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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-81

    Rate this post पिछली चर्चा में ईमान या धर्म पर विश्वास के बारे में हमारी बहस से यह स्पष्ट हुआ कि ईमान व ईश्वर पर विश्वास का आधार स्वेच्छा व चयन शक्ति के साथ झुकाव है और यह यह दशा, उस ज्ञान व जानकारी से भिन्न है जो अनेच्छित रूप से बिना किसी अधिकार के […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-८० ईमान क्या है?

    Rate this post वास्तव में ईमान का अर्थ विश्वास होता है अर्थात किसी विषय या वस्तु या अर्थ पर विश्वास और चूंकि ईमान और विश्वास अर्थ की दृष्टि से समान हैं इस लिए निश्चित रूप से ईमान उसी वस्तु या अर्थ पर हो सकता है जिस पर हमें पूर्ण रूप से विश्वास हो। इस लिए […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-79

    Rate this post लोक व परलोक के संदर्भ में चर्चा में एक महत्वपूर्ण विषय कल्याण व सफलता का भी है। मूल रूप से यह प्रश्न उठता है कि कल्याण, सफलता, मोक्ष आदि जैसे शब्दों का अर्थ क्या होता है और अच्छे कर्म तथा धर्म विश्वास मिल कर मनुष्य को कल्याण तक पहुंचाते हैं या फिर […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-78

    Rate this post लोक परलोक के मध्य संबंध के विषय पर चर्चा के अवसर पर कुछ एसी बातें भी सामने आती हैं जिन पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डालने की आवश्यकता है उदाहरण स्वरूप, लोक व परलोक के मध्य जो संबंध है वह वास्तविक व मूल संबंध है या किसी वस्तु के आधार पर यह संबंध […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-77

    Rate this post अब तक की चर्चाओं में हम यह जान चुके हैं कि मनुष्य का जीवन इसी नश्वर संसार तक ही सीमित नहीं है और वह पुनः परलोक में जीवित होगा और सदैव उस लोक में रहेगा तथा हम यह भी जान चुके हैं कि परलोक का जीवन वास्तविक जीवन है यहां तक कि […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म 76

    Rate this post बुद्धि तथा अन्य मार्गों से परलोक के बारे में हमें जो जानकारियां प्राप्त हुई हैं उनके आधार पर हम लोक व परलोक की कई आयामों से एक दूसरे से तुलना कर सकते हैं यद्यपि दोनों के मध्य बहुत अधिक अंतर है। इस संसार और परलोक के मध्य सब से पहला और स्पष्ट […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म 75

    Rate this post अब तक की चर्चाओं में हमने यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि क़यामत है अर्थात एक एसा दिन है जब लोगों से उनके कर्मों का हिसाब लिया जाएगा और उसके बाद अच्छे और बुरे कर्मों का बदला दिया जाएगा आज हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि यह जो परलोक […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म 74

    Rate this post पिछली कई चर्चाओं में हमने यह सिद्ध किया है कि यही संसार सब कुछ नहीं है बल्कि इस लोक के बाद भी एक लोक है जहां हिसाब किताब होगा और उस लोक के प्रथम चरण के रूप में हम ने क़यामत या प्रलय अथवा उस दिन के बारे में जब कर्मों का […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म- 73

    Rate this post पिछले चर्चा में हमने परलोक को सिद्ध करने का प्रयास किया था अर्थात यह प्रमाणित करने का प्रयास किया था कि मनुष्य का जीवन यहीं पर और इसी संसार में समाप्त नहीं होता है बल्कि इस जीवन के बाद भी एक जीवन और इस लोक के बाद भी एक लोक है। इसके […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म 72

    Rate this post हमारी चर्चा यहां तक पहुंची थी कि ईश्वर ने मनुष्य और इस सृष्टि के लिए सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था का चयन किया है तो फिर सदैव रहने वाली आत्मा के लिए क्या व्यवस्था की है? वास्तव में मनुष्य बाक़ी रहने वाली आत्मा का स्वामी होता है और कभी समाप्त न होने वाली परिपूर्णता को […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म 71

    Rate this post हमने अपनी चर्चा के आरंभ में बताया था कि क़यामत पर विश्वास और हर मनुष्य का क़यामत व प्रलय के दिन जीवित होना, समस्त ईश्वरीय धर्मों में एक महत्वपूर्ण विश्वास रहा है और ईश्वरीय दूतों ने इस विश्वास व विचार पर अत्याधिक बल दिया है तथा इस विचार व विश्वास को लोगों […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-70

    Rate this post इससे पहले की चर्चा में यह बताया जा चुका है कि क़यामत का विषय आत्मा के विषय पर आधारित है अर्थात क़यामत की सही रूप से कल्पना, आत्मा की कल्पना और उसे समझे बिना संभव नहीं है। पिछली चर्चा में जो कुछ हमने कहा उससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म 69 – प्रलय है क्या?

