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    वहाबियत, वास्तविकता और इतिहास-3

    Rate this post हिंसा और निर्दयता में प्रसिद्ध सऊद इब्ने अब्दुल अज़ीज़ ने मक्के पर क़ब्ज़ा करने के दौरान सुन्नी समुदाय के बहुत से विद्वानों को अकारण ही मार डाला और मक्के के बहुत से प्रसिद्ध व प्रतिष्ठित लोगों को बिना किसी आरोप के फांसी पर चढ़ा दिया। प्रत्येक मुसलमान को, जो अपनी धार्मिक आस्थाओं […]

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    वहाबियत, वास्तविकता व इतिहास-2

    Rate this post मोहम्मद बिन अब्दुल वह्हाब ने कई शताब्दियों के बाद इब्ने तय्मिया के भ्रष्ठ विचारों का प्रचार करना आरंभ कर दिया। इन्ने तयमिया के भ्रष्ठ, ग़लत और फूट डालने वाले विचारों को १९वीं ईसवी शताब्दी के आरंभ में इतिहास की बहुत ही ख़राब व विषम स्थिति में प्रस्तुत किया गया। उस समय इस्लामी […]

  • इंसान को बेदार तो हो लेने दो – हर क़ौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन
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    इंसान को बेदार तो हो लेने दो – हर क़ौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन

    इंसान को बेदार तो हो लेने दो – हर क़ौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन2 (40%) 1 vote[s] अत्याचार के विरुद्ध इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के संघर्ष में आशूरा की घटना उस गगन चुंबी चोटी की भांति है जिसके चलते घाटियां मानो दिखाई ही नहीं देतीं। इमाम हुसैन का आन्दोलन, इस्लाम की शिक्षाओं से प्रवाहित होने वाली […]

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    तौहीद की क़िस्में

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि तौहीद की बहुत सी क़िस्में हैं जिन में से यह चार बहुत अहम हैं। तौहीद दर ज़ात यानी उसकी ज़ात यकता व तन्हा है और कोई उसके मिस्ल नही है तौहीद दर सिफ़ात यानी उसके सिफ़ात इल्म, क़ुदरत, अज़लीयत,अबदियत व …..तमाम उसकी ज़ात में जमा हैं और उसकी […]

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    शादी शुदा ज़िन्दगी

    Rate this post शादी इंसानी ज़िन्दगी का अहम तरीन मोड़ है जब दो इंसान अलग लिंग से होने के बावजूद एक दूसरे की ज़िन्दगी में मुकम्मल तौर से दख़ील हो जाते हैं और हर को दूसरे की ज़िम्मेदारी और उसके जज़्बात का पूरे तौर पर ख़्याल रखना पड़ता है। इख़्तिलाफ़ की बेना पर हालात और […]

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    अस्रे हाज़िर का जवान और आईडियल

    Rate this post आज के तरक़्क़ी याफ़ता दौर में हर नौ जवान को अपने आईडियल की तलाश है। कोई किसी फ़नकार में अपना आईडियल तलाश करता है तो कोई हिदायत कार में अपना आईडियल तलाश करने की कोशिश करता है और फिर उसी के तर्ज़ पर अपनी ज़िन्दगी गुज़ारने की कोशिश करता है और यह […]

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    नन्हे – मुन्ने शिशुओं की समस्याऐं

    Rate this post आप का शिशु जब जन्म लेता है तो उसका मस्तिष्क सीखने के लिए तैयार होता है। जब वो आंखें खोलता है, उसकी बुद्धि अपने चारों ओर की चीज़ों को समझने के लिए तैयार हो जाती है। अब आप यह देखें कि इसमें आप उसकी किस प्रकार सहायता कर सकते हैं। शिशु का […]

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    ऐतेराज़ात और जवाबात

    Rate this post ऐतेराज़ात रिवायत में वारिद हुआ है कि हज़रत के जम़ाने में भेड़िये और बकरी एक मक़ाम पर चरेगें, हाँलाकि कि बकरी की तबीयत में भेड़िये से ख़ौफ़ खाना है। और भेड़िये की तबीयत में बकरी को फाड़ खाना है, चुनाँचे न तो भेड़िया ही बकरी के साथ रह सकता है और न […]

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    शियों के अहले सुन्नत से प्रश्न

    Rate this post 1-खलीफ़ा की नियुक्ति अच्छा कार्य है या बुरा? अगर अच्छा कार्य है तो फ़िर क्यों कहा जाता है कि पैगम्बर ने किसी को खलीफ़ा नियुक्त नही किया। और अगर यह कार्य बुरा है तो फ़िर आदरनीय अबुबकर व उमर ने यह कार्य क्यों किया? 2-जब हज़रत पैगम्बर सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वसल्लम […]

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    मुनाज़ेर ए इमाम सादिक़ (अ) व अबू हनीफ़ा

    Rate this post इब्ने अबी लैला से मंक़ूल है कि मुफ़्ती ए वक़्त अबू हनीफ़ा और मैं बज़्मे इल्म व हिकमते सादिक़े आले मुहम्मद हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस सलाम में वारिद हुए। इमाम (अ) ने अबू हनीफ़ा से सवाल किया कि तुम कौन हो? मैं: अबू हनीफ़ा इमाम (अ): वही मुफ़्ती ए अहले इराक़ […]

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    शियों के अहले सुन्नत से प्रश्न : 3

