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  •  इस्लाम के मूल सिद्धान्त
    इस्लाम के मूल सिद्धान्त
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    इस्लाम के मूल सिद्धान्त

    इस्लाम के मूल सिद्धान्त 2 (40%) 1 vote इस्लाम के मूल सिद्धान्त लेखकः अय़ातूल्लाह मुहम्मद तकी मिस्बाह य़ज़्दी अनुवादकः क़मर अब्बास अले हसन ज़हरा ज़ैदी अहलुल बैत विश्व परिषद, कुम, इरान ISBN: 978-964-529-244-5

  •  यह हक़ीक़त है
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    यह हक़ीक़त है

    Rate this post किताब: यह हक़ीक़त है लेखक: हुज्जतुल इस्लाम वल मुसलेमीन शेख़ जाफ़र अल हादी

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    पुले सिरात की हक़ीक़त (वास्तविक्ता) क्या है

    Rate this post अगरचे मरने के बाद की दुनिया और क़यामत के बारे में विस्तार से जानना इस संसार के लोगों के लिए संभव नही है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हमें थोड़ी या संक्षिप्त जानकारी भी प्राप्त न हो सके। आयतों और रिवायतों का अध्ययन करने से पता चलता है कि सिरात का […]

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    शिया समुदाय

    Rate this post इस्लाम का आरम्भ हिजाज़ में मक्के नामी शहर से हुआ। और इस धर्म के फैलाने वाले हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम हैं। मक्का वह मुक़द्दस (पवित्र) शहर है जिसमें हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह की इबादत के लिए काबे नामक एक महान व अज़ीम इबादतगाह बनाई थी। हज़रत मुहम्द […]

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    डिक्शनरी में शिया का मतलब

    Rate this post अरबी डिक्शनरीयों में शिया शब्द, किसी एक इंसान या कई इंसानों का किसी दूसरे की बात मानना, किसी की मदद व सपोर्ट करना, तथा कहने या करने में समन्वयन और हमाहंगी के मतलब में इस्तेमाल किया जाता है। नीचे कुछ मशहूर डिक्शनरीयों के नमूने प्रस्तुत किए जा रहे हैं। القاموس: شيعة الرجل […]

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    कैसी होगी मौत के बाद की जिंदगी

    Rate this post यह सवाल हमेशा से इंसान को परेशान करता रहा है। दुनिया का हर मज़हब मौत के बाद जिंदगी का यकीन दिलाता है जबकि मज़हब से इतर लोगों का मानना है कि मौतके बाद जिस्म सड़ गल कर मिट्‌टी हो जाता है और उसके बाद दूसरी जिंदगी का सवाल ही नहीं उठता। इस्लाम इसका यकीन दिलाता है कि मौत […]

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    अल्लाह की पहचान

    Rate this post दीन का आधार सृष्टि के रचयता के वुजूद पर विश्वास रखना है और भौतिकवादी व इलाही विचारधारा के बीच मुख्य अंतर भी इसी विश्वास का होना और न होना है। इस आधार पर सत्य के खोजी के सामने जो पहली बात आती है और जिस का जवाब उसके लिए किसी भी दूसरे […]

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    क़ुरआनी अलफ़ाज़ की ग़लत तफ़सीर (वहाबियत के हाथों)

    Rate this post इस मज़हब का अहम तरीन कारनामा तौहीद और शिर्क का मसअला है और जैसा कि मेने कहा कि यह सब इब्ने तेमिया के अक़ीदों की पैदा वार है। “मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब” अपनी मेगज़ीन “कश्फ़ुल शुबहात” में उन के बारे में लिखता है जिस का निचौड़ कुछ इस तरह है। 1) इस्लाम […]

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    ज़्यादा वाज़ेह बयान (वहाबियत की उलझन)

    Rate this post वहाबी हज़रात के बर ख़िलाफ़, अरब के मुशरेकीन सिर्फ़ इबादत में शिर्क में गिरफ़तार नहीं थे, या दूसरे लफ़्ज़ों में “कल्मा” “ऐलाह” तमाम जगहों पर माबूद के माइनी में नहीं है बल्कि कभी कभी ख़ालिक़ के माइनी में भी इस्तेमाल होता है जैसा कि क़ुरआने मजीद का इरशाद हैः- امّ التّخذوا آلهةً […]

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    इब्ने तेमिया की नाकामी की दलीलें

    Rate this post जैसा कि आलिम हज़रात जानते हैं वहाबी मज़हब का पैशवा और रेहबर जैसा कि उसने ख़ुद इस बात को क़बूल किया है “इब्ने तेमिया” के साथ ही उठता बैठता था इब्ने तेमिया भी शिर्क, तौहीद, शिफ़ाअत और इस जैसी तमाम बातों में यही नज़रया रखता था लेकिन क्या हुआ वोह दमिश्क़ में […]

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    4- इमाम हज़रत ज़ैनुल अबेदीन (अ)