    Rate this post परलोक पर विश्वास के लिए क़यामत व प्रलय का अत्यधिक महत्व है किंतु वास्तव में क़यामत या प्रलय है क्या? प्रलय उस दिन को कहते हैं जिस दिन लोगों के कर्मों का हिसाब होगा और कर्म के अनुसार दंड या पुरस्कार दिया जाएगा किंतु इसके लिए एक विषय पर चर्चा आवश्यक है। […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म 68

    Rate this post हम यह बता चुके हैं कि संसार में दो प्रकार के लोग होते हैं एक वह जो इसी संसार को सब कुछ समझते हैं और दूसरे वह जो इस संसार के बाद भी अन्य लोक में विश्वास करते हैं और निश्चित रूप से इन दोनों प्रकार के लोगों के व्यवहार उनके विश्वास […]

  • सृष्टि ईश्वर और धर्म- 67 क़यामत पर आस्था का महत्व
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    सृष्टि ईश्वर और धर्म- 67 क़यामत पर आस्था का महत्व

    सृष्टि ईश्वर और धर्म- 67 क़यामत पर आस्था का महत्व4 (80%) 1 vote[s] कार्यक्रम सृष्टि ईश्वर और धर्म को हमने सृष्टि पर चर्चा से आरंभ किया था जिसके दौरान हमने विभिन्न ईश्वरीय गुणों तथा उसके दूतों और उनके लाए हुए धर्म पर चर्चा की और यह बताया कि ईश्वर ने किस प्रकार मनुष्य के मार्गदर्शन […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म- 66

    Rate this post जिस धर्म का यह कहना हो कि वह अंतिम धर्म है तो उसे सम्पूर्ण और व्यापक भी होना चाहिए और जिस धर्म में भी समाज व राजनीति शामिल न हो उसे सम्पूर्ण व व्यापक धर्म नहीं कहा जा सकता। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैही व आलेही व सल्लम के बाद इस्लामी समाज दो […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म- 65

    Rate this post मानव समाज रचना के आरंभ में असंख्य विषयों से अनभिज्ञ था और उसे हर क़दम पर मार्गदर्शन की आवश्यकता इसी लिए एक के बाद एक ईश्वरीधय दूत भेजे गये किंतु जब समाज में वैचारिक व बौद्धिक विकास एक सीमा तक पहुंच गया तो मार्गदर्शन के आयाम भी कम हो गये और इसी […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म- 64

    Rate this post यह कहना सही नहीं है कि पैग़म्बरे इस्लाम का संदेश केवल एक क्षेत्र से विशेष था क्योंकि इतिहासिक तथ्यों से यह सिद्ध होता है कि उनका संदेश पूरी मानव जाति के लिए था। यदि पैग़म्बरे इस्लाम के काल में कुछ अन्य धर्म इस्लामी सरकार के साथ लेन देन करते थे तो इसका […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म- 63

    Rate this post इस्लामी इतिहास का ज्ञान रखने वालों को पता है कि इस ग्रंथ की सुरक्षा के बारे में ईश्वरीय मार्गदर्शकों और शासकों तथा मुसलमानों में अत्याधिक संवेदनशीलता पाई जाती है इसी लिए वे बड़ी सरलता से इस बात पर विश्वास कर लेगा कि कुरआन में कुछ बढ़ाया या घटाया नहीं गया है कुरआन […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-62

    Rate this post कुरआन मजीद एक मात्र ईश्वरीय ग्रंथ है जो स्पष्ट रूप से यह घोषणा करता है कि किसी में भी उस जैसी रचना पेश करने की क्षमता नहीं है इसी लिए कुरआन मजीद पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैही व आलेही व सल्लम की सत्यता को सिद्ध करने वाले प्रमाण के रूप में पेश किया […]

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