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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-10

    Rate this post इस्लाम धर्म में शिफ़ाअत ईश्वर की ओर से मनुष्यों पर एक विभूती बतायी गयी है। जिन लोगों ने उपासना के बंधन को नहीं तोड़ा है और अनेकेश्वरवाद का शिकार नहीं हुए हैं, ईश्वर के निकटवर्ती बंदों की शिफ़ाअत उनके लिए आशा की किरण है जो निराशा को उनके दिलों से दूर करती […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-9

    Rate this post  इस्लाम धर्म में शिफ़ाअत ईश्वर की ओर से मनुष्यों पर एक विभूती बतायी गयी है। जिन लोगों ने उपासना के बंधन को नहीं तोड़ा है और अनेकेश्वरवाद का शिकार नहीं हुए हैं, ईश्वर के निकटवर्ती बंदों की शिफ़ाअत उनके लिए आशा की किरण है जो निराशा को उनके दिलों से दूर करती […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-8

    Rate this post     शेफ़ाअत अर्थात सिफ़ारिश के शब्द से सभी पूर्णरूप से अवगत हैं। जब भी अपराध, पाप और एक व्यक्ति की निंदा की बात होती है और कोई व्यक्ति मध्यस्थ बनता है ताकि उसे दंड से मुक्ति दिलाए तो कहते हैं कि अमुक व्यक्ति ने उसके लिए सिफ़ारिश की। शेफ़ाअत का अर्थ […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-7

    Rate this post जैसा कि हमने पिछले कार्यक्रम में उल्लेख किया कि ईश्वर के बारे में वहाबियों का यह विश्वास कि ईश्वर भौतिक विशेषताओं का स्वामी है, क़ुराने मजीद और पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पवित्र कथनों एवं सामान्यबोध के प्रतिकूल है, कहा जा सकता है कि यह धारणा केवल इब्ने तैमिया और उसके शिष्यों एवं […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-6

    Rate this post वहाबी समुदाय का वैचारिक संस्थापक इब्ने तैमिया एकेश्वरवाद के संबंध में विभिन्न आस्था रखता है जो कभी तो मुसलमानों की आस्थाओं से भिन्न होती है और कभी विरोधाभास रखती है। ईश्वर के बारे में उसके विचारों में से एक उसने ईश्वर को धरती के अन्य जीवों की भांति चलता फिरता और गतिशील […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-5

    Rate this post वहाबियत की आधारशिला रखने वाले इब्ने तैमिया ने अपने पूरे जीवन में बहुत सी किताबें लिखीं और अपनी आस्थाओं का अपनी रचनाओं में उल्लेख किया है। उन्होंने ऐसे अनेक फ़त्वे दिए जो उनसे पहले के किसी भी मुसलमान धर्मगुरु ने नहीं दिए थे विशेष रूप से ईश्वर के बारे में। वह्हाबियों का […]

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    वहाबियत, वास्तविकता व इतिहास -1

    Rate this post वहाबियत की आधारशिला रखने वाले इब्ने तैमिया ने अपने पूरे जीवन में बहुत सी किताबें लिखीं और अपनी आस्थाओं का अपनी रचनाओं में उल्लेख किया है। उन्होंने ऐसे अनेक फ़त्वे दिए जो उनसे पहले के किसी भी मुसलमान धर्मगुरुओं ने नहीं दिए विशेष रूप से ईश्वर के बारे में। वह्हाबियों का मानना […]

  •  हमारे अक़ीदे
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    हमारे अक़ीदे

    Rate this post बिस्मिल्लाहि अर्रहमानि अर्रहीमि इस किताब की तालीफ़ का मक़सद और इसकी ज़िम्मेदारी1)हम इस दौर में एक बहुत बड़े बदलाव का मुशाहेदह कर रहे हैं,ऐसा बदलाव जो आसमानी अदयान में से सबसे बड़े दीन “दीने इस्लाम” में रुनुमा हो रहा हैं।हमारे ज़माने में इस्लाम ने एक नया जन्म लिया है,आज पूरी दुनिया के […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-4

    Rate this post जिन विषयों के बारे में वह्हाबियों ने अत्यधिक हो हल्ला मचाया है उनमें से एक ईश्वर के प्रिय बंदों से तवस्सुल या अपने कार्यों के लिए उनके माध्यम से ईश्वर से सिफ़ारिश करवाना है। सलफ़ी, तवस्सुल को एकेश्वरवाद के विरुद्ध बताते हैं और उनका कहना है कि ऐसा करने वाला अनेकेश्वरवादी है। […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-3

    Rate this post हिंसा और निर्दयता में प्रसिद्ध सऊद इब्ने अब्दुल अज़ीज़ ने मक्के पर क़ब्ज़ा करने के दौरान सुन्नी समुदाय के बहुत से विद्वानों को अकारण ही मार डाला और मक्के के बहुत से प्रसिद्ध व प्रतिष्ठित लोगों को बिना किसी आरोप के फांसी पर चढ़ा दिया। प्रत्येक मुसलमान को, जो अपनी धार्मिक आस्थाओं […]

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    वहाबियत, वास्तविकता व इतिहास-2

