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    कैसा है ईश्वर का जीवन? : 2

    Rate this post अब प्रश्न यह है कि ईश्वर के जीवन का क्या अर्थ है? इसके लिए यह जानना आवश्यक होगा कि जीवन का क्या अर्थ है। उस अर्थ में जीवन जिस के लिए ज्ञान व शक्ति अनिवार्य हों वास्तव में शरीर की नहीं बल्कि आत्मा की विशेषता होता है। अर्थात प्राण वास्तव में शरीर […]

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    कैसा है ईश्वर का जीवन? : 1

    Rate this post ईश्वर के व्यक्तिगत गुणों में से एक जीवन है। हम इसी विषय की समीक्षा करेंगे। इस विश्व और ब्रह्मांड में बहुत सी चीज़े जीवित हैं किंतु उन में बहुत अंतर है। जीवन में भी अंतर होता है। जब हम यह कहते हैं कि ईश्वर जीवित है तो यह प्रश्न उठता है कि […]

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    ईश्वर की शक्ति व इरादा : 2

    Rate this post शक्ति की जो परिभाषा है उसमें अधिकार व इच्छा भी शामिल। अर्थात सही अर्थ में शक्तिशाली वही होता है जिसकी शक्ति इच्छा व अधिकार के नियत्रंण में होती है। ईश्वर के संदर्भ में हम यह कहते हैं कि जिस प्रकार ईश्वर में परम शक्ति होती है उसी प्रकार उसमें परम अधिकार भी […]

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    ईश्वर की शक्ति व इरादा : 1

    Rate this post हमारी चर्चा चल रही है ईश्वरीय गुणों और विशेषताओं के विषय पर पिछली चर्चा में ईश्वर के जीवन व ज्ञान के बारे में बात की गई इस चर्चा में ईश्वर के एक अन्य गुण “शक्ति” पर चर्चा कर रहे हैं। तो सब से पहले तो यह जानना आवश्यक है शक्ति क्या है? […]

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    ईश्वर के तुलनात्मक गुण : 2

    Rate this post इस चर्चा का यह निष्कर्ष निकला कि ईश्वर के तुलनात्मक गुणों को समझने के लिए ईश्वर और उसके दासों के मध्य संबंध को देखना चाहिए और पैदा करने वाले और पैदा होने वाले के मध्य जो संबंध है उसके प्रकार को भी समझना चाहिए। अर्थात यह समझना चाहिए कि ईश्वर जो पैदा […]

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    ईश्वर के तुलनात्मक गुण : 1

    Rate this post इससे पहले की चर्चाओं में हम यह बता चुके हैं कि ईश्वर के गुण दो प्रकार के होते हैं एक व्यक्तिगत और दूसरे तुलनात्मक। व्यक्तिगत गुणों पर चर्चा हो चुकी और अब बारी है तुलनात्मक गुणों की। तुलनात्मक गुण, उन गुणों को कहते हैं जो ईश्वर और मनुष्य के मध्य एक विशेष […]

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    रचयिता ही पालनहार : 2

    Rate this post पालनहार वही हो सकता है जिसमें सूझबूझ और सुशासन हो। इसके साथ ही सुरक्षा करना, जीवन व मृत्यु देना, रोज़ी-रोटी की व्यवस्था करना, कल्याण करना मार्गदर्शन करना और बुराईयों से रोकना तथा अच्छाईयों की ओर आकृष्ट करना जैसे कार्य पालनहार की विशेषताएं हैं और यह सब कुछ उसमें होना चाहिए। ईश्वर, पालनहार […]

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    रचयिता ही पालनहार : 1

    Rate this post यह सिद्ध होने के बाद कि आत्मभू अस्तित्व, सभी अन्य अस्तित्वों का मूल कारक है और इस बात के दृष्टिगत के पूरी सृष्टि को उसकी आवश्यकता है स्वयंभू अस्तित्व अर्थात ईश्वर का रचयिता और उसके अतिरिक्त हर वस्तु का उसकी रचना होना सिद्ध होता है। रचना के भी दो अर्थ हैं मनुष्य […]

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    ईश्वर और उसके दूत : 2

    Rate this post अब हम जो चर्चा आरंभ करने जा रहे हैं उसका उद्देश्य इस बात को सिद्ध करना है कि सृष्टि की वास्तविकता और जीवन के सही मार्ग की पहचान के लिए बोध व बुद्धि के अतिरिक्त भी कुछ अन्य साधन मौजूद हैं जो इतने विश्वस्नीय हैं कि उनसे गलती करने की संभावना नहीं […]