    Rate this post हज़रत अली इब्नूल हुसैन ज़ैनुल अबेदीन (अ) इमाम हुसैन (अ) के पुत्र, आपकी माता (शहर बानो) बादशाह यज़्द गिर्द ईरान की पुत्रि थीं, जैसा कहा जाता है कि आप जुमेंरात के दिन 5शाबान. हिजरी सन 38 या जुमेंरात 15 जमादिउल अव्वल 36 हिजरी सन, जिस दिन हज़रत अली (अ) ने बस्रा को विजय के प्राप्त किया, उसी दिन आपने मदीना मनव्वरह में क़दम […]

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    3- इमाम हुसैन (अ)

    Rate this post हज़रत इमाम हुसैन (अ) अली इव्ने अबि तालिब (अ) के बालक, सम्मानिता माता हज़रत फातिमा ज़हरा (सालाः) रसूले खुदा की एकलोती बेटी है। हज़रत इमाम हुसैन (अ) हज़रत रसूल (स.) के नवासे और आपने भाई हसने (अ) के बाद तीसरे रहबर (धार्मिक नेता) है। आपने तीसरी शअबान चार हिजरी मदीना मुनव्वरह में जन्म लिया […]

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    2- इमाम हसन (अ)

    Rate this post हज़रत इमाम हसने (अ) आप अली इव्ने अबितालिब (अ) के एक सुमहान बालक है, माता हज़रत फातिमा ज़हरा (सालाः) रसूले खुदा की एकलौती बालिका है। हज़रत इमाम हसने (अ) हज़रत रसूल (स.) के नवासे और हज़रत अली (अ) के वाद दूसरे इमाम है। आप पवित्र रम्ज़ानुल मुवारक़ के 15 तारीख मगंल के दिन तीसरी हिज़री मदीना […]

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    1- इमाम अली (अ)

    Rate this post   हज़रत अमिरुल मोमेंनीन (अ) अबुतालिब (अ) के पुत्र, माता फातिमा बिन्ते असद, और रसूले खुदा पैग़म्बरे अकरम (स.) के दामाद, और समस्त इमामों के पिता है। एंव रसूले खुदा के बाद समस्त मोमिन के इमाम है, जो तेरह (13) रजब गुरुवार के दिन रसूले खुदा (स.) के जन्म के तीस साल बाद मक्के (ख़ाना-ए काबा) में जन्म लाभ […]

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    पैग़म्बरे अकरम (स.) की पूत्री

    Rate this post अहले बैत (अ) खा़न्दाने वही है ज़रुरी है कि सार के तौर पर गुज़ारीश के साथ अहले बैत गिरामी हज़रत फातिमा ज़हरा व अएम्माह अतहार (अ) के इतिहास को बयान करुँ।   पैग़म्बरे अकरम (स.) की पूत्री हज़रत फातिमा ज़हरा (स.) की, वलीदे गिरामी अल्लाह की तरफ़ से भेजा हुआ बन्दा मुहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह, व आपकी […]

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    शिया एक आसमानी नाम है

    Rate this post (شيعه) शब्दार्थ कूरआन मजीद में मात्र हज़रत ईब्राहीम खलीलुर रह्मान के लिए व्यबाहर हूआ हैं जैसा कि क़ुरआन मजीद में इर्शाद हुआ हैः (وان من شيعته لإبراهيم) यानि शिया पैरुवाने नुह हज़रत इब्राहीम (अ) के थे, और हज़रत मुहम्मद (स.) मात्र शिया का नाम पैरुवाने व दोस्त दराने हज़रत अली (अ) के लिए उल्लेख किया […]

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    इमामतः प्रथम व शेष वही की निर्देश है

    Rate this post पैग़म्बरे अकरम (स.) इस्लाम की तब्लीग़ के लिए पहली मज़लिस में रसूले अकरम (स.)पहली मज़लिज़ के दर्मियान आपने जान्शीन का परिचय कराया था, और इस्लाम की आख़री पैठक में समस्त प्रकार मूसल्मानों के दर्मियान ग़दीरे ख़ुम के मैदान में अपना निर्दष्ट ख़लीफ़ा को बयान फरमायाः और अल्लाह की तरफ़ से मूकम्मल दीन को सही […]

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    एक विषय जिस को हमें भूलना नहीं चाहिए

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    इमाम (अ) का निर्वाचन करना किस का दायित्व है?

    Rate this post मुस्लमान के दर्मियान गल्त फह्मि के कारण से शिया और सुन्नी में दो प्रकार भाग हो गये। शियों के अक़ीदा व यक़ीन है, कि पवित्र क़ुराने मजीद और अहले बैत (अ) की हदीस के मुताबिक़ इमामत रिसालत की समस्त प्रकार की दायित्व सम्पूर्ण करेगें। पैग़म्बरे अकरम (स.) अल्लाह के निर्देश से आपने स्थान पर […]

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    4- इमामत

    Rate this post इमामत का शब्दार्थ है, कि कोई किसी के सामने था और वह उन लोगों को सही पथ निर्दशन कर रहा था। या उन लोगों को दिनी, राजनिती, या एक समाजिक़ काम का दायित्व लिया था और दूसरों ने उन को अनुशरण किया था। इस कथा पर ध्यान देना बहूत अबशक है, कि इमाम शब्दार्थ (इमाम) शियों […]

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