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    सृष्टि, ईश्वर और धर्म-22 बात करने का ईश्वर का गुण

    Rate this post ईश्वर के लिए जिन कामों की कल्पना की जाती है उनमें से एक बोलना और बात करना भी है। ईश्वर का बोलना और उसका कथन प्राचीन काल से ही बुद्धिजीवियों के मध्य चर्चा का विषय रहा है। यह विषय इतना महत्वपूर्ण बना कि ईश्वरीय गुणों में इस्लामी इतिहास में इसे सवार्धिक चर्चा […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-21 ईश्वर का इरादा

    Rate this post सृष्टि ईश्वर और धर्म-21 ईश्वर का इरादाईश्वर का एक महत्वपूर्ण गुण ईश्वर होना है। ईश्वर की ईश्वरीयता के बारे बहुत कुछ कहा जा चुका है और बहुत कुछ कहा जा सकता है किंतु यहां पर हम यही स्पष्ट करना चाहेंगे कि अरबी भाषा में इलाह का अर्थ होता है पूज्य। इलाह से […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-20 रचयिता ही पालनहार

    Rate this post यह सिद्ध होने के बाद कि आत्मभू अस्तित्व, सभी अन्य अस्तित्वों का मूल कारक है और इस बात के दृष्टिगत के पूरी सृष्टि को उसकी आवश्यकता है स्वयंभू अस्तित्व अर्थात ईश्वर का रचयिता और उसके अतिरिक्त हर वस्तु का उसकी रचना होना सिद्ध होता है। रचना के भी दो अर्थ हैं मनुष्य […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म़-19 ईश्वर के तुलनात्मक गुण

    Rate this post इससे पहले की चर्चाओं में हम यह बता चुके हैं कि ईश्वर के गुण दो प्रकार के होते हैं एक व्यक्तिगत और दूसरे तुलनात्मक। व्यक्तिगत गुणों पर चर्चा हो चुकी और अब बारी है तुलनात्मक गुणों की। तुलनात्मक गुण, उन गुणों को कहते हैं जो ईश्वर और मनुष्य के मध्य एक विशेष […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-18 ईश्वर की शक्ति व इरादा

    Rate this post हमारी चर्चा चल रही है ईश्वरीय गुणों और विशेषताओं के विषय पर पिछली चर्चा में ईश्वर के जीवन व ज्ञान के बारे में बात की गई इस चर्चा में ईश्वर के एक अन्य गुण “शक्ति” पर चर्चा कर रहे हैं। तो सब से पहले तो यह जानना आवश्यक है शक्ति क्या है? […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-17 कैसा है ईश्वर का जीवन?

    Rate this post ईश्वर के व्यक्तिगत गुणों में से एक जीवन है। हम इसी विषय की समीक्षा करेंगे। इस विश्व और ब्रह्मांड में बहुत सी चीज़े जीवित हैं किंतु उन में बहुत अंतर है। जीवन में भी अंतर होता है। जब हम यह कहते हैं कि ईश्वर जीवित है तो यह प्रश्न उठता है कि […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-16 ईश्वर की विशेषताएं

    Rate this post ईश्वर के गुणों की गणना तो संभव नही है इस लिए हर वह गुण जो परिपूर्णता को दर्शाता हो और जिसमें किसी प्रकार की कमी की कल्पना न की जा सकती हो वह ईश्वर में होता है। यूं तो ईश्वर के बहुत से नाम और गुण हैं किंतु इस्लामी दर्शनशास्त्र और इस्लामी […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-15 एक वस्तु के कई कारक

    Rate this post हमें अच्छी तरह से पता है कि पेड़ पौधों को उगने के लिए बीज और अनुकूल मिट्टी तथा जलवायु की आवश्यकता होती है किंतु इन सब वस्तुओं के साथ ही एक भौतिक कारक जैसे मनुष्य की भी आवश्यकता होती है जो इस बीज को बोए और पौधा उगने के बाद उसकी सींचाई […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-14 निर्भर और आत्म निर्भर कारक

    Rate this post यदि यह सोच लिया जाए कि अनिवार्य अस्तित्व या आत्मभू अस्तित्व के सभी अंश हर काल में उपस्थित नहीं होते तो यह सोचना सही नहीं होगा क्योंकि जिस वस्तु का कल्पना के स्तर पर ही सही विभाजन किया जा सके वो विभाज्य होती है भले ही व्यवहारिक रूप से ऐसा करना संभव […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-13 ईश्वरीय गुण

    Rate this post पिछली चर्चा में यह बताया गया कि बहुत से दार्शनिक तर्कों का उद्देश्य अनिवार्य अस्तित्व को सिद्ध करना है और कुछ अन्य तर्कों द्वारा उस अनिवार्य अस्तित्व के लिए कुछ गुण आवश्यक और कुछ त्रुटियों से उसकी पवित्रता को सिद्ध किया जाता है जिसके बाद ईश्वर अपने विशेष गुणों के साथ पहचाना […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-11 एवं 12 सरल तर्क

    Rate this post पिछली चर्चा में बताया गया कि ईश्वरीय दर्शनशास्त्रियों और धर्मगुरुओं ने ईश्वर के अस्तित्व को प्रमाणित करने के लिए बहुत से तर्क और प्रमाण पेश किए हैं जिन्हें इस विषय से संबंधित पुस्तकों में देखा जा सकता है। हमने यहाँ पर एक ऐसे तर्क और प्रमाण को आप के लिए चुना है […]

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    सृष्टि, ईश्वर और धर्म-9 एवं 10 ईश्वर कैसा है?