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    ईश्वर और उसके दूत :1

    Rate this post वास्तव में ईश्वरीय दूत ही मनुष्य द्वारा ईश्वर की पहचान में मुख्य सहायक होते हैं इस लिए ईश्वरीय दूतों की पहचान वास्तव में ईश्वर की पहचान का एक भाग है। इस से पहले इस श्रंखला के आरंभ में हम विस्तार से इस बात पर चर्चा कर चुके हैं कि बुद्धि रखने वाले […]

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    ईश्वर और उसका ज्ञान : 2

    Rate this post यह भी हम बता चुके हैं कि साधारण मनुष्य को परलोक के कल्याण के लिए ईश्वरीय ज्ञान की आवश्यता इसलिए होती है क्योंकि उसकी बुद्धि की सीमा होती है इसीलिए वह ईश्वरीय संदेशों को अपनी बुद्धि पर भी परख नहीं सकता तो फिर आम मनुष्य को यह विश्वास कैसे हो कि ईश्वरीय […]

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    ईश्वर और उसका ज्ञान 1

    Rate this post हमने ईश्वरीय दूतों की उपस्थिति की आवश्यकता और उस पर कुछ शंकाओं पर चर्चा की किंतु जब हम यह कहते हैं कि मानव ज्ञान सीमित है और मनुष्य केवल अपने ज्ञान के बल पर ही ईश्वरीय अर्थों की पूर्ण रूप से जानकारी प्राप्त नहीं कर सकता और उसके लिए ईश्वरीय संदेश आवश्यक […]

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    सृष्टिकर्ता अनिवार्य है 2

    Rate this post किन्तु इसका कहना है कि यह पूरा संसार अपने ढेरों आश्चर्यों और इतनी सूक्ष्म व्यवस्था के साथ स्वयं ही अस्तित्व में आ गया है”। नास्तिक ने अपनी हार मान ली और उठकर चला गया। मानव इतिहास के आरंभ से ही ईश्वर को मानने वाले सदैव अधिक रहे हैं अर्थात अधिकांश लोग यह […]

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    2 कारक और ईश्वर

    Rate this post दूसरी बात यह है कि ऊर्जा और पदार्थ की मात्रा का स्थिर रहना और सदैव रहना, इस अर्थ में नहीं है कि उन्हें किसी रचयता की आवश्यकता ही नहीं है बल्कि ब्रहमांड की आयु जितनी अधिक होगी उतनी ही अधिक उसे किसी रचयता की आवश्यकता होगी क्योंकि रचना के लिए रचयता की […]

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    कारक और ईश्वर

    Rate this post 1 पश्चिमी बुद्धिजीवी ईश्वर के अस्तित्व की इस दलील पर कि हर वस्तु के लिए एक कारक और बनाने वाला होना चाहिए यह आपत्ति भी करते हैं कि यदि यह सिदान्त सर्वव्यापी है अर्थात हर अस्तित्व के लिए एक कारक का होना हर दशा में आवश्यक है तो फिर यह सिद्धान्त ईश्वर […]

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    ख़ुदा शनासी व तौहीद

    Rate this post पहला हिस्सा 1) अल्लाह का वुजूद: हमारा अक़ीदह है कि अल्लाह इस पूरी कायनात का ख़ालिक़ है, सिर्फ़ हमारे वुजूद में,तमाम जानवरों में,नबातात में,आसमान के सितारों में,ऊपर की दुनिया में ही नही बल्कि हर जगह पर तमाम मौजूदाते आलम की पेशानी पर उसकी अज़मत,इल्म व क़ुदरत की निशानियाँ ज़ाहिर व आशकार हैं। […]

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    हमारे अक़ीदे

    Rate this post बिस्मिल्लाहि अर्रहमानि अर्रहीमि इस किताब की तालीफ़ का मक़सद और इसकी ज़िम्मेदारी 1)हम इस दौर में एक बहुत बड़े बदलाव का मुशाहेदह कर रहे हैं,ऐसा बदलाव जो आसमानी अदयान में से सबसे बड़े दीन “दीने इस्लाम” में रुनुमा हो रहा हैं।हमारे ज़माने में इस्लाम ने एक नया जन्म लिया है,आज पूरी दुनिया […]

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    मजमूअऐ मक़ालाते अक़ाऐद

    Rate this post {1}तौहीद तौहीद के सम्पूर्ण व परिपूर्ण प्रसंसा यह है किः इंसान को जान लेना चाहीए, कि ख़ूदा वन्दे आलम इस पृथ्वी को सृष्ट किया है. और इस पृथ्वी को अनुपस्थित से उपस्थित में लाया है। और उस पृथ्वी को समस्त प्रकार के निर्देश उस अल्लाह के हाथ में है, रुज़ी, ज़िन्दगी, मौत […]

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