    Rate this post मोहम्मद बिन अब्दुल वह्हाब ने कई शताब्दियों के बाद इब्ने तय्मिया के भ्रष्ठ विचारों का प्रचार करना आरंभ कर दिया। इन्ने तयमिया के भ्रष्ठ, ग़लत और फूट डालने वाले विचारों को १९वीं ईसवी शताब्दी के आरंभ में इतिहास की बहुत ही ख़राब व विषम स्थिति में प्रस्तुत किया गया। उस समय इस्लामी […]

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    तौहीद की क़िस्में

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि तौहीद की बहुत सी क़िस्में हैं जिन में से यह चार बहुत अहम हैं। तौहीद दर ज़ात यानी उसकी ज़ात यकता व तन्हा है और कोई उसके मिस्ल नही है तौहीद दर सिफ़ात यानी उसके सिफ़ात इल्म, क़ुदरत, अज़लीयत,अबदियत व …..तमाम उसकी ज़ात में जमा हैं और उसकी […]

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    ऐतेराज़ात और जवाबात

    Rate this post ऐतेराज़ात रिवायत में वारिद हुआ है कि हज़रत के जम़ाने में भेड़िये और बकरी एक मक़ाम पर चरेगें, हाँलाकि कि बकरी की तबीयत में भेड़िये से ख़ौफ़ खाना है। और भेड़िये की तबीयत में बकरी को फाड़ खाना है, चुनाँचे न तो भेड़िया ही बकरी के साथ रह सकता है और न […]

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    शियों के अहले सुन्नत से प्रश्न

    Rate this post 1-खलीफ़ा की नियुक्ति अच्छा कार्य है या बुरा? अगर अच्छा कार्य है तो फ़िर क्यों कहा जाता है कि पैगम्बर ने किसी को खलीफ़ा नियुक्त नही किया। और अगर यह कार्य बुरा है तो फ़िर आदरनीय अबुबकर व उमर ने यह कार्य क्यों किया? 2-जब हज़रत पैगम्बर सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वसल्लम […]

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    मुनाज़ेर ए इमाम सादिक़ (अ) व अबू हनीफ़ा

    Rate this post इब्ने अबी लैला से मंक़ूल है कि मुफ़्ती ए वक़्त अबू हनीफ़ा और मैं बज़्मे इल्म व हिकमते सादिक़े आले मुहम्मद हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम में वारिद हुए। इमाम (अ) ने अबू हनीफ़ा से सवाल किया कि तुम कौन हो? मैं: अबू हनीफ़ा इमाम (अ): वही मुफ़्ती ए अहले इराक़ […]

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    शियों के अहले सुन्नत से प्रश्न : 3

    Rate this post 17-आप कहते हैं कि पैगम्बर ने कहा कि “मेरे असहाब सितारों के समान हैं तुम जिसका भी अनुसरन करोगे हिदायत प्राप्त कर लोगे।” परन्तु सहीह बुखारी किताब फ़ज़ाइल असहाबुन नबी, बाब मनाक़िबे उस्मान बिन उफ़्फ़ान 75/5 मे लिखा है कि वलीद पुत्र उक़बा नामक सहाबी ने शराब पी तथा आदरनीय उस्मान ने […]

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    शियों के अहले सुन्नत से प्रश्न : 1

    Rate this post 1-खलीफ़ा की नियुक्ति अच्छा कार्य है या बुरा? अगर अच्छा कार्य है तो फ़िर क्यों कहा जाता है कि पैगम्बर ने किसी को खलीफ़ा नियुक्त नही किया। और अगर यह कार्य बुरा है तो फ़िर आदरनीय अबुबकर व उमर ने यह कार्य क्यों किया? 2-जब हज़रत पैगम्बर सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वसल्लम […]

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    शियों के अहले सुन्नत से प्रश्न : 2

    Rate this post 9-आप कहते हैं कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम खलीफ़ाओं को स्वीकार किया करते थे।परन्तु आदरनीय उमर कहते हैं कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम हमको झूटा,पापी व धोखे बाज़ मानते थे।( सहीह मुस्लिम किताबुल जिहाद वस्सैर बाबुल फ़ै एक लम्बी हदीस के अन्तर्गत) अब आप बताऐं कि आदरनीय उमर सत्य कहते हैं या आप? 10-दूसरे […]

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    ख़ुदा की याद हर मुश्किल का हल

    Rate this post आज की तरक़्क़ी याफ़ता दुनिया में जिस क़दर आसाइश व आराम के वसायल मुहैय्या हैं उसी क़दर सुकून व इतमीनान का फ़ोक़दान है अगर एक तरफ़ सरमाया, औलाद, इल्म, हुनर वग़ैरह में इज़ाफ़ा होता है तो दूसरी जानिब उन्ही तमाम चीज़ों के ज़रिये बे चैनी व इज़तेराब में भी इज़ाफ़ा होता है […]

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    तौहीद, तमाम इस्लामी तालीमात की रूह है

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि अल्लाह की माअरफ़त के मसाइल में मुहिमतरीन मस्ला माअरफ़ते तौहीद है। तौहीद दर वाक़ेअ उसूले दीन में से एक अस्ल ही नही बल्कि तमाम अक़ाइदे इस्लामी की रूह है। और यह बात सराहत के साथ कही जा सकती है तौहीद, तमाम इस्लामी तालीमात की रूह है हमारा अक़ीदह […]

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