islamic-sources

  • Rate this post

    १८ ज़िलहिज्जा पवित्र ईदे ग़दीर

    Rate this post १८ ज़िलहिज्जा सन दस हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ईश्वर के आदेश पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। आज ही के दिन पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ग़दीरे ख़ुम नामक स्थान पर एक लाख […]

  • Rate this post

    कैसी होगी मौत के बाद की जिंदगी

    Rate this post यह सवाल हमेशा से इंसान को परेशान करता रहा है। दुनिया का हर मज़हब मौत के बाद जिंदगी का यकीन दिलाता है जबकि मज़हब से इतर लोगों का मानना है कि मौतके बाद जिस्म सड़ गल कर मिट्‌टी हो जाता है और उसके बाद दूसरी जिंदगी का सवाल ही नहीं उठता। इस्लाम इसका यकीन दिलाता है कि मौत […]

  • Rate this post

    माहेरीने नफ़सीयात की सर्च और उनके खुलासे

    Rate this post इंसानी रूह के विभिन्न पहलुओं और उसकी वास्तविक इच्छाओं पर रीसर्च भी इस बात का स्पष्ट सबूत है कि धार्मिक एतेक़ाद और दीन एक फ़ितरी मसअला है। चार मशहूर व मारूफ़ एहसास (या चार उच्च इच्छाऐं (ख़्वाहिशात) और इंसानी रूह के बारे में नफ़सीयाती माहेरीन ने जो चार पहलू चीज़ें बयान की […]

  • Rate this post

    अल्लाह की पहचान

    Rate this post दीन का आधार सृष्टि के रचयता के वुजूद पर विश्वास रखना है और भौतिकवादी व इलाही विचारधारा के बीच मुख्य अंतर भी इसी विश्वास का होना और न होना है। इस आधार पर सत्य के खोजी के सामने जो पहली बात आती है और जिस का जवाब उसके लिए किसी भी दूसरे […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-29

    Rate this post पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के पौत्र हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की मकारेमुल अख़लाक़ नामक प्रख्यात दुआ में कहते हैं प्रभुवर! अपने प्रेम के लिए मेरे समक्ष एक सरल मार्ग खोल दे और उसके माध्यम से लोक-परलोक की भलाई को मेरे लिए संपूर्ण कर दे। मनुष्यों व पशुओं […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-28

    Rate this post पवित्र रमज़ान के महीने के अंतिम दिन हैं और इन दिनों में हम भली भांति यह समझ सकते हैं कि रोज़ा, मनुष्य की आतंरिक इच्छाओं के सामने एक मज़बूत ढाल की भांति हैं। मनुष्य रोज़ा रख कर अपने मन को, अनुचित इच्छाओं से रोकता है और अपने मन मस्तिष्क को हर प्रकार […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-27

    Rate this post पैगम्बरे इस्लाम (स) का कथन हैः “जो व्यक्ति भीषण गर्मी में रोज़े रखे और उसे प्यास लगे तो ईश्वर हज़ार फ़रिश्तों को भेजता है कि उसके चेहरे को सहलायें और उससे अच्छी बातें करें यहां तक कि (इफ़तार का समय आ जाये) वह इफ़तार कर ले, फिर ईश्वर कहता हैः हे मेरे […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-25

    Rate this post हज़रत इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम दुआ के इस भाग में कहते हैं” पालनहार! यदि मैं दुःखी होता हूं तो तू मेरा आश्रय है और यदि मैं वंचित होता हूं तू मेरी आशा व भरोसा है” इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम ने अपनी दुआ में उद्दा शब्द का प्रयोग किया है जिसका अर्थ वह धन व […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-24

    Rate this post   पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का कथन हैः ईश्वर कहता है कि बंदों के सभी भले कर्मों पर दस से लेकर सात सौ गुना अधिक तक पारितोषिक है सिवाए रोज़े के कि उसका पारितोषिक मैं स्वयं दूंगा।   पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-23

    Rate this post पवित्र रमज़ान-23 इमाम सज्जाद(अ) मकारेमुल अख़लाक़ नामक दुआ में एक स्थान पर ईश्वर से विनती करते हुये कहते हैः “हे पालनहार, मोहम्मद और उनके परिजनों पर सलाम भेज तथा मुझे जीवन के सभी कामों में सन्तुलन एवं मध्यमार्ग से लाभान्वित कर।”   सन्तुलन एवं मध्य मार्ग, अतिवाद से दूरी का नाम है […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-22

    Rate this post पवित्र रमज़ान-22 रमज़ान के पवित्र महीने में यह ऐसा समय है जब दयालु व तत्वदर्शी ईश्वर की दया व कृपा ने हर समय से अधिक उसके बंदों को अपना पात्र बना रखा है। रमज़ान के पवित्र महीने के इन दिनों के शबे क़द्र होने की अधिक संभावना है। शबे क़द्र वह रात […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-20

