अकरम (स.) के असहाब के एक मशहूर गिरोह ने इस हदीस को पैगम्बर (स.) नक़्ल किया है। “ अख़ा रसूलुल्लाहि (स.) बैना असहाबिहि फ़अख़ा बैना अबिबक्र व उमर व फ़ुलानुन व फ़ुलानुन फ़जआ अली (रज़ियाल्लहु अन्हु) फ़क़ाला अख़ीता बैना असहाबिक व लम तुवाख़ बैनी व बैना अहद ? फ़क़ाला रसूलुल्लाहि (स.) […]

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    सब्र व तहम्मुल

    Rate this post رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا पालने वाले हमें सब्र अता फ़रमा। सूरः ए बक़रा आयत 250 ख़ुदावंदे आलम ने क़ुरआने मजीद में इस नुक्ते की दो बार तकरार की है कि ان مع العسر يسری  आराम व सुकून दुशवारी व सख़्ती के साथ है। दक़ीक़ मुतालए से मालूम होता है कि निज़ामे ज़िन्दगी […]

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    हुस्ने अख़लाक़

    Rate this post بسم الله الرحمن الرحيم فَبِمَا رَحْمَةٍ مِّنَ اللّهِ لِنتَ لَهُمْ وَلَوْ كُنتَ فَظًّا غَلِيظَ الْقَلْبِ لاَنفَضُّواْ مِنْ حَوْلِكَ सूरः ए आलि इमरान आयतन. 159 यह आयत पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की कामयाबी का राज़ आपके नम्र मिज़ाज को मानती है। इसी वजह से कहा गया है कि अगर आप सख़्त मिज़ाज होते तो […]

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