    Rate this post हम यह जान चुके हैं कि धर्म का आधार इस सृष्टि के रचयिता के अस्तित्व पर विश्वास है और भौतिकवादी व ईश्वरीय विचारधारा के मध्य मुख्य अंतर भी इसी विश्वास का होना और न होना है। इस आधार पर सत्य के खोजी के सामने जो पहली बात आती है और जिसका उत्तर […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-7 एवं 8 ज्ञान का सही मार्ग

    Rate this post पिछली चर्चा में यह बताया गया कि मनुष्य को ईश्वर तक पहुंचने के लिए सही मार्ग का चयन करना चाहिए और यह सही मार्ग है धर्म। अब प्रश्न यह उठता है कि जब मनुष्य धर्म तथा आयडियालोजी की मूल समस्याओं को समझना चाहता तो इसके लिए क्या मार्ग अपनाए? इस संदर्भ में […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-6 स्वयं को पहचानें किंतु क्यों?

    Rate this post पिछली चर्चा में हमने जाना कि प्रत्येक मनुष्य में प्रगति की चाहत होती है और वह स्वाभाविक रुप से अपनी कमियों को छिपाने का प्रयास करता है प्रगति की स्वाहाविक चाहत को यदि सही दिशा मिल जाए तो वह मनुष्य की परिपूर्णता का कारण बनती है अन्यथा विभिन्न प्रकार के अवगुणों को […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-5 स्वाभाविक भावना

    Rate this post यह जो कहा जाता है कि धर्म के प्रति जिज्ञासा एक स्वाभाविक बात है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि यह भावना सदैव सब लोगों में समान रूप से पायी जाती है बल्कि संभव है कि बहुत से लोगों में यह भावना विशेष परिस्थितियों और ग़लत प्रशिक्षण के कारण निष्क्रिय रूप […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-४ परिपूर्णता का मार्ग

    Rate this post भले इंसान की भांति जीवन व्यतीत करने के लिए सही आयडियालोजी व विचारधारा आवश्यक है। इस बात को समझने के लिए तीन बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक हैः १, मनुष्य परिपूर्णता की खोज करने वाला प्राणी है। २, मनुष्य परिपूर्णता तक कुछ ऐसे कामों द्वारा पहुंचता है जो बुद्धि से मेल खाते […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-3 जिज्ञासा

    Rate this post मनुष्य में स्वाभाविक रूप से वास्तविकता की खोज और सत्य तक पहुंचने की इच्छा होती है जो बालावस्था से ही उसमें प्रकट होने लगती है। यही भावना जिसे जिज्ञासा भी कहा जाता है मनुष्य को उन विषयों के बारे में भी विचार व अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है जो […]

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    सृष्टि ईश्वर और धर्म-2 धर्म क्या है?

    Rate this post धर्म क्या है? धर्म वास्तव में कुछ लोगों के विश्वासों और ईश्वर की ओर से मानव समाज के लिए संकलित शिक्षाओं को कहा जाता है और इसे एक दृष्टि से कई प्रकारों में बांटा जा सकता है। उदाहरण स्वरूप प्राचीन व विकसित धर्म। यदि इतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो धर्म व […]

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    सृष्टि, ईश्वर और धर्म-1 सृष्टिकर्ता अनिवार्य है।

    Rate this post प्राचीन काल से ही मनुष्य के मन में यह प्रश्न उठता रहा है कि सृष्टि का आरंभ कब हुआ, कैसे हुआ, क्या यह संभव है कि मनुष्य कभी यह समझ सके कि चाँद, सितारे, आकाशगंगाएं, पुच्छलतारे, पृथ्वी, पर्वत, उसकी ऊँची ऊँची चोटियाँ, जंगल, कीड़े-मकोड़े, पशु, पक्षी, मनुष्य, जीव-जन्तु यह सब कहाँ से […]

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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-4

    Rate this post जिन विषयों के बारे में वह्हाबियों ने अत्यधिक हो हल्ला मचाया है उनमें से एक ईश्वर के प्रिय बंदों से तवस्सुल या अपने कार्यों के लिए उनके माध्यम से ईश्वर से सिफ़ारिश करवाना है। सलफ़ी, तवस्सुल को एकेश्वरवाद के विरुद्ध बताते हैं और उनका कहना है कि ऐसा करने वाला अनेकेश्वरवादी है। […]

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