    Rate this post 17-आप कहते हैं कि पैगम्बर ने कहा कि “मेरे असहाब सितारों के समान हैं तुम जिसका भी अनुसरन करोगे हिदायत प्राप्त कर लोगे।” परन्तु सहीह बुखारी किताब फ़ज़ाइल असहाबुन नबी, बाब मनाक़िबे उस्मान बिन उफ़्फ़ान 75/5 मे लिखा है कि वलीद पुत्र उक़बा नामक सहाबी ने शराब पी तथा आदरनीय उस्मान ने […]

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    शियों के अहले सुन्नत से प्रश्न : 1

    Rate this post 1-खलीफ़ा की नियुक्ति अच्छा कार्य है या बुरा? अगर अच्छा कार्य है तो फ़िर क्यों कहा जाता है कि पैगम्बर ने किसी को खलीफ़ा नियुक्त नही किया। और अगर यह कार्य बुरा है तो फ़िर आदरनीय अबुबकर व उमर ने यह कार्य क्यों किया? 2-जब हज़रत पैगम्बर सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वसल्लम […]

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    शियों के अहले सुन्नत से प्रश्न : 2

    Rate this post 9-आप कहते हैं कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम खलीफ़ाओं को स्वीकार किया करते थे।परन्तु आदरनीय उमर कहते हैं कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम हमको झूटा,पापी व धोखे बाज़ मानते थे।( सहीह मुस्लिम किताबुल जिहाद वस्सैर बाबुल फ़ै एक लम्बी हदीस के अन्तर्गत) अब आप बताऐं कि आदरनीय उमर सत्य कहते हैं या आप? 10-दूसरे […]

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    ख़ुदा की याद हर मुश्किल का हल

    Rate this post आज की तरक़्क़ी याफ़ता दुनिया में जिस क़दर आसाइश व आराम के वसायल मुहैय्या हैं उसी क़दर सुकून व इतमीनान का फ़ोक़दान है अगर एक तरफ़ सरमाया, औलाद, इल्म, हुनर वग़ैरह में इज़ाफ़ा होता है तो दूसरी जानिब उन्ही तमाम चीज़ों के ज़रिये बे चैनी व इज़तेराब में भी इज़ाफ़ा होता है […]

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    तौहीद, तमाम इस्लामी तालीमात की रूह है

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि अल्लाह की माअरफ़त के मसाइल में मुहिमतरीन मस्ला माअरफ़ते तौहीद है। तौहीद दर वाक़ेअ उसूले दीन में से एक अस्ल ही नही बल्कि तमाम अक़ाइदे इस्लामी की रूह है। और यह बात सराहत के साथ कही जा सकती है तौहीद, तमाम इस्लामी तालीमात की रूह है हमारा अक़ीदह […]

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    तौहीद

    Rate this post तौहीद के सम्पूर्ण व परिपूर्ण प्रसंसा यह है किः इंसान को जान लेना चाहीए, कि ख़ूदा वन्दे आलम इस पृथ्वी को सृष्ट किया है. और इस पृथ्वी को अनुपस्थित से उपस्थित में लाया है। और उस पृथ्वी को समस्त प्रकार के निर्देश उस अल्लाह के हाथ में है, रुज़ी, ज़िन्दगी, मौत देना, […]

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    सिफाते जमाल व कमाले ख़ुदा

    Rate this post ख़ुदा वन्दे आलम एक व एकताई है और समस्त की समस्त अच्छी गुणावली उस के भीतर उपस्थित है, उदाहरणः ज्ञानः ज्ञान का अर्थ है, कि अल्लाह समस्त जहान के मख्लूक़ को चाहे वह बड़ा हो या छोटा या कहीं भी हो हत्ता इंसानों के दिलों में वह उस चीज़ को भी ज्ञान […]

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    सिफ़ाते जलाले ख़ुदा

    Rate this post ख़ुदा हमेंशा से है और हमेंशा रहेगा वह समस्त नुक़्स व ऐब से पाक व पवित्र है। प्रत्येक कम व बेशि से दूर है, वह उपस्थित जैसी उपस्थित नहीं है कि शरीर का मोह्ताज हो या विभिन्न प्रकार किसी आज ज़ा से पैदा नहीं है कि किसी स्थान को पुर करे या […]

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    अल्लाह का वुजूद

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि अल्लाह इस पूरी कायनात का ख़ालिक़ है, सिर्फ़ हमारे वुजूद में,तमाम जानवरों में,नबातात में,आसमान के सितारों में,ऊपर की दुनिया में ही नही बल्कि हर जगह पर तमाम मौजूदाते आलम की पेशानी पर उसकी अज़मत,इल्म व क़ुदरत की निशानियाँ ज़ाहिर व आशकार हैं। हमारा अक़ीदह है कि हम इस […]

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    उसकी ज़ाते पाक नामुतनाही (अपार,असीम)है

    Rate this post हमारा अक़ीदह है कि उसका वुजूद नामुतनाही है अज़ नज़रे इल्म व क़ुदरत,व अज़ नज़रे हयाते अबदीयत व अज़लीयत,इसी वजह से ज़मान व मकान में नही आता क्योँकि जो भी ज़मान व मकान में होता है वह महदूद होता है। लेकिन इसके बावजूद वह वक़्त और हर जगब मौजूद रहता है क्योँ […]

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