    Rate this post इमाम सज्जाद(अ) दुआ के इस भाग में ईश्वर से विनती करते हुये कहते हैः “हे पालनहार, मोहम्मद और उनके परिजनों पर सलाम भेज तथा मुझे जीवन के सभी कामों में सन्तुलन एवं मध्यमार्ग से लाभान्वित कर।” सन्तुलन एवं मध्य मार्ग, अतिवाद से दूरी का नाम है और यही वह सीधा रास्ता है […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-19

    Rate this post आज रमज़ान की १९ तारीख़ है।  वही तारीख़ जब वर्ष ४० हिजरी क़मरी में सुबह की नमाज़ पढ़ते समय ईश्वर के महान साहसी एवं न्यायी दास के सिर पर मानव समाज के अत्यंत तुच्छ व्यक्ति की द्वेषपूर्ण तलवार ने वार किया।  उस रात के बारे में इतिहास में आया है कि उस […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-18

    Rate this post इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम इस दुआ में एक स्थान पर ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहते हैः हे पालनहार! इस स्थिति में कि मेरा मार्गदर्शन तेरे लिए संभव है, पथभ्रष्टता की ओर मेरा झुकाव न हो। अरबी भाषा के ज़लाल शब्द का अर्थ होता है सीधे मार्ग से हटना और इसका विलोम […]

  • Rate this post

    पवित्र रमज़ान-17

    Rate this post इस साल पवित्र रमज़ान गर्मियों में पड़ा है।  विश्व के बहुत से देशों में लोग भीषण गर्मी में रोज़े रख रहे हैं।  निश्चित रूप से इस गर्मी में रोज़े का सवाब अर्थात पुण्य भी अधिक है।  इस बारे में पैग़म्बरे इस्लाम (स) का कथन है कि गर्मी के दिनों में रोज़े रखना, […]

  • Rate this post

    क़ुरआनी अलफ़ाज़ की ग़लत तफ़सीर (वहाबियत के हाथों)

    Rate this post इस मज़हब का अहम तरीन कारनामा तौहीद और शिर्क का मसअला है और जैसा कि मेने कहा कि यह सब इब्ने तेमिया के अक़ीदों की पैदा वार है। “मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब” अपनी मेगज़ीन “कश्फ़ुल शुबहात” में उन के बारे में लिखता है जिस का निचौड़ कुछ इस तरह है। 1) इस्लाम […]

  • Rate this post

    ज़्यादा वाज़ेह बयान (वहाबियत की उलझन)

    Rate this post वहाबी हज़रात के बर ख़िलाफ़, अरब के मुशरेकीन सिर्फ़ इबादत में शिर्क में गिरफ़तार नहीं थे, या दूसरे लफ़्ज़ों में “कल्मा” “ऐलाह” तमाम जगहों पर माबूद के माइनी में नहीं है बल्कि कभी कभी ख़ालिक़ के माइनी में भी इस्तेमाल होता है जैसा कि क़ुरआने मजीद का इरशाद हैः- امّ التّخذوا آلهةً […]

  • Rate this post

    इब्ने तेमिया की नाकामी की दलीलें

    Rate this post जैसा कि आलिम हज़रात जानते हैं वहाबी मज़हब का पैशवा और रेहबर जैसा कि उसने ख़ुद इस बात को क़बूल किया है “इब्ने तेमिया” के साथ ही उठता बैठता था इब्ने तेमिया भी शिर्क, तौहीद, शिफ़ाअत और इस जैसी तमाम बातों में यही नज़रया रखता था लेकिन क्या हुआ वोह दमिश्क़ में […]

  • Rate this post

    इस्लाम सब से अच्छा धर्म है

    Rate this post क़ुरआने करीम इस्लाम के अलावा किसी अन्य धर्म को इस अर्थ मे मान्यता नही देता। जैसे कि क़ुरआने करीम के सूरए आले इमरान की आयत न. 19 में वर्णन हुआ कि “इन्नद्दीना इन्दल्लाहि अलइस्लाम” अनुवादः–अल्लाह के समक्ष केवल इस्लाम धर्म ही मान्य है। इस्लाम का शाब्दिक अर्थ “समर्पण” है। और क़ुरआन की […]

  • Rate this post

    रोज़े के जिस्मानी फ़ायदे, साइंस की निगाह में

    Rate this post आज हम लोग रमज़ान के मुबारक महीने मे एक दीनी कर्तव्य समझ कर रोज़े रखते हैं जो सही भी है लेकिन दीनी कर्तव्य और सवाब के अलावा भी रोज़े के बहुत से फ़ायदे हैं जिनमे से कुछ फ़ायदे हमारी सेहत व स्वास्थ से सम्बन्धित हैं, लेकिन हम में से बहुत से लोग […]

  • पेज2 से 1412345...10...